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जिले के सात में से चार कॉलेजों में तो प्रोफेसर है ही नहीं, ऊपर से अब दो और कॉलेज खोलने की तैयारी

जिले में उच्च शिक्षा का बुरा हाल है। सरकारी कॉलेज में प्राध्यापक व सहायक प्राध्यापकों का टोटा है। जिले में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:25 AM IST

जिले में उच्च शिक्षा का बुरा हाल है। सरकारी कॉलेज में प्राध्यापक व सहायक प्राध्यापकों का टोटा है। जिले में संचालित सात कॉलेजों में से चार कॉलेजों में प्रोफेसर ही नहीं है। वहीं अब जिले में दो और कॉलेज खोलने की तैयारी की जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार जिले में सात सरकारी कॉलेज संचालित हो रहे हैं। जिसमें शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर कालेज महासमुंद, शासकीय माता कर्मा कन्या कॉलेज महासमुंद, शासकीय खेल कला वाणिज्य एवं विज्ञान कॉलेज बागबाहरा, शासकीय चंद्रपाल डडसेना महाविद्यालय पिथौरा, जयदेव सतपथी शासकीय कालेज बसना, स्व राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली व शासकीय महाविद्यालय बलौदा सरायपाली हैं। इन कॉलेजों में प्रोफेसर, अस्सिटेंट प्रोफेसर सहित अन्य स्टाफ का टोटा है। इन कॉलेजों में स्वीकृत 232 पदों में से 98 पद रिक्त है। वहीं चार कॉलेजों में तो प्राध्यापकों के स्वीकृत पदों में से एक भी पद भरे नहीं हैं। वहीं अब तेंदूकोना और महासमुंद के कांपा में इसी सत्र से कॉलेज खुलने जा रहा है। बताया जाता है कि तेंदूकोना में हायर सेकेंडरी स्कूल के पांच कमरे में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में कॉलेज संचालित की जाएगी। पिछले दिनों अधिकारियों की टीम भी निरीक्षण में पहुंची थी। इसी तरह कांपा के पास कृषि कॉलेज के लिए जगह का चयन किया गया है।

सीधी बात

चुन्नीलाल साहू, विधायक खल्लारी विधानसभा

ऐसी स्थिति पूरे प्रदेश में है

आपके विधानसभा में बागबाहरा के कॉलेज में प्रोफेसर व अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद रिक्त हैं, अब एक और कॉलेज इस सत्र में खुल रहा है। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित हो रही है कि नहीं ?

- ये सही है कि बागबाहरा के कॉलेज में प्रोफेसर व अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद रिक्त हैं। ऐसी स्थिति पूरे प्रदेश में है। मानदेय में प्रोफेसर की व्यवस्था की गई है ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।

कॉलेज में प्रोफेसर व अस्सिटेंट प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर आपके द्वारा क्या प्रयास किए गए हैं?

- मैंने बताया न कि जनभागीदारी समिति के माध्यम से व्यवस्था की गई है। वैसे भी कांग्रेस के शासन काल में तो यहां कॉलेज नहीं खुल पाया था। भाजपा के शासन में इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को कॉलेज की सौगात मिली है। व्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार आएगा।

सीधी बात

डॉ विमल चोपड़ा, विधायक महासमुंद

प्राध्यापकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही

महासमुंद में स्थित सरकारी कॉलेज में स्टाफ की कमी है, इस दिशा में आपने क्या प्रयास किया।

- यह बात सही है कि यहां संचालित कॉलेज में प्रोफेसर व सहायक प्राध्यापकों के पद खाली है। प्राध्यापकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित होना लाजिमी है। इस दिशा में मैंने शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। विधानसभा में भी मामला उठाया गया है।

महासमुंद विधानसभा में इसी सत्र से एक और कॉलेज खुलने जा रहा है, इसकी प्रक्रिया कहां तक पहुंची है।

-लगातार प्रयास के चलते महासमुंद विधानसभा में कृषि कॉलेज की सौगात मिली है। कांपा के पास जगह का चयन किया गया है। अधिकारियों की टीम भी जगह का निरीक्षण कर चुकी है। प्रशासन से जगह का आबंटन शेष है।

वल्लभाचार्य पीजी कॉलेज

पद स्वीकृति रिक्त

प्राध्यापक 08 08

सहायक प्राध्यापक 29 07

शासकीय कॉलेज बागबाहरा

पद स्वीकृति रिक्त

प्राचार्य 01 01

प्राध्यापक 02 02

सहायक प्राध्यापक 14 05

क्रीडा अधिकारी 01 01

शासकीय कॉलेज बसना

पद स्वीकृति रिक्त

सहायक प्राध्यापक 10 05

क्रीडा अधिकारी 01 01

ग्रंथपाल 01 01

लैब तकनीशियन 03 01

शासकीय

कॉलेज

बलौदा

शासकीय कन्या कॉलेज

पद स्वीकृति रिक्त

सहायक प्राध्यापक 09 04

क्रीडा अधिकारी 01 01

सहायक ग्रेड-3 02 02

शासकीय कॉलेज पिथौरा

पद स्वीकृति रिक्त

प्राचार्य 01 01

प्राध्यापक 01 01

सहा. प्राध्यापक 13 06

शासकीय कॉलेज सराईपाली

पद स्वीकृति रिक्त

प्राचार्य 01 01

प्राध्यापक 04 04

सहा. प्राध्यापक 13 06

पद स्वीकृति रिक्त

सहा. प्राध्यापक 10 06

सहायक ग्रेड-1 01 01

लैब परिचारक 02 02

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