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भू-विस्थापित 2 मई को ठप करेंगे कोयला उत्पादन व डिस्पैच का काम

एसईसीएल के भू-विस्थापित 2 मई काे प्रस्तावित आंदोलन की तैयारी में जुटे हंै। सोमवार को गेवरा में ऊर्जाधानी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:10 AM IST

भू-विस्थापित 2 मई को ठप करेंगे कोयला उत्पादन व डिस्पैच का काम
एसईसीएल के भू-विस्थापित 2 मई काे प्रस्तावित आंदोलन की तैयारी में जुटे हंै। सोमवार को गेवरा में ऊर्जाधानी भू-विस्थापित कल्याण समिति के पदाधिकारियों की मीटिंग हुई। एसईसीएल प्रबंधन इस कोशिश में लगा है कि भू-विस्थापित आंदोलन न करें। लेकिन भू-विस्थापित नौकरी, मुआवजा, पुनर्वास सहित अन्य मांगों को लेकर 2 मई को गेवरा परियोजना में कोयला उत्पादन बंद कर कोल डिस्पैच ठप करने की बात पर अड़े हैं।

भू-िवस्थापित आंदोलन को सफल करने की कोशिश कर रहे हंै। उनका कहना है कि नौकरी, मुआवजा व पुनर्वास के मुद्दे पर आंदोलन के ऐलान के बाद भी अब तक प्रबंधन के साथ कोई वार्ता नहीं हुई है। हालांकि प्रशासन ने लॉ एंड आर्डर का हवाला देते हुए आंदोलन नहीं करने का आग्रह जरूर किया है। लेकिन भू-विस्थापित अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटने वाले हैं। 2 मई को प्रस्तावित आंदोलन हर हाल में होकर रहेगा।

आंदोलन की तैयारियेां के संबंध में चर्चा करते समिति के पदाधिकारी।

41 गांवों के 2 हजार से अधिक लोग होंगे शामिल

आंदोलन में एसईसीएल के प्रभावित ग्राम भठोरा, नरईबोध, रलिया, भिलाईबाजार, बरभांठा, सलोरा, पंडरीपानी, खोडरी, विजय नगर, कोसमंदा, बरेली, खुसरूडीह, चंदनगर, बिंझरा, जुनाडीह, घाटमुड़ा, पाली, दुरपा, जरहाजेल, खम्हरिया, बरपाली, मलगांव सहित 41 गांवों के 2 हजार प्रभावित लोग शामिल होंगे।

दो साल पहले बनी थी ऐसी स्थिति, नहीं निकला नतीजा

नौकरी, मुआवजा व पुनर्वास से जुड़ी मांग पर भू-विस्थापित पहले भी गेवरा खदान में आंदोलन कर चुके हैं। इसके बाद भी एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलाया था। आश्वासन पर आंदोलन बीच में ही स्थगित किया गया था। बैठकों का भी नतीजा नहीं निकला। जिसके कारण फिर आंदोलन की स्थिति बन रही है।

नहीं हटेंगे पीछे, हर हाल में होगा आंदोलन: सुरेंद्र राठौर

भू-विस्थािपत कल्याण संघ के पदाधिकारियों की मीटिंग गेवरा में हुई। जिसमें अांदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई है। संगठन के अध्यक्ष सुरेंद्र राठौर ने बताया कि 2 मई को प्रस्तावित आंदोलन किसी हाल में नहीं टलेगा। भू-विस्थािपतों की समस्या व मांग काफी पुरानी है। प्रबंधन मांगों को लेकर गंभीर नहीं है।

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