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सिलेंडर मिले पर रीफिलिंग से बचने लोग लकड़ी जलाकर खाना बना रहे

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:50 AM IST

केन्द्र सरकार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत लोगों को छोटे सिलेंडर देने की तैयारी है, लेकिन जिले में 10 फीसदी...
केन्द्र सरकार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत लोगों को छोटे सिलेंडर देने की तैयारी है, लेकिन जिले में 10 फीसदी ग्रामीण भी इस योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा बड़े सिलेंडर को पहाड़ी क्षेत्रों में ले जाने की परेशानी को देखते हुए छोटे सिलेंडर का कॉन्सेप्ट शुरु किया है, लेकिन जिले के वनांचल क्षेत्र में पारंपरिक ईंधन की मौजूदगी के कारण जिले में यह योजना फ्लाॅप नजर आ रही है।

जिले में 13 रीफिलिंग सेंटर होने के बाद भी योजना के शुरु होने से अब तक जिले में रीफिलिंग का प्रतिशत केवल 10 फीसदी रहा है। मैदानी क्षेत्र की बजाय वनांचल होने के कारण यहां ईंधन भरपूर होने के कारण कारण सिलेंडर रिफिल नहीं हो रहे हैं।

1 लाख 10 हजार 293 उज्ज्वला गैस उपभोक्ता

13 गैस एजेंसी से की जा रही रीफिलिंग

महासमुंद. भलेसर में चूल्हा-सिलेंडर होने के बाद भी लकड़ी से भोजन बनाती महिला।

बजट बिगड़ा तो लौटे पारंपरिक ईंधन की ओर

ग्राम बेमचा की महिला कमला, आसबाई, मीना, कजरी बाई, साल्हेभांठा की वेदमति, बूंदी बाई, सोहागा, बसंती नाग आदि का कहना है कि 200 रुपए में गैस सिलेंडर तो दिया गया, लेकिन अब उन्हें गैस की रीफिलिंग के लिए सामान्य उपभोक्ता के हिसाब से ही भुगतान करना पड़ रहा है। शुरुआती दिनों में एक दो बाद हमने रीफिलिंग भी कराया, लेकिन अब दाम बढ़ने के कारण उपयोग करने में परेशानी हो रही है। जितने दाम में सिलेंडर मिल रहा है, उतने में तो हम पांच महीने से अधिक समय तक लकड़ी और कंडा का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिले में बीपीएल परिवारों की सर्वे सूची में 1 लाख 86 हजार परिवारों में से 1 लाख 14 हजार परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत चूल्हा और सिलेंडर दिया जा चुका है।

यहां हैं इतने रीफिलिंग सेंटर

महासमुंद - 5 एजेंसी

बागबाहरा - 3 एजेंसी

पिथौरा - 1 एजेंसी

बसना - 3 एजेंसी

सराईपाली - 1 एजेंसी

1 लाख 10 हजार से अधिक सिलेंडर लोगों को बांटे

जानकारी के अनुसार उज्जवला योजना की शुरुआत 13 अगस्त 2016 को हुई, जिसके बाद वर्ष 2016- 17 में 57 हजार 779 और वर्ष 2017- 18 में अब तक 52हजार 514गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब तक जिले में 1 लाख 10 हजार 293 बीपीएल परिवारों के पात्र हितग्राहियों को गैस कनेक्शन और चूल्हा दिए जा चुके हैं। वहीं रीफिलिंग के लिए जिले में पिछले सा 10 वितरक तय किए गए थे जिन्हें बढ़ाकर बाद में 13 कर दिया गया है। इसके बाद भी ग्रामीण रीफिलिंग के लिए इन सेंटरों तक नहीं पहुंच रहे हैं।

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Web Title: सिलेंडर मिले पर रीफिलिंग से बचने लोग लकड़ी जलाकर खाना बना रहे
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