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यीशु के पुनर्जन्म पर महागिरजा में हुई विशेष प्रार्थना

नगर में स्थित एशिया के दूसरे सबसे बड़े महागिरजा रोजरी की महारानी में यीशु पुनर्जन्म के पर्व ईस्टर पर पास्का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:50 AM IST

नगर में स्थित एशिया के दूसरे सबसे बड़े महागिरजा रोजरी की महारानी में यीशु पुनर्जन्म के पर्व ईस्टर पर पास्का कार्यक्रम की शुरुआत रविवार की सुबह हुई। सप्ताह भर पूर्व खजूर पर्व से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। ईस्टर के आयोजन के अंतिम चरण में धार्मिक कार्यक्रम को मुख्य अनुष्ठाता पल्ली पुरोहित फादर तरसिसियुस केरकेट्टा एवं सह अनुष्ठाता सहायक पल्ली पुरोहित के सहयोग से कराया गया। धार्मिक गीतों का संचालन संत अन्ना सिस्टर्स एवं नोविश की बहनों ने किया बाइबल का प्रथम पाठ हेमंत मिंज एवं दूसरा पाठ सिस्टर दयामनी टोप्पो ने किया। पूजा विधि का संयोजक का दायित्व फादर विनोद कुजूर एवं सिस्टर दिव्या गुलाब डीएसए ने निभाया।

शनिवार की रात्रि 10 बजे से शुरू हुए ईस्टर के इस धार्मिक कार्यक्रम में समस्त धार्मिक विधान मुख्य अनुष्ठाता उपदेशक विशप एम्मानुऐल केरकेट्टा डीडी ने सह अनुष्ठाता फादर आनंद तिर्की एसजे, विकर जेनेरल एवं सुसमाचार पाठक फादर सिकंदर किस्पोट्टा के सहयोग से कराया। नई आग की आशीष धर्मविधि के ज्योति की घोषणा एवं ज्योति गुणगान फादर आनंद तिर्की ने की।

जिसमें बच्चों द्वारा ईश दूत के रूप में आकर्षक नृत्य पेश किया गया। विशप एम्मानुएल केरकेट्टा ने अपने धार्मिक उपदेश में येसू के पुनर्जन्म पर बधाई दी और कहा कि ख्रीस्त विश्वासियों को 40 दिन के समय में विनती, प्रार्थना, त्याग, तपस्या एवं दान देकर अपने जीवन काे पवित्र एवं शुद्ध करें। येसु ख्रीस्त ने खून बहाकर हम सबको अपना लिया है और पाप मुक्त किया है। पुनर्जीवित यीशु ख्रीस्त ने अपने शिष्यों एवं अन्य प्रेरितों को कई बार दर्शन देकर शांति एवं प्रेम का संदेश दिया है।

ईस्टर पर्व मनाने के लिए जुटे मसीही समाज के लोग।

शब्द समारोह में इन्होंने किया पाठ

कार्यक्रम में शब्द समारोह में पहला पाठ डाक्टर पीसी कुजूर एवं दूसरा पाठ बेरनादेक्त लकड़ा, तीसरा पाठ स्तेफन लकड़ा, चौथा पाठ जगरानी कुजूर, पांचवां पाठ ललित तिर्की द्वारा पढ़ा गया। मंगलगान जय घोष एवं अल्लेलुईया मंगलगान फादर आनंद तिर्की एसजे ने किया, जिसके के उपरांत नए व्यवस्थान से पाठ अरूणा रजत खलखो ने किया। निवेदन प्रार्थना मिस अलका लकड़ा ने किया। मुख्य अनुष्ठाता द्वारा पवित्र युखारिस्त की धर्म विधि सम्पन्न कराए जाने के बाद पवित्र जल की आशिष एवं बपतिस्मा की प्रतिज्ञा ली गई।

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