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कृष्ण ने फकीर वस्त्र धारण कर व गंगा किनारे बैठकर श्रद्धा-सबूरी का मंत्र दिया: साईं कार

Koria News - शिक्षा कहीं से भी प्राप्त की जा सकती है। बशर्ते व्यक्ति में सीखने की क्षमता होनी चाहिए। दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए...

Bhaskar News Network

Jan 13, 2019, 04:15 AM IST
Chirmiri News - chhattisgarh news krishna embraced fakir cloth and sat on the banks of ganga gave a mantra of reverence saburi sai car
शिक्षा कहीं से भी प्राप्त की जा सकती है। बशर्ते व्यक्ति में सीखने की क्षमता होनी चाहिए। दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए थे। बगुले से एकाग्रता, पृथ्वी से क्षमा व वृक्षों से उन्होंने सहनशीलता सीखी।

सच्चिदानंद परमात्मा का नाम है। यह सत, चित व आनंद से मिलकर बना है। जीव ही खिलाड़ी है। उसके पास बुद्धि रूपी बल्ला है। चारों तरफ पांच ज्ञानेंद्रियां व पांच कर्मेंद्रियां, 10 खिलाड़ी खड़े हैं। जो मन रूपी गेंद को विश्व में फंसाकर कैच आउट करना चाहते हैं। छोटा बाजार शंभू चौक पर चल रही श्री सांई अमृत कथा में महाराष्ट्र से पहुंचे साईं कार साईं गोपाल देशमुख ने कहा कि साक्षात भगवान कृष्ण ने फकीर वस्त्र धारण किया और यह फकीर गंगा किनारे आ बैठा। फकीर ने लोगाें को श्रद्धा और सबूरी का मंत्र दिया। उन्हाेंने बताया कि साईं बाबा ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा एक पुराने मस्जिद में बिताया, इसे वह द्वारका माई कहा करते थे। सिर पर सफेद कपड़ा बांधे हुए फकीर के रूप में साईं शिरडी में धूनी रमाएं रहते थे। इनके इस रूप के कारण कुछ लोग इन्हें मुस्लिम मानते हैं। जबकि द्वारिका के प्रति श्रद्घा और प्रेम के कारण कुछ लोग इन्हें हिन्दू मानते हैं। लेकिन साईं ने कबीर की तरह कभी भी अपने को जाति बंधन में नहीं बांधा। हिंदू हो या मुसलमान साईं ने सभी के प्रति समान भाव रखा और कभी इस बात का उल्लेख नहीं किया कि वह किस जाति के हैं। साईं ने हमेशा मानवता, प्रेम और दयालुता को अपना धर्म माना। जो भी इनके पास आता उसके प्रति बिना भेद भाव के उसके प्रति कृपा करते। साई के इसी व्यवहार ने उन्हें शिरडी का साईं बाबा और भक्तों का भगवान बना दिया। जो धुनि बाबा ने शिरडी मस्जिद में जलाई थी वो आज भी अनवरत जल रही है। अमृत कथा के दौरान सुंदर झांकियों की प्रस्तुति भी दी गई। इसमें अमीना नाम की नर्तकी बाबा से मिलने को आईं। कथा में गणेश वंदना भी हुई। इसके बाद दिव्य आरती के साथ महाप्रसादी बांटी गई।

कथा सुनाते गोपल देशमुख

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