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‘सफल व्यक्ति वही होता है जिसमें संस्कार हों’

प्रतिस्पर्धा के इस युग में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान भी सबसे आगे रहे। इसके लिए वे बच्चों को संस्कारवान...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:15 AM IST

‘सफल व्यक्ति वही होता है जिसमें संस्कार हों’
प्रतिस्पर्धा के इस युग में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान भी सबसे आगे रहे। इसके लिए वे बच्चों को संस्कारवान बनाने की बजाए ज्यादा से ज्यादा व्यवहारिक बनाने में लगे हुए हैं।

व्यवहारिकता से संसार में सफलता तो मिल सकती है, लेकिन सफल व्यक्ति वही होता है, जिसमें संस्कार भी हों। माताओं को अपनी संतानों को भक्त ध्रुव जैसा बनने की शिक्षा देनी चाहिए। सोमवार को कुम्हार पारा स्कूल के पास आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास गोपालशरण देवाचार्य जी ने भक्तों को यह बातें कही। कथा में आगे बताते हुए गोपालशरण जी ने बताया कि संसार को पाप के रसातल से उठाने के लिए भगवान ने वराह अवतार लिया। सनकादिक मुनियों के श्राप से हिरण्याक्ष व हिरण्यकश्यप के रूप में जन्म लेने वाले जय-विजय की कथा सुनाते हुए गोपालशरण देवाचार्य जी ने बताया कि जब संसार को पाप से उबारने के लिए वराह भगवान जाने लगे तो अपने अहंकार के मद में चूर होकर हिरण्याक्ष ने भगवान का रास्ता रोका लिया।

इस पर भगवान वराह ने उसका संहार कर उसे मोक्ष दिया। कथा सुनने वार्ड 24-25 के लोग और रायपुर से रक्षा राजपूत, सरस्वती,अवधेश, गोपेश, सुशील चौबे, गोविंद झा आदि श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

प्रवचन

कुम्हार पारा स्कूल के पास आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन

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