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अनुबंध के बाद भी 28 मिलरों काे डीओ जारी नहीं, केंद्रों पर 62 हजार क्विंटल धान जमा

Korba News - जिले के खरीदी केन्द्रों में 62 हजार 564 क्विंटल धान जाम है। 77 राइस मिलरों से अनुबंध के बाद भी धान जाम होने में चौकाने...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 02:41 AM IST
Korba News - even after the contract 28 millers did not issue the do 62 thousand quintals of paddy deposits at the centers
जिले के खरीदी केन्द्रों में 62 हजार 564 क्विंटल धान जाम है। 77 राइस मिलरों से अनुबंध के बाद भी धान जाम होने में चौकाने वाला मामला सामने आया है। अनुबंध के बाद भी 28 से अधिक राइस मिलरों को डीओ (डिलीवरी आर्डर) ही जारी नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण राइस मिल एसोसिएशन ने कलेक्टोरेट में ज्ञापन सौंपकर 11 दिसंबर तक डीओ जारी नहीं होने पर विपणन कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी है। राज्य शासन ने पिछले दो वर्षों से जीरो शार्टेज रखने के लिए समितियों से धान उठाव करने मिलरों को डीओ जारी करने की व्यवस्था लागू की है। कस्टम मिलिंग के लिए पहले मिलर्स समितियों के बजाए संग्रहण केन्द्र से उठाव करते थे। अब सीधे समितियों से ही धान राइस मिल ले जाते हैं। मार्कफेड ने इस साल डीओ जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था सीधे रायपुर से की है। इसके बाद ही धान उठाव की गति धीमी हो गई है। कटघोरा क्षेत्र के 28 राइस मिलरों को अनुबंध के 15 दिन बाद भी डीओ जारी नहीं किया गया है। जिससे एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की है। 17 राइस मिलरों को ही एक-एक ट्रक धान का डीओ जारी किया गया था। दूसरी ओर कोरबा क्षेत्र के 31 राइस मिलरों को ही धान उठाव के लिए डीओ जारी हो रहा है। इसकी वजह से ही समितियों में धान जाम हो रहा है।

राइस मिल एसोसिएशन ने कलेक्टोरेट में सौंपा ज्ञापन

डीओ नहीं मिला तो करेंगे घेराव: प्रशांत

राइस मिल एसोसिएशन के सचिव प्रशांत अग्रवाल का कहना है कि नियम के अनुसार ही राइस मिलरों ने पंजीयन कराया है। साथ ही ऑन लाइन मांग भी की जा रही है। इसके बाद भी डीओ जारी नहीं हो रहा है। जिसके कारण कई राइस मिलर तो 15 दिन बाद भी खाली हाथ बैठे है। अगर पहल नहीं हुई तो 11 दिसंबर के बाद विपणन विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

खरीदी 33 करोड़ की, मिला 28 करोड़ 88 लाख

धान खरीदने के बाद किसानों को 28 करोड़ 19 लाख 50 हजार 964 रुपए का भुगतान किया जाना है। साथ ही बोनस की राशि 4 करोड़ 83 लाख 12 हजार 840 रुपए का भुगतान होना है। इस तरह 33 करोड़ 26 लाख 3804 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। दूसरी ओर विभाग से 28 करोड़ 88 लाख 66 हजार रुपए ही मिला है। हालांकि कर्ज की राशि काटने पर किसानों को भुगतान में समस्या नहीं है।

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