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शहर के 15 वार्ड के 30 हजार लोग गंदा पानी पी रहे, पालिका ने कहा- ये रिपोर्ट ही गलत

शहर में 15 वार्ड के करीब 30 हजार लोग को दूषित पानी पी रहे है। यह खुलासा मितानिनोें द्वारा शहर के विभिन्न वार्डो से लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 03:00 AM IST

शहर के 15 वार्ड के 30 हजार लोग गंदा पानी पी रहे, पालिका ने कहा- ये रिपोर्ट ही गलत
शहर में 15 वार्ड के करीब 30 हजार लोग को दूषित पानी पी रहे है। यह खुलासा मितानिनोें द्वारा शहर के विभिन्न वार्डो से लिए गए 30 नमूने की जांच से हुआ। जांच रिपोर्ट में 15 वार्ड के नमूनों का पानी काला पड़ गया। इन वार्डों के 30 हजार लोग दूषित पानी पी रहे हैं। यही नहीं जिलेभर के ग्रामीण क्षेत्रों से लिए गए 1086 नमूनों में से 99 नमूनों का पानी काला पड़ गया है। यानि इन स्थानों का पानी भी पीने योग्य नहीं है। जांच के बाद मितानिनों ने अपनी रिपोर्ट जिले के सभी बीएमओ कार्यालय और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को सौंप दी है।

वहीं पीएचई ने भी ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 33 जल स्रोतों के सैंपल लेकर जांच की, जिसमें फ्लोराइड, आयरन एवं बैक्टीरिया की मात्रा पाई गई है। यही कारण है कि फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाए जाने के वाले 30 हैंडपंप बंद करा दिए हैं। बागबाहरा ब्लाक के चरौदा और आस-पास के गांवों की हालात और भी चिंताजनक है। यहां दो दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीण रोज बैक्टीरियायुक्त पानी पी रहे हैं।

महासमुंद|ग्रामीण क्षेत्र में मितानिनों द्वारा पानी का जांच करते हुए।

लिए गए पानी का नमूने और उनकी रिपोर्ट

ब्लाक लिए गए नमूने दूषित नमूने

महासमुंद 184 34

बागबाहरा 231 03

पिथौरा 239 12

सराईपाली 236 20

बसना 196 30

योग 1086 99

इन वार्डो का पानी दूषित

मितानिनों द्वारा लिए गए नमूनों में गुलशन चौक, शिव चौंक, संतोषी मंदिर के पास, गुडरूपारा, कुर्मीपारा, मौहारीभाठा, नुरानी चौक, उडियापारा, नया रावण भाठा, आदर्श नगर के पानी काले पड़ गए, जो पीने योग्य नहीं है।

ये हैं बचाव के उपाय

पानी की समय-समय पर जांच कराना चाहिए। भूमिगत जल में फ्लोराइड और आयरनयुक्त पानी की पुष्टि होती है, तो नहीं पीना चाहिए। पानी को शुद्ध करने क्लोरिन की दवा जलस्रोत में डालनी चाहिए। जलस्रोत के आसपास को साफ-सुथरा रखना चाहिए। दूषित जलस्रोतों पर लाल रंग का निशान बनाकर पानी को पीने से बचना चाहिए।

सरकार ने मितानिनों को बारिश के पूर्व पानी की जांच के लिए एक किट दी थी, जानिए कब-कैसे की गई जांच

दरअसल, राज्य सरकार की ओर से मितानिनों को अपने-अपने क्षेत्र में बारिश के पूर्व पानी की जांच के लिए एक किट दिया गया था। इसके लिए तीन महीने का समय निर्धारित किया गया था। मितानिनों ने अप्रैल और मई के महीने में अपने क्षेत्रों में जाकर इस किट के जरिए पानी की जांच करनी थी। इस किट के जरिए पानी की तत्काल जांच की जाती है। उक्त किट में 20 एमएल पानी डाला जाता है। इसे एक घंटे रखा जाता है। एक घंटे बाद यदि पानी काला हो जाता है तो जानिए की वह पानी पीने योग्य नहीं है। मितानिनों ने जब शहर के 30 वार्ड के पानी की जांच की तो पता चला कि 15 वार्ड का पानी खराब है। बागबाहरा ब्लाक के चरौदा और आस-पास के गांवों की हालात और भी चिंताजनक है।

सीधी बात

प्रीति सिंह, सीएमओ

पालिका की सफाई, मितानिनों की रिपोर्ट सही नहीं

शहर के 15 वार्ड के लोग दूषित पानी पी रहे है?

- ऐसा नहीं है हमारे लैब में सभी जगह का पानी साफ है।

पानी के दूषित होने का खुलासा मितानिनों द्वारा लिए गए सैंपल से हुआ है?

- मितानिनों द्वारा लिए गए सैंपल गलत हो सकते हैं।

मितानिनों से मिली जांच रिपोर्ट के बाद आगे क्या कार्रवाई करेंगे?

- एक बार फिर से पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए पीएचई के लैब में भेजा जाएगा।

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