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खेल महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिया स्मृति चिन्ह

अपने पूर्वजों के पारंपरिक खेलकूद को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ी को धरोहर के रूप में देने के उद्देश्य से फरसाकानी...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:05 AM IST
खेल महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिया स्मृति चिन्ह
अपने पूर्वजों के पारंपरिक खेलकूद को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ी को धरोहर के रूप में देने के उद्देश्य से फरसाकानी पल्ली के परिसर में पल्ली स्तरीय एक दिवसीय आदिवासी खेल महोत्सव का आयोजन किया। प्रतियोगिता में सभी वर्ग के पुरुष, महिला, युवा एवं बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के खेलकूद रखा गया जिसमें तीरंदाजी, गुलेल प्रतियोगिता, ढेलवांस चलाना, मोड़ा बिन्दी बनाना,महिलाओं के लिए दोना पत्तल सिलाई प्रतियोगिता, सुरीली कुर्सी दौड़, फिट्टू खेल इत्यादि आकर्षक एवं मनोरंजक प्रतियोगिताएं कराई गई।

प्रतियोगिताओं में पल्ली के हर उम्र के प्रतिभागी तथा अतिथिगणों ने खुलकर भाग लिया। आदिवासी खेल महोत्सव के मुख्य अतिथि लोधमा पंचायत के सरपंच तथा मिस्सा बलिदान के मुखिया अनुष्ठाता फादर याकूब कुजूर रहे। अन्य अतिथियों में फादर अरविंद एक्का, सिस्टर सुषमा टोप्पो, अन्य धर्मबहनें, के डी कुर्रे, टिकेश्वर एक्का, कुंदन पन्ना, अमित लकड़ा, अनुज रोशन टोप्पो और हेमंत कुजूर थे। इस खेल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रथम, द्वितीय, और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं पुरस्कार स्वरूप धार्मिक चिन्ह प्रदान किया गया। तीरंदाजी में ललित कुजूर, गुलेल प्रतियोगिता में रोमित खाखा, ढेलवांस में सेल्बेरिउस तिर्की, मोड़ा बिन्दी बनाने में नोर्बेन्तुस कुजूर, दोना पत्तल सिलाई प्रतियोगिता में करलिना कुजूर, सुरीली कुर्सी दौड़ सीनियर में साधना कुजूर, जूनियर में दिव्या एक्का तथा फिट्टू खेल में बरंगजोर टीम को प्रथम स्थान मिला। इस आदिवासी खेल महोत्सव को सफल बनाने में पल्ली परिषद, खेल समिति, काथलिक सभा महिला संघ, युवा संघ तथा डीकन प्रदीप एक्का, कान्वेंट के धर्मबहनों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में पल्ली पुरोहित फादर प्रफुल बड़ा ने आभार प्रदर्शन किया गया।

खेल

तीरंदाती में निशाना साधता प्रतियोगी एवं मौके पर उपस्थित ग्रामीण।

पत्ते से आकर्षक बर्तन बनाती महिलाएं।

भास्कर न्यूज | कुनकुरी

अपने पूर्वजों के पारंपरिक खेलकूद को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ी को धरोहर के रूप में देने के उद्देश्य से फरसाकानी पल्ली के परिसर में पल्ली स्तरीय एक दिवसीय आदिवासी खेल महोत्सव का आयोजन किया। प्रतियोगिता में सभी वर्ग के पुरुष, महिला, युवा एवं बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के खेलकूद रखा गया जिसमें तीरंदाजी, गुलेल प्रतियोगिता, ढेलवांस चलाना, मोड़ा बिन्दी बनाना,महिलाओं के लिए दोना पत्तल सिलाई प्रतियोगिता, सुरीली कुर्सी दौड़, फिट्टू खेल इत्यादि आकर्षक एवं मनोरंजक प्रतियोगिताएं कराई गई।

प्रतियोगिताओं में पल्ली के हर उम्र के प्रतिभागी तथा अतिथिगणों ने खुलकर भाग लिया। आदिवासी खेल महोत्सव के मुख्य अतिथि लोधमा पंचायत के सरपंच तथा मिस्सा बलिदान के मुखिया अनुष्ठाता फादर याकूब कुजूर रहे। अन्य अतिथियों में फादर अरविंद एक्का, सिस्टर सुषमा टोप्पो, अन्य धर्मबहनें, के डी कुर्रे, टिकेश्वर एक्का, कुंदन पन्ना, अमित लकड़ा, अनुज रोशन टोप्पो और हेमंत कुजूर थे। इस खेल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रथम, द्वितीय, और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं पुरस्कार स्वरूप धार्मिक चिन्ह प्रदान किया गया। तीरंदाजी में ललित कुजूर, गुलेल प्रतियोगिता में रोमित खाखा, ढेलवांस में सेल्बेरिउस तिर्की, मोड़ा बिन्दी बनाने में नोर्बेन्तुस कुजूर, दोना पत्तल सिलाई प्रतियोगिता में करलिना कुजूर, सुरीली कुर्सी दौड़ सीनियर में साधना कुजूर, जूनियर में दिव्या एक्का तथा फिट्टू खेल में बरंगजोर टीम को प्रथम स्थान मिला। इस आदिवासी खेल महोत्सव को सफल बनाने में पल्ली परिषद, खेल समिति, काथलिक सभा महिला संघ, युवा संघ तथा डीकन प्रदीप एक्का, कान्वेंट के धर्मबहनों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में पल्ली पुरोहित फादर प्रफुल बड़ा ने आभार प्रदर्शन किया गया।

कई आदिवासी खेल विलुप्त हो रहे, इसे जिंदाकर अगली पीढ़ी को दें : फादर याकूब

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने कहा आदिवासी के लिए खेलकूद मनोरंजन का बहुत बड़ा हिस्सा है। विलुप्त हो रहे इन खेलों को हमें जिन्दा कर अगली पीढ़ी को सौंपना है। फादर याकूब कुजूर ने कहा आदिवासियों को हर स्तर में और अधिक संगठित होकर कार्य करने की जरूरत है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के डी कुर्रे ने कहा आदिवासियों की बहुत बड़ी बुराई नशापान है इससे ऊपर उठने की बात कही है। टिकेश्वर एक्का ने कहा आदिवासियों के लिए बहुत सारे योजनाएं हैं उन योजनाओं का लाभ लेने की आवश्यकता है जिसके लिए जागरुक होने की जरूरत है।

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