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दो नाबालिग बच्चों का साथियों ने ही एमएमएस बनाकर किया वायरल, परिजन ने दर्ज कराया केस

Korba News - स्मार्ट फोन के साथ समाज में आए खुलेपन और किशोरों पर इसके दुष्परिणाम का एक बेहद संवेदनशील चौंकाने वाला मामला कोरबा...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 02:41 AM IST
Korba News - viral family members filed with mms by two minor children
स्मार्ट फोन के साथ समाज में आए खुलेपन और किशोरों पर इसके दुष्परिणाम का एक बेहद संवेदनशील चौंकाने वाला मामला कोरबा में सामने आया है। यहां एक नाबालिग जोड़े के बीच के अंतरंग क्षणों का उनके ही क्लासमेट ने छिपकर एमएमएस बना लिया। इतना ही नहीं बाद में उसे उसका वीडियो दिखाकर धमकी भी दी गई। जब बात नहीं मानी गई तो उस एमएमएस को वायरल कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित बच्ची के परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में लिप्त चार लड़कियों सहित 6 आरोपियों पर अपराध दर्ज किया है।

वैसे तो यह घटना करीब एक पखवाड़े पहले की बताई गई है। इसकी पुष्टि दर्री सीएसपी पुष्पेंन्द्र सिंह बघेल ने की है। हालांकि मामला बच्चों से जुड़ा संवेदनशील होने के कारण पुलिस इसका पूरा खुलासा नहीं कर रही है। जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने वाले एक छात्र और उसकी सहपाठी के बीच खासी निकटता थी। यह बात उनके क्लासमेट को भी पता थी। सभी एक-दूसरे के राजदार थे। ऐसे ही एक दिन यह ग्रुप एक जगह मिला जहां एक जोड़े के बीच के नाजुक पलों को छुपकर रिकार्ड कर लिया गया। यह सारा कुछ एक योजना के तहत किया गया। बाद में इस एमएमएस के द्वारा दबाव भी बनाया गया। इसको लेकर इस ग्रुप के साथियों में कोई विवाद हुआ और एमएमएस क्लिप वायरल कर दी गई। इसकी चर्चा धीरे-धीरे फैलते गई। तब पीड़ित बच्ची ने अपने पैरेंट्स को यह बात बताई। साहस करके पैरेंट्स पुलिस के पास गए। पहले तो नाहक की बदनामी होगी यह समझाकर रिपोर्ट से बचने की सलाह दी गई।

मगर पैरेंट्स ने माना कि ऐसा दुस्साहस फिर कभी कोई किसी के साथ न कर सकें इसलिए कानूनी कार्रवाई वे जरूरी मानते हैं। उनके इस रूख के बाद पुलिस ने धारा 120 बी, 376, 376 डी, 506 बी, 509 ख, लैंगिक अपराधों से बालको को संरक्षण अधिनियम की धारा 4 व 6 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। इन धाराओं के तहत यदि दोष सिद्ध होता है तो 7 वर्ष से लेकर उम्रकैद व जुर्माने की सजा आरोपियों को हो सकती है।

दर्ज की गई धाराएं बलात्संग, उसमें सहयोगी होने, षड़यंत्र रचने व महिला लज्जा के अनादर के अपराध से जुड़ी हुई है। पुलिस का कहना है कि चूंकि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है। साथ ही सारे आरोपी भी नाबालिग है। ऐसे में उन्हें किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

अब परेशान हैं आरोपियों के पालक भी

इस सारे मामले का दूसरा पहलू यह है कि अब आरोपी बने सारे बच्चों के पैरेंट्स भी खासे परेशान है। पहले तो पीड़ित बच्ची के अभिभावक ही व्यथित थे। अब आरोपियों के पैरेंट्स अचानक यू अपने बच्चों के गंभीर अपराध में नामजद हो जाने पर चिंतित है कि कैसे वे इस परिस्थिति का सामना करें। सभी के अभिभावक शासकीय सेवा में है। अपने बच्चों के लिए भी वे अच्छा करियर सोच रहे थे, मगर ऐसे अपराध उसकी राह में बाधा बनकर ही खड़े होते हैं। अब इसे बच्चों की नादानी कहे या डिजिटलाइजेशन के बाद किशोरवय पर पड़ रहे बुरे प्रभावों का असर। इतना तो तय है कि अभी तो सभी पक्ष एक बड़ी समस्या से घिर गए हैं।

देखा यह जा रहा है कि स्टडी टूर के नाम पर स्कूल से ट्रीप आयोजित होती है। इस दौरान के अनेक किस्से सामने आते हैं जिसमें टीचर अपने में मगन है व तरूणाई के छात्र छात्राओं पर नजर नहीं रखी जा रही है। शहर के एक पब्लिक स्कूल में तो माह में एक बार अपर क्लासेस के लड़के-लड़कियों को कक्ष में ही अकेला छोड़ दिया जाता है। कुछ अरसा पहले एक कोचिंग क्लास के संचालक को भी पैरेंट्स ने अवांछित गतिविधि करते हुए पकड़ा था। कोचिंग हो या ट्यूशन पढ़ाने वाले, वहां लड़के-लड़कियों का जमावड़ा कुछ अलग ही अंदाज में नजर आने लगा है। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

स्कूल व कोचिंग प्रबंधन भी लापरवाह

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