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जिले की 65 फीसदी नहर बदहाल, किसान खरीफ फसल के लिए भी बारिश पर निर्भर

भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर बैकुंठपुर। शहरों के विकास की लाइफ लाइन पक्की सड़कें होती है ठीक वैसे ही ग्रामीण...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:50 AM IST
भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर

बैकुंठपुर। शहरों के विकास की लाइफ लाइन पक्की सड़कें होती है ठीक वैसे ही ग्रामीण इलाकों की लाइफ लाइन पक्की नहर होती हैं। लेकिन जिलें में नहरों की बदहाल हालत देखकर किसानों की आर्थिक स्थिति को समझ सकता है। इधर सरकार के नुमाइंदे शिविरों और जन सभाओं में किसानो की आय 2022 तक दोगुनी करने की बात कह रहे है। बीतें 6 साल में नहरों और जलाशयों के रखरखाव में करीब 26 करोड़ से अधिक राशि खर्च कर जलाशय और नहरों की हालत नहीं सुधर सकी।

जिले के पाचं विकास खंड में 509 किमी.लम्बी नहर का जाल 30 साल पहले बिछा दिया गया था लेकिन बीतें 15 साल में नहर का 65 फीसदी हिस्सा चोक हो गया या डैमेज हो गया। आज तक 175 किमी. नहर ही पक्की बन सकी है। मतलब आज भी जिले में खरीफ और रबी फसल भगवान भरोसे ही है। हालाकि हर साल नहरों के सफाई और मेंटेंनेंस के लिए मनरेगा सहित अन्य मदों से इरिगेशन विभाग को करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई जाती है लेकिन हालात सुधर ही नही रहे है। वर्ष 2016-17 में 18476 हेक्टेयर सिंचाई का रकबा रखा गया था। लेकिन विभागीय रिकार्ड के अनुसार 6094 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया लेकिन पूर्व सिंचाई एवं वित्त मंत्री ने बताया कि जिलें सिंचाई का कुल रकबा साढ़े 3 हजार हेक्टेयर ही है। जबकि वर्ष 2017-18 के लिए भी सिंचाई का लक्ष्य 18,476 हेक्टेयर खरीफ फसल के लिए रखा गया था। जब आधी से अधिक नहरें जाम है या डैमेज है तो एैसे हालत में खेतों तक डेम से पानी पहुचाना कैसे संभव है? जिले में 327 स्टाप डेम है। इनमें से 70 फीसदी स्टाप डेम के गेट खराब है या है ही नही। बीतें तीन साल में कोरिया जिले में दो बार अल्पवर्षा हुई है। इसमें साल 2015-16 में अकाल का सामना भी किसानोु को करना पड़ा था। उस वक्त भी डेम, नहरोु के रख रखाव के लिए करोड़ों खर्च हुए थे।

नहरों का समय पर रख रखाव न हाेने के कारण किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी

छह हजार हेक्टेयर में से सिंचाई की सुविधा: ईरिगेशन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 6 हजार हेक्टेयर रकबा में सिंचाई की सुविधा है। डा.सिंहदेव ने बताया कि जिले में करीब साढ़े 3 हजार हेक्टेयर रकबा में ही सिंचाई की सुविधा है। इन हालातो में जिले का किसान पूरी तरह से खरीफ फसल के लिए वर्षा जल पर निर्भर है। रवि फसल का रकबा लगातार घट रहा है। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार नही हो पा रहा है। पूर्व सिंचाई मंत्री एवं छत्तीसगढ़ शासने के पहले वित्त मंत्री डा.रामचंद्र सिंहदेव ने बताया कि 1980 के बाद यहां सिंचाई परियोजना पर काम शुरू किया गया था।

भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर

बैकुंठपुर। शहरों के विकास की लाइफ लाइन पक्की सड़कें होती है ठीक वैसे ही ग्रामीण इलाकों की लाइफ लाइन पक्की नहर होती हैं। लेकिन जिलें में नहरों की बदहाल हालत देखकर किसानों की आर्थिक स्थिति को समझ सकता है। इधर सरकार के नुमाइंदे शिविरों और जन सभाओं में किसानो की आय 2022 तक दोगुनी करने की बात कह रहे है। बीतें 6 साल में नहरों और जलाशयों के रखरखाव में करीब 26 करोड़ से अधिक राशि खर्च कर जलाशय और नहरों की हालत नहीं सुधर सकी।

जिले के पाचं विकास खंड में 509 किमी.लम्बी नहर का जाल 30 साल पहले बिछा दिया गया था लेकिन बीतें 15 साल में नहर का 65 फीसदी हिस्सा चोक हो गया या डैमेज हो गया। आज तक 175 किमी. नहर ही पक्की बन सकी है। मतलब आज भी जिले में खरीफ और रबी फसल भगवान भरोसे ही है। हालाकि हर साल नहरों के सफाई और मेंटेंनेंस के लिए मनरेगा सहित अन्य मदों से इरिगेशन विभाग को करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई जाती है लेकिन हालात सुधर ही नही रहे है। वर्ष 2016-17 में 18476 हेक्टेयर सिंचाई का रकबा रखा गया था। लेकिन विभागीय रिकार्ड के अनुसार 6094 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया लेकिन पूर्व सिंचाई एवं वित्त मंत्री ने बताया कि जिलें सिंचाई का कुल रकबा साढ़े 3 हजार हेक्टेयर ही है। जबकि वर्ष 2017-18 के लिए भी सिंचाई का लक्ष्य 18,476 हेक्टेयर खरीफ फसल के लिए रखा गया था। जब आधी से अधिक नहरें जाम है या डैमेज है तो एैसे हालत में खेतों तक डेम से पानी पहुचाना कैसे संभव है? जिले में 327 स्टाप डेम है। इनमें से 70 फीसदी स्टाप डेम के गेट खराब है या है ही नही। बीतें तीन साल में कोरिया जिले में दो बार अल्पवर्षा हुई है। इसमें साल 2015-16 में अकाल का सामना भी किसानोु को करना पड़ा था। उस वक्त भी डेम, नहरोु के रख रखाव के लिए करोड़ों खर्च हुए थे।

एक नजर सिंचाई पर

धान का रकबा - 60,300 हैक्टेयर सिंचित एरिया का डिजाइन है - 29000 हैक्टेयर

साल 2017-18 में सिंचाई का लक्ष्य था - 18,476 हेक्टेयर

सिंचाई का कुल रकबा रहा - 6094 हेक्टेयर

एक्च्युएल सिंचाई का रकबा रहा- 3500 हेक्टेयर

पंचायत ने डेम का गेट ठीक नहीं कराया

ग्राम पंचायत अमरपुर में छोटे डेम का निर्माण कराया गया। पहले इस डेम का रखरखाव जल संसाधन विभाग के जिम्मे में थे लेकिन बीतें 15 साल पहले इसे पंचायत को सौंप दिया। गेट में खराबी आने के कारण आज तक उसे पंचायत ने और जनपद ने सुधारने की ओर ध्यान नही दिया।

श्रम मंत्री के आदर्श ग्राम में नहीं आया पानी

नरकेली, मोदीपारा, बुढ़ार जो कि श्रम मंत्री भइयालाल राजवाड़े का आदर्ष ग्राम है। यहां बीतें 15 साल में यहां के कई नहरों में पानी आया ही नहीं।