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निजी स्कूलों में कितनी सीट, अभी स्पष्ट नहीं 16वें दिन भी नहीं हो सका वेब पोर्टल जनरेट

स्कूल शिक्षा विभाग से जारी फरमान के अनुसार सोमवार से निजी स्कूलों में बीपीएल परिवार के बच्चों काे दाखिला दिलाने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:05 AM IST

स्कूल शिक्षा विभाग से जारी फरमान के अनुसार सोमवार से निजी स्कूलों में बीपीएल परिवार के बच्चों काे दाखिला दिलाने ऑनलाइन आवेदन शुरू होना था। पर शासन से वेबपोर्टल जनरेट नहीं होने के कारण आवेदन की प्रक्रिया आज भी अभिभावक पूरी नहीं कर पाए। अभिभावकों के समक्ष अब इस बात को लेकर चिंता बढ़ने लगी है कि वे जहां एडमिशन कराना चाहते हैं उस स्कूल में 1 अप्रैल से एडमिशन के साथ पढ़ाई शुरू हो गई है। ऐसे में उनके बच्चों का क्या होगा। जिनकी अब तक एडमिशन की प्रक्रिया ही शासन शुरू नहीं कर पाया है। 1 अप्रैल को जनरेट होने वाला वेबपोर्टल 16वें दिन भी काम नहीं किया।

जिले के सभी निजी स्कूलों में नर्सरी से पहली कक्षा तक शिक्षा के अधिकारी के तहत बीपीएल परिवार के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा के लिए प्रवेश दिया जाना है। इस बार निजी स्कूल से आधा किलोमीटर दूर तक निवास करने वाले बीपीएल परिवार को लाभ दिया जाना है। जिसको लेकर अभिभावक तो उत्सुक हैं लेकिन निजी खासकर बड़े स्कूलों की ओर से इसमें रुचि नहीं दिखाए जाने के कारण अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि इस बार कितने बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला दिलाया जाएगा। इसका आंकड़ा विभाग के पास भी नहीं है।

जिले के बड़े जिजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों के एडमिशन पर संशय बरकरार

शासन भी नहीं कर पा रहा भुगतान

निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों की पढ़ाई का खर्च राज्य सरकार वहन करता है। वर्ष 2016-17 में दाखिला लिए 1977 बच्चों पर 4 करोड़ 71 लाख रुपए खर्च हुआ। जिसके एवज में निजी स्कूलों को 3 करोड़ 51 लाख का भुगतान किया जा चुका है जबकि 1 करोड़ 20 लाख का भुगतान होना शेष है। संभवत: इसीलिए जिला शिक्षा विभाग निजी स्कूलों पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो रहा है।

14834 बच्चों को मिल रहा आरटीई का लाभ

आरटीई लागू होने के बाद वर्तमान में जिले के निजी स्कूलों में 14 हजार 834 बच्चे पहली से 8वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। जिनका पूरा खर्च शासन वहन कर रहा है। शिक्षा के अधिकार के तहत इस बार एडमिशन के बाद यह आंकड़ा बढ़ जाएगा। प्रवेश मंे विलंब होने के कारण कई अभिभावक निराश हैं।

नहीं जनरेट हुआ पोर्टल:आरटीई के जिला प्रभारी एमएल ब्राह्मणी ने बताया कि सोमवार को भी वेब पोर्टल जनरेट नहीं हो सका है। इसका कारण स्पष्ट नहीं है। क्योंकि राज्य स्तर पर एक साथ जारी होना है। जिन निजी स्कूलों ने पंजीयन नहीं कराया है उनसे जानकारी मांगी जा रही है।

बड़ों की रुचि कम, छोटे एडमिशन में रहते हैं आगे

आरटीई में दाखिला देने के पक्ष में बड़े निजी स्कूलों के प्रबंधन नहीं होते हैं। दूसरी ओर छोटे स्कूलों की रुचि अधिक होती है। सूत्रों का कहना है कि प्रति बच्चे पर अधिकतम 11500 रुपए शासन से मिलता है। इस राशि को दूसरे ढंग से आहरित करने के लिए छोटे निजी स्कूल तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं।

प्रशासनिक उदासीनता चिंताजनक : रामसिंह

जकांछ के रामसिंह अग्रवाल ने कहा कि गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने में प्रशासनिक उदासीनता चिंताजनक है। निजी स्कूल अब तक कोर्स का 5 से 10 प्रतिशत भाग पूरा करा चुके हैं उसके बाद भी आरटीई के तहत निजी स्कूलों मंे एडमिशन की प्रक्रिया तक शुरू नहीं कर पाया है।

46 निजी स्कूलों ने नहीं कराया रजिस्ट्रेशन

शिक्षा विभाग ने समस्त निजी स्कूलों से पंजीयन व अलग-अलग गांवों में चल रही शाखाओं की जानकारी मांगी है। इसके बाद भी 46 ऐसे स्कूल हैं जिन्होंने कोई जानकारी नहीं दी है और न ही पंजीयन कराया है। स्कूल का नया सत्र शुरू हो रहा है या नहीं, इसका पता नहीं है। गैर पंजीकृत स्कूलों में ऑनलाइन आवेदन करने पर बाद में शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूलों को राशि जारी करने में समस्या होगी। जिले में 51 हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को आरटीई में एडमिशन दिलाने नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

4000 बच्चों के एडमिशन की संभावना

इस सत्र में निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी है। जिससे सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। संभावना जताई जा रही है कि नए सत्र में निजी स्कूलों में इस बार 4000 बीपीएल परिवार के बच्चों को एडमिशन देने सीट सुरक्षित होगी। हालांकि सभी स्कूलों का पंजीयन अपडेट नहीं होने के कारण विभाग के पास नया आंकड़ा नहीं है। सोमवार को भी पंजीयन कराने वाले निजी स्कूल अपनी जानकारी डीईओ कार्यालय में देने पहुंच रहे थे।

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