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जून में मानसून की बेरुखी से खेती पिछले साल की तुलना में पिछड़ गई थी, रोपाई भी शुरु नहीं हो पा रही थी

Mahasamund News - सप्ताहभर बाद जिले में पहली बार अच्छी शुक्रवार को अच्छी बारिश हुई है। हालांकि जून माह में मानसून की बेरुखी से खेती...

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2018, 03:00 AM IST
जून में मानसून की बेरुखी से खेती पिछले साल की तुलना में पिछड़ गई थी, रोपाई भी शुरु नहीं हो पा रही थी
सप्ताहभर बाद जिले में पहली बार अच्छी शुक्रवार को अच्छी बारिश हुई है। हालांकि जून माह में मानसून की बेरुखी से खेती कार्य पिछले साल की तुलना में काफी पिछड़ गया था और रोपाई का कार्य भी शुरु नहीं हो पा रहा था, पर अब शुक्रवार को हुई बारिश से रोपाई कार्य में तेजी आएगी। जिले में समय पर मानसून ने प्रवेश किया, लेकिन शुरुआत में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई। वनांचल व मैदानी क्षेत्रों में वर्षा नहीं होने के कारण कई किसान खेतों की जुताई के बाद बीज का छिड़काव नहीं कर पाए थे। 13 जुलाई को जिले में एक ही दिन में लगभग 48 मिमी वर्षा हुई।

बोता पद्धति से 80 प्रतिशत बोनी हो गई

अब तक बोता पद्धति से 80 हजार हेक्टेयर में बोनी हो चुकी है। रोपा के लिए 45 हजार हेक्टेयर लक्ष्य है, पर अभी 14 हजार हेक्टेयर में ही रोपा लग पाया है। इधर बोता पद्धति से अब तक 62.100 हेक्टेयर में बोनी हो चुकी है, जबकि लक्ष्य 82.800 हेक्टेयर का है।

जुलाई माह में हो रही अच्छी वर्षा से खेती कार्य में तेजी आई है। लालपुर रायपुर मौसम विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक पीएल देवांगन ने बताया कि दक्षिण यूपी और दक्षिण उड़ीसा के ऊपर 2 अलग-अलग चक्रवात और गंगासागर से गंगानगर तक मानसून द्रोणिका बनी है। इसका प्रभाव अगले 48 घंटे में देखने को मिलेगा। उत्तरी बंगाल की खाड़ी में ज्यादा नमी है। उम्मीद है कि 2-3 दिन में प्रदेश में कहीं-कहीं अच्छी वर्षा होगी। बस्तर संभाग में तेज बारिश की संभावना है।

सप्ताहभर में पहली बार हुई अच्छी बारिश मैदानी क्षेत्रों में किसानी कार्य में आई तेजी

महासमुंद. अच्छी बारिश होने के बाद धान के पौधों की रोपाई के लिए खेतों को तैयार करते हुए किसान।

अब तक 179.1 मिमी की औसत बारिश दर्ज

जिले में अब तक 179.1 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। जिले में अब तक पिछले 10 वर्षों की औसत वर्षा 292.2 मिमी की वर्षा दर्ज की गई थी। इस वर्ष इसी अवधि में औसत रूप से 197.1 मिली मीटर की बारिश रिकार्ड की जा चुकी है, जो 10 वर्षों की औसत की बारिश की तुलना में 61.3 प्रतिशत है।

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जून में मानसून की बेरुखी से खेती पिछले साल की तुलना में पिछड़ गई थी, रोपाई भी शुरु नहीं हो पा रही थी
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