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ननि के पास एक फायर ब्रिगेड, उसकी भी टंकी फूटी, ऐसे में कैसे बुझेगी आग

Koria News - नगर निगम चिरमिरी का फायर ब्रिगेड वाहन कंडम हो चुका है। जब भी आग लगने की कोई बड़ी घटना होती है तो दमकलकर्मियों का दम...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 02:21 AM IST
Chirmiri News - a fire brigade near nani his tank too fluttering how will it fire in such a way
नगर निगम चिरमिरी का फायर ब्रिगेड वाहन कंडम हो चुका है। जब भी आग लगने की कोई बड़ी घटना होती है तो दमकलकर्मियों का दम फूलने लगता है। शनिवार को चौक-चौराहों की सफाई करने गई फायर ब्रिगेड टैंकर की टंकी फुट गई। अब इसे फायर स्टेशन में खड़ा कर दिया गया है।

गौरतलब है कि माइंनिग क्षेत्र होते हुए भी चिरमिरी में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। एसईसीएल क्षेत्र में कहीं पर भी आग लग जाए तो प्रबंधन फायर (वाटर) टेंडर निकालती है। नगर दमकल वाहन की कमी से जूझ रहा है। चिरमिरी के अलावा ग्रामीण अंचल खड़गवां, सरभोका में भी फायर सुरक्षा के इंतजाम भगवान भरोसे हैं। अगर कहीं कुछ हादसा हो जाता है तो चिरमिरी की फायर ब्रिगेड से मदद ली जाती है। फिर भी इसकी चिंता न तो नगर निगम को है न ही एसईसीएल प्रबंधन को। हैरानी की बात तो यह है कि नगर निगम की दमकल गाड़ी 13 साल से ज्यादा पुरानी है। इससे पानी लीकेज होता रहता है। नगर निगम हर बार इस वाहन को बनवाकर ही काम ले रहा है। जबकि नगर में नई फायर ब्रिगेड वाहन की जरूरत है।



माइंनिग क्षेत्र में चिरमिरी में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं

चिरमिरी। फायर िब्रगेड गाड़ी की टंकी फटने से व्यर्थ बहता पानी फायर स्टेशन पर खडी़ गाड़ी।

एसईसीएल की खदानों में लगती रहती है आग

125 वर्ग किमी में फैले चिरमिरी शहर में एसईसीएल की कोयला खदानें संचालित हैं। जहां आए दिन आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं।

इसके बावजूद प्रबंधन के द्वारा अपनी फायर ब्रिगेड सिस्टम को दुरुस्त नहीं कराया गया है। सालों से एसईसीएल का फायर ब्रिगेड वाहन कबाड़ हो रहा है। ऐसे में आग लगें तो एसईसीएल को अपनी मनेंद्रगढ़ रेस्क्यू आॅफिस से दमकल मंगाना पड़ेगा। एरिया सेफ्टी अफसर गोपाल सिंह ने बताया कि आग लगने पर तत्काल फायर (वाटर) टेंडर निकालकर घटना स्थल पर संबंधित दमकल को भेजा जाता है।

आग लगने के बहुत देर बाद पहुंचते हैं दमकलकर्मी

नगर निगम अग्निशमन विभाग संसाधन और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सूचना मिलने के आधे से एक घंटे के बाद जब तक कर्मचारी पहुंचते हैं तो ज्यादातर जगहों पर सबकुछ राख हो चुका होता है। गर्मी के समय एसईसीएल के कुरासिया वर्कशॉप में रखे टायरों में भयंकर आग लग गई थी। एसईसीएल अधिकारियों द्वारा इसकी जानकारी नगर निगम को दी गई तो जानकारी मिली की फायर ब्रिगेड खराब है। ऐसे में एसईसीएल द्वारा अपने टैंकरों से आग बुझाने के प्रयास से आग ने भयंकर रुप धारण कर लिया था।

आगजनी की दो घटनाओं में फायर ब्रिगेड नाकाम


वाटर टैकंरों की लेते हैं सेवा


निगम के अनुसार- प्रस्ताव भेजा, वाहन नहीं मिला

ऐसे में करीब डेढ़ लाख की आबादी वाला ब्लाॅक खड़गवां नगर निगम के शुरूआत में स्थापित किए गए इकलौते फायर स्टेशन के सहारे है। इसकी सुध न जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को भी नहीं है। अग्निशमन विभाग मार्च से जून तक अग्निकांड का सीजन मानता है। इसी अवधि में बेतहाशा अग्निकांड होते हैं। आए दिन लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए फायर टैंकर भेजे जाते हैं। लेकिन 13 साल पुराने खटारा टैंकर और जर्जर सड़कों से गुजर कर इन्हें पहुंचने में इतना वक्त लग जाता है कि आग सब कुछ बर्बाद कर चुकती है। वैसे तो विकास के लिए करोड़ों हर साल खर्च हो रहे हैं। लेकिन जिम्मेदारों की रूचि नहीं है।

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