Hindi News »Chhatisgarh »Korba» खुले में खड़े होते हैं ढाई करोड़ के वाहन सात साल बाद भी नहीं बनवाया गया शेड

खुले में खड़े होते हैं ढाई करोड़ के वाहन सात साल बाद भी नहीं बनवाया गया शेड

ट्रेन में सफर करने वालों में हर रोज 500 ऐसे यात्री होते हैं जो अपने वाहन से स्टेशन पहुंचते हैं। बाइक व कार स्टैंड में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:35 AM IST

खुले में खड़े होते हैं ढाई करोड़ के वाहन सात साल बाद भी नहीं बनवाया गया शेड
ट्रेन में सफर करने वालों में हर रोज 500 ऐसे यात्री होते हैं जो अपने वाहन से स्टेशन पहुंचते हैं। बाइक व कार स्टैंड में पार्क होते हैं। 6 घंटा से 15 मिनट भी अधिक हुआ तो स्टैंड संचालक 12 घंटे का चार्ज 18 रुपए वसूलता है। सभी वाहनों का औसत मूल्य निकालें तो हर दिन ढाई करोड़ रुपए के वाहन पार्किंग में खड़े होते हैं। इनकी सुरक्षा को लेकर रेल प्रशासन व स्टैंड संचालक दोनों ही अनदेखी कर रहे हैं। रेल प्रशासन अनुबंध राशि तो संचालक पार्किंग शुल्क तक ही सीमित होते हैं।

पेट्रोल चलित वाहन खुले आसमान में पार्क होते हैं। गर्मी में जिले का तापमान 40 से 46 डिग्री तक पहुंचता है। इस मौसम में आगजनी की संभावना बढ़ जाती है। एक चिंगारी इन वाहनों को खाक कर सकती हैै। स्टैंड का स्थल परिवर्तन होने के 7 साल बाद भी शेडयुक्त पार्किंग जोन नहीं मिल पाया है। स्टैंड के नाम पर रेलवे अपनी हिस्सेदारी ठेका देकर वसूल कर लेता है। यात्रियों के वाहनों की सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। हर दिन रेलवे स्टेशन के स्टैंड में 500 से अधिक बाइक तो 20 से 25 कारें भी खुले असुरक्षित खड़ी रहती हैं।

पेट्रोल चलित वाहन खुले आसमान में पार्क होते, खतरे की रहती आशंका

पार्किंग में खुले मैदान में खड़ी बाइकें।

ठेकेदार को हर रोज मिलता है 9000 रुपए:स्टेशन के पार्किंग जोन में प्रतिदिन 500 बाइक खड़ी होती है। 12 घंटे में प्रति वाहन का किराया ठेकेदार 18 रुपए वसूलता है। ऐसे में 500 बाइक से एक दिन में 9000 रुपए उसके पास पहुंच जाते हैं। महीने का औसत शुल्क लें तो पार्किंग जोन से 2 लाख 70 हजार रुपए मिलते हैं। 32 लाख रुपए सालाना समान्य रूप से आते हैं। जबकि हर दिन 25 से 30 कार पार्किंग में रहता है। प्रति कार 12 घंटे का पार्किंग शुल्क 25 रुपए लिया जाता है।

72 लाख रुपए में 3 साल का अनुबंध

साइकिल स्टैंड का अनुबंध रेल प्रशासन 3 साल के लिए करता है। वर्तमान में स्टैंड का ठेका 72 लाख में है। लंबे समय से यह अनुबंध एक ही ठेकेदार से हो रहा है। यही कारण है कि ठेकेदार के कर्मचारी शुल्क के नाम पर अक्सर यात्रियों के साथ उलझते रहते हैं।

एआरएम बोले-शेड निर्माण का निर्णय मंडल मुख्यालय से होगा

रेलखंड कोरबा के एआरएम आदित्य गुप्ता ने बताया कि पार्किंग जोन में शेड निर्माण को लेकर कोई दिशा निर्देश नहीं है। वाहनों की सुरक्षा का जिम्मा ठेकेदार का है। शेड निर्माण का निर्णय मंडल मुख्यालय से ही होगा।

जीएम के आश्वासन पर भी नहीं मिली सुविधा

वर्ष 2012 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के डीआरएम रहे अजय प्रताप सिंह अपने कोरबा प्रवास थे। पार्किंग एरिया का उन्होंने निरीक्षण किया था। तब उन्होंने यह आश्वासन दिया था कि पार्किंग स्थल पर शेड की सुविधा दी जाएगी। उनकी घोषणा पर जो भी आगे अधिकारी उनका ध्यान नहीं गया। या फिर वे चाहकर भी सुविधा नहीं देना चाहते हैं।

यात्रियों को अक्सर रहती है कर्मचारियों से शिकायत

जिस किसी भी यात्री का बाइक या कार पार्क होता है उनसे अक्सर पार्किंग चार्ज को लेकर स्टैंड ठेकेदार से विवाद होता रहता है। यात्रियों को यह शिकायत हमेशा रहती है कि स्टैंड ठेकेदार उनसे अतिरिक्त उगाही करता है। अक्सर दो रुपए के स्थान पर 5 रुपए लेकर 3 रुपए की टाफी थमा दी जाती है। इतना ही नहीं 6 घंटे से 15 मिनट भी अधिक हुआ तो यात्रियों से 12 घंटे का चार्ज लिया जाता है। लेकिन वाहनों की सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Korba

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×