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स्टेशनरी संचालकों की मनमानी बिना काॅपी नहीं दे रहे किताबें

निजी स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं की सांठगांठ का शिकार आम नागरिक और पालक हो रहे हैं। दरअसल, निजी स्कूलों में...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:40 AM IST
स्टेशनरी संचालकों की मनमानी बिना काॅपी नहीं दे रहे किताबें
निजी स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं की सांठगांठ का शिकार आम नागरिक और पालक हो रहे हैं। दरअसल, निजी स्कूलों में परिणाम घोषित होने के बाद 2 अप्रेल से आगामी सत्र की कक्षाएं लगनी शुरु होंगी। इसके लिए अधिकतर स्कूलों ने रिजल्ट के साथ ही आगामी वर्ष की किताब-कापियों की लिस्ट पालकों को थमा दी है। इधर, किताबें भी चुनिंदा दुकानों पर ही मिल रही हैं और इन दुकानों पर बिना कापियां खरीदे पुस्तकें देने से साफ तौर पर इंकार कर दिया जा रहा है।

इस सांठगांठ का सीधा असर पालक की जेब पर पड़ रहा है। एक तरफ जहां प्रिंट रेट पर ही किताबें बेची जा रही हैं, वहीं बिना कापियों के पुस्तकें देने से सीधे इंकार कर दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि इन दुकानों में पहुंचने वाले पालक मोलभाव तक नहीं कर पा रहे, इनके लिए सभी कक्षाओं के सेट तैयार किए जा चुके हैं जिन्हें पूरा मूल्य चुकाकर ही ले पाएंगे, सेट में से कापी या किताब कम करने की बात पर सीधे पूरा सेट की देने से इंकार कर दिया जा रहा है। संचालकों के इस व्यवहार और स्कूलों की सांठगांठ से पालकों में खासी नाराजगी है लेकिन शहर में स्कूलों की संख्या कम होने के कारण मजबूरन चुप्पी साधे हुए हैं।

एनसीईआरटी की किताबों में नहीं बच रहा पैसा, इसलिए कॉपी खरीदी का दबाव

महासमुंद। किताब और कापियों का सेट ले जाते हुए पालक।

तैयार है प्रिंटेड बिल भी

दुकानों में भीड़ ज्यादा होने के दौरान लोगों को और संचालक को अधिक समय न देना पड़े इसलिए कुछ जगहों पर तो स्कूल, कक्षा और कापी-किताब की सूची के सेट बनाए जाने के साथ बाकायदा प्रिंटेड बिल भी तैयार कर लिए गए हैं ताकि पालकों के पहुंचते ही सीधे रकम लेकर उन्हें थमाया जा सके।

ड्रेस के लिए भी तय हैं दुकानें

स्कूलों के ड्रेस, जूते और टाई के लिए भी दुकानें निर्धारित हैं। स्कूलों के ड्रेस इन्हीं दुकानों पर उपलब्ध होने के साथ में यहां जूते, बेल्ट, टाई और अन्य स्कूली सामान भी आसानी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

संचालकों की भी आपस में सांठगांठ

स्कूलों के साथ संचालकों की भी आपस में सांठगांठ स्पष्ट है। पालकों को यह किताबें सेट में ही मिलेंगी और किसी अन्य दुकान में इसे कम रेट पर या अलग-अलग नहीं बेची जाती। इसके कारण पालकों को मजबूरन सेट में किताबें लेनी पड़ती हैं।

दर्ज कराई है शिकायतें

शुक्रवार को कुछ पालक भास्कर के दफ्तर पहुंचे और अपनी शिकायतें दर्ज कराई। इनका कहना था कि मामले की जानकारी विभागीय अफसरों को होने के बाद भी संरक्षण दिया जा रहा है। वहीं पालकों ने बताया कि उनके साथ पहुंचे आर्थिक तौर पर कमजोर पालक को बिना कापियों को किताब देने से साफ तौर पर मना कर दिया गया। मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी बीएल कुर्रे का कहना है, मामले में अब तक किसी पालक की शिकायत नहीं मिली है।

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