बाबा ने बालिका की आंखों की रोशनी लौटाई: देशमुख

Koria News - छह माह पहले शिरडी के पास रहने वाली एक बालिका की आंखों की रोशनी चली गई। साईं समाधि के दर्शन करने के बाद बिना मांगे ही...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 02:25 AM IST
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छह माह पहले शिरडी के पास रहने वाली एक बालिका की आंखों की रोशनी चली गई। साईं समाधि के दर्शन करने के बाद बिना मांगे ही बाबा ने उसकी आंखों की रोशनी लौटा दी। साईं से कुछ नहीं मांगने से सबकुछ मिल जाता है। क्योंकि साईं सर्वदा हमारे साथ होते हैं।

किसी भी भक्त के साथ बाबा ने भेद्भाव नहीं किया। छोटा बाजार शंभू चौक में चल रही साईं अमृत कथा में साईं गोपाल देशमुख ने बताया कि शुरुआत में बाबा माथे पर चंदन तिलक नहीं लगाते थे, लेकिन एक दिन र|ागिरी से पहुंचे चिकित्सक हाटे साईं कौन है यह देखने के लिए शिरडी पहुंचे। तब पुजारी लक्ष्मण राव बाबा के चरणों को चंदन लगाकर पूजा कर रहे थे। साईं माथे पर तिलक नहीं लगाते थे। चिकित्सक हाटे बाबा को मुसलमान फकीर मानते थे। वहां पहुंचकर जब हाटे ने बाबा को देखा तो उन्हें बाबा में अपने गुरुदेव के दर्शन हो गए। हाटे ने गुरुदेव की पूजा चंदन तिलक लगाकर की। तब लक्ष्मण राव ने बाबा से पूछा कि बाबा आपने माथे पर चंदन तिलक क्यों लगा लिया, बाबा ने कहा मैं भक्त की भक्ति में बंधा रहता हूं, उसी दिन से बाबा चंदन ने तिलक लगाना शुरू कर दिया था। साईं कार गोपाल देशमुख ने बताया कि भगवान कृष्ण गोपियों के चरण की धुली अपने माथे पर लगाते हैं। इसको गोपी चंदन कहते हैं। इसी प्रकार एक बार भगवान कृष्ण कहते हैं कि संत मेरे हृदय में निवास करते हैं, तो देवऋषि नारद ने पूछा कि संत इतने प्रिय क्यों होते हैं तो उन्होंने कहां सदा सर्वदा चारों आम संत मेरा ही नाम। साईं कार ने बताया कि एक बार साईं से मिलने के लिए एक व्यापारी रतन सेठ उनके पास आया, उसके धन के लालच और गुरूर को बाबा ने एक झटके में उतार दिया और साईं की कृपा से उसको संतान की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि आज भी बाबा को पुकार लगाते ही वे हमारे बीच दौड़े चले आते हैं।

कथा स्थल के पास यज्ञ वेदी की परिक्रमा करते श्रद्धालु। इंसेट में कथावाचक।

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