--Advertisement--

ढेंगुरनाला और मुड़ापार तालाब गंदगी से पटे छठ पर्व पर श्रद्धालुओं को होगी परेशानी

छठी माता की आराधना का पर्व 11 नवंबर से शुरू हो जाएगा। नगर में रहने वाले पूर्वांचल वासियों में इस पर्व को लेकर...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 02:36 AM IST
Korba - dhegurala and mudapar ponds will be disturbed by devotees on the chhath festival
छठी माता की आराधना का पर्व 11 नवंबर से शुरू हो जाएगा। नगर में रहने वाले पूर्वांचल वासियों में इस पर्व को लेकर तैयारियां काफी पहले से शुरू हो गई थी। सात्विक महत्व के लिए इस पर्व पर उपासक परिवार पूरी तरह से शुद्धता का ख्याल रखता है वहीं अर्घ देने नदी या तालाबों में पहुंचता है। ऐसे में सात्विक पूजा को मलीन करने वाले घाटों पर ही रस्म निभाने लोग मजबूर होंगे। ढेंगुरनाला में तो पानी के नाम पर राखड़ सना कीचड़ है तो मुड़ापार तालाब में गंदगी बिखरी पसरी है। ढेंगुरनाला को छठ घाट का नाम दे दिया गया है। लेकिन वहां पूजा करने के लिए पानी ही नहीं है। नाला में पानी कम राखड़ युक्त कीचड़ अधिक है। ऐसे में इस पानी में उपासक उतरकर भगवान सूर्य को अर्घ देंगे। सात्विक महत्व लिए इस पूजा का विधान गंदे पानी से ही पूरा होगी। नाला में पानी के नाम पर कुछ भी नहीं है। कीचड़ व गंदगी से पटा है। इसके बाद भी पूजक अपनी जगह सुनिश्चित करने जुटे हुए हैं। मुड़ापार तालाब में 4 घाट बने हैं। लेकिन एक भी घाट व्यवस्थित नहीं है। सुविधा के लिए एसईसीएल अय्यप्पा मंदिर के पास घाट को हर साल व्यवस्थित किया जाता है। जहां बड़ी संख्या में लोग पूजा करने पहुंचते हैं। पूजा करने वाले लोग घाटों पर पहुंचकर साफ सफाई में जुट गए हैं।

ढेंगुरनाला में पानी से ज्यादा कीचड़, स्वयं साफ सफाई कर जगह करते हैं सुरक्षित

ढेंगुरनाला घाट का हाल जहां होगी पूजा।

12 को शुरु होगा निर्जला व्रत 14 की सुबह तक होगा पूरा

छठ उपासक 12 नवंबर की शाम को खरना की प्रसाद ग्रहण कर उपवास शुरू करेंगी। खरना के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखेंगी व शाम को स्नान-ध्यान कर अरवा चावल व गुड़ की खीर व रोटी तैयार कर सूर्य को स्मरण कर प्रसाद ग्रहण करेंगी। इसी के साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। जो कि 13 नवंबर को सूर्य के डूबते व 14 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ देने के साथ ही पूरा होगा।

12 को खरना, 13 को देंगे डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य

पं.दशरथनंदन द्विवेदी के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ 11 नवंबर को शुरू हो जाएगा। 12 को खरना, 13 को पहला अर्घ व 14 को दूसरा अर्घ देकर व्रत पूर्ण होगा। नहाय-खाय के दिन व्रती महिलाएं स्नान-ध्यान कर सेंधा नमक युक्त अरवा चावल, चने की दाल व लौकी की सब्जी का सेवन करेंगी। शहर के साथ बालको, दर्री, जमनीपाली, गेवरा, दीपका, बांकी मोंगरा, कुसमुंडा, रजगामार, पाली में भी मनाने तैयारी चल रही है।

सईसीएल की ओपन खदान बंद होने के बाद मानिकपुर पोखरी बनी

एसईसीएल की ओपन खदान बंद होने के बाद मानिकपुर पोखरी बन गई है। जहां गहराई के साथ पर्याप्त पानी हमेशा रहता है। साथ ही सर्वमंगला मंदिर के पास हसदेव नदी के किनारे अघोषित घाट का नाम देकर लोग पूजा करने पहुंचते हैं। ये दोनों घाट सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है। खतरनाक होने के बाद भी लोग मजबूरी में पूजा करते हैं। भीड़ अधिक होने के कारण कभी भी किसी के साथ हादसा होने की संभावना रहती है।

पूजा में कब क्या





X
Korba - dhegurala and mudapar ponds will be disturbed by devotees on the chhath festival
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..