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बेमचा में हर महीने ग्रामसभा, खुले मंच पर होती है गांव की समस्याओं पर चर्चा, न लेटलतीफी और न अटकता है काम

ग्राम सभाओं के जरिए सामाजिक-आर्थिक विकास में बेहतर योगदान के लिए ग्राम पंचायत बेमचा को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 03:10 AM IST
ग्राम सभाओं के जरिए सामाजिक-आर्थिक विकास में बेहतर योगदान के लिए ग्राम पंचायत बेमचा को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम पुरस्कार दिया गया है। पूरे प्रदेश में ये अवार्ड सिर्फ बेमचा को दिया गया है। जबकि 7 पंचायतों को दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार के लिए चुना गया है।

24 अप्रैल को जबलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेमचा को ये पुरस्कार देंगे। करीब 7 हजार की आबादी वाले इस गांव में हर महीने ग्राम सभा का आयोजन किया जाता है, वो भी खुले मंच पर। गांव में बरगद पेड़ की छांव में लगने वाले ग्राम सभा में गांव का हर एक सदस्य अपनी सहभागिता दर्ज कराता है। चाहे वो बड़ा हो या बूढ़ा, बच्चे हों या महिलाएं। किसी भी विषय पर सभी बैठकर एक साथ चर्चा करते हैं और फिर सर्वमान्य निर्णय लिया जाता है। दरअसल, गांव की इसी खासियत के लिए ग्राम पंचायत बेमचा को देश की सभी पंचायतों में से नाना जी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम पुरस्कार के लिए चुना गया है। जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कार लेने के लिए सरपंच सावित्री चंद्राकर और सचिव चंद्रमणि चंद्राकर जबलपुर जाएंगे।

गौरव ग्राम पुरस्कार ऐसी पंचायतों को दिया जाता है, जो ग्रामसभा के जरिए सामाजिक-आर्थिक विकास में बेहतर योगदान देते हैं। इसके लिए देशभर के सभी पंचायतों से आवेदन मंगाए गए थे। जनवरी में केंद्र सरकार की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची। महासमुंद जिले में भी ए ग्रेड वाले 7 पंचायतों का निरीक्षण टीम ने किया था। निरीक्षण के लिए तय पैरामीटर में खरा उतरने के बाद ग्राम पंचायत बेमचा का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया।

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बेमचा में होने वाली ग्रामसभाओं में हर परिवार के लोग हिस्सा लेकर अपने सुझाव देते हैं।

3. पीने का साफ पानी

गांव की आबादी करीब 5 हजार है। सभी को पानी मिले इसके लिए नल-जल योजना के जरिए सभी घरों में पानी पहुंचाया गया। सभी ग्रामीण इसके लिए बाकायदा टैक्स भी देते हैं। पानी की समस्या हुई तो 14वें वित्त के पैसे से गांव के 20 हैंडपंप में मोटर डलवाया गया। आज सभी घरों में भरपूर पानी पहुंचता है।

4. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

पंचायत की आबादी 7 हजार है, बेमचा में एक प्रसव केन्द्र है। 26 जनवरी को ग्राम सभा में कलेक्टर की मौजूदगी में मांग की गई कि सप्ताह में एक दिन चिकित्सक की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों को उचित उपचार मिल सके। साथ ही अतिरिक्त भवन बनाने की मांग की गई और रिकॉर्ड 6 महीने में इसे पूरा कर लिया गया।

5. आर्थिक सुदृढ़ता

पंचायत को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए गांव में नल-जल योजना का शुल्क लिया जाता है। सभी ग्रामीण नियमित रूप से शुल्क चुकाते हैं। गांव में ही 8 साल पुराना कॉम्पलेक्स खंडहर में तब्दील हो गया था, जिसे मरम्मत कराया गया और नीलाम किया गया। इससे पंचायत को 20 लाख रुपए की आय हुई।

1. अतिक्रमण मुक्त

ग्राम सभा के जरिए गांव को अतिक्रमण मुक्त, नशामुक्त, गंदगी मुक्त और खुले में शौच मुक्त गांव बनाने का निर्णय लिया गया। गांव में शराबबंदी लागू है पीकर हुल्लड़ करने वालों से 1000 रुपए और शराब बेचने वालों से 5000 जुर्माना वसूला जाता है। खुले में शौच जाने वालों से 250 रुपए जुर्माना वसूला जाता है। बाकायदा इसकी रसीद भी दी जाती है। इससे 50250 रुपए एकत्रित हुए, जिसे गांव की साफ-सफाई पर खर्च किया गया।

इसी सजगता के लिए बेमचा को मिला नानाजी देशमुख गौरव ग्राम पुरस्कार

2. स्वच्छता मिशन

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव के सभी लोग एक साथ मिलकर गांव के तालाब, नाली, सड़क की सफाई करते हैं। जुर्माना के रूप में गांव वालों से वसूली गई राशि का उपयोग इन्हीं सब काम के लिए किया जाता है। सामाजिक समरसता बनी रहे इसके लिए जनसहयोग से पनखटिया तालाब का गहरीकरण किया गया।