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कर्मियों का एटीएम, पासबुक ठेकेदारों के पास, कटौती कर नकद दे रहे वेतन

मानिकपुर खदान में काम करने वाले ठेका कर्मचारी शुक्रवार को बडी संख्या में डिप्टी जीएम आफिस पहुंचे। यहां उन्होंने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:55 AM IST

कर्मियों का एटीएम, पासबुक ठेकेदारों के पास, कटौती कर नकद दे रहे वेतन
मानिकपुर खदान में काम करने वाले ठेका कर्मचारी शुक्रवार को बडी संख्या में डिप्टी जीएम आफिस पहुंचे। यहां उन्होंने काम के घंटे, पे-स्लिप, पीएफ की जानकारी नहीं मिलने सहित अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया और नाराजगी जताई।

मानिकपुर परियोजना में ठेका कंपनियों में नियोजित कर्मचारियों ने बताया उनको 8-8 घंटे की जगह 12-12 घंटे तक काम करने को कहा जा रहा है। ठेकेदारों ने कर्मचारियों का एटीएम, पासबुक तक अपने पास रख लिया है। कैश में वेतन का भुगतान कर रहे हैं और कर्मचारियों से साइन करा रहे हैं। ठेका कर्मियों ने बताया कि उनके खाते में 25 से 30 हजार या इससे अधिक रकम जमा होती है। लेकिन ठेका कंपनी हर माह 13 से 14 हजार तक ही वेतन भुगतान कर रहे हैं। कंपनी में पिछले 6-7 माह से ऐसा चल रहा है। वेतन पर्ची भी नहीं दिया जा रहा है। जिससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि कर्मचारियों का वास्तविक वेतन क्या है या फिर उनके वेतन से कहां कितने की कटौती हो रही है। पीएफ की जानकारी मिलने पर गोलमोल जवाब दिया जाता है। मानिकपुर डिप्टी जीएम आफिस के सामने 50 से अधिक की संख्या में ठेका कर्मचारी एकत्रित हुए थे। जिन्होंने वेतन, काम की टाइमिंग, पे-स्लिप, पीएफ भुगतान की जानकारी नहीं मिलने सहित अन्य मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद किया। ठेका कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की शिकायतों को लेकर प्रबंधन के अधिकारी भी जवाब देने से बचते रहे।

श्रमिक बोले- खाते में 25-30 हजार जमा होते हैं, हाथ में 13-14 हजार आते हैं

कार्यालय के सामने एकजुट हुए ठेका कर्मी।

सभी कंपनियों में यही हाल, प्रबंधन नहीं दे रहा ध्यान

शिकायत लेकर पहुंचे कर्मचारियों ने बताया कि खदान में 200 से ज्यादा ठेका कर्मी आॅपरेटर, हेल्पर, ड्राइवर सहित अन्य पदाें पर काम करते हैं। जिनको कई तरह की सुविधाएं नहीं मिल रही है। ठेका कंपनी अधिक समय तक काम कराने के लिए भी अब दबाव डालते हैं। जबकि पहले प्रबंधन ने तय समय तक ही ड्यूटी कराने के लिए लिखित में आश्वासन दिया था। शिकायत के बाद भी प्रबंधन के अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं। इसलिए समस्या दूर नहीं हुई है।

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