शिव तांडव के प्रदर्शन से सातों ग्रंथियां से संतुलित स्राव होता है

Korba News - योग का एक महत्वपूर्ण विधा है शिव तांडव। भगवान शिव की इस नृत्य मुद्रा में भी शारीरिक स्वास्थ्य का गुण छिपा है।...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 06:36 AM IST
Korba News - chhattisgarh news seven orthopedic secretions from the performance of shiva tandava
योग का एक महत्वपूर्ण विधा है शिव तांडव। भगवान शिव की इस नृत्य मुद्रा में भी शारीरिक स्वास्थ्य का गुण छिपा है। शिविर के छठवें दिन शुक्रवार को योग गुरु डॉ.डीके आनंद ने योग प्रशिक्षणाथियों को इसका गुणकारी लाभ बताया।

उन्होंने बताया कि भगवान शिविर द्वारा दिया हुआ 3 तरह का तांडव नृत्य में पहला विष्णु तांडव, दूसरा शिव तांडव व तीसरा रूद्र तांडव को करने से शरीर के अंदर की सातों ग्रंथियों से निकलने वाला रस संतुलित रूप से स्राव होता है। डॉ. आनंद गुरुकुल योग एवं एक्यूप्रेशर संस्थान के सहयोग से सीएसईबी पूर्व में आयोजित आठ दिवसीय योग शिविर के छठवें दिन योग विधा सिखा रहे थे। उन्होंने बताया कि सातों ग्रंथियों से निकलने वाले रस का स्राव हाइपोथैलेमस, पीनियल ग्लैंड व पिट्यूटरी ग्लैंड, थायराइड -पैरा थायराइड ग्लैंड, थाइमस ग्लैंड, एड्रेनल ग्लैंड, पेनक्रियाज ग्लैंड, पुरुषों में टेस्टिस ग्लैंड, महिलाओं में ओवरी ग्लैंड होते हैं। इन सभी ग्रंथियों से निकलने वाले हारमोंस को संतुलित रूप से रस स्राव करने में तांडव नृत्य एक अहम भूमिका निभाता है। ऐसे तांडव नृत्य सिर्फ पुरुषों के लिए हैं, महिलाओं के लिए कौशिकी नृत्य है जिस तरह से पुरुष तांडव नृत्य करते हैं उसी तरह से महिलाओं को कौशिकी नृत्य भी सिखाया जाता है। योगाचार्य ने कुछ नए आसन भी बताए जिसमें चक्रासन, पदंग गुष्ट्रासन, अर्ध सिरसासन, गोमुखासन, सर्वांगासन, गौरक्षा आसन, मंडूकासन, मयूरासन, उष्ट्रासन एवं लता आसन के साथ प्रणाम की विधि बताएं साथ ही उन्होंने 5 से 7 व्यक्तियों को शंख प्रक्षालन करवाए। इसमें 12 घंटे उपवास करने के बाद नींबू पानी व नमक का घोल बनाकर 4 ग्लास पिलाने के बाद पेट की सफाई करवाई गई।

योग की क्रियाएं सीखते पुरुष और महिलाएं।

कौशिकी नृत्य से महिलाओं में 22 बीमारियों का समाधान

योग गुरु ़डॉ.आनंद ने बताया कि कौशिकी नृत्य से महिलाओं में होने वाली 22 तरह की बीमारियों का समाधान मिलता है। इस नृत्य को महिलाओं के साथ पुरुष भी कर सकते हैं परन्तु तांडव नृत्य केवल पुरुषों के लिए ही है। महिलाओं काे तांडव नृत्य करना निषेध है। अलग-अलग ग्रंथियों से रस का अलग -अलग स्राव होता है उससे शरीर तथा मन दोनों सन्तुलित रहता है।

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