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नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने गोबर से उकेरी आकृतियां

ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक हरेली का पर्व शनिवार को बड़े उत्साह व धूमधाम के साथ मनाया गया। किसानों ने घरों व खेत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 12, 2018, 02:55 AM IST

नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने गोबर से उकेरी आकृतियां
ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक हरेली का पर्व शनिवार को बड़े उत्साह व धूमधाम के साथ मनाया गया। किसानों ने घरों व खेत खलिहान मे बेलवा पत्ती लगाकर बुरी शक्तियों से बचने विधिवत पूजा अर्चना की। किसानों ने अपने कृषि यंत्रों की धुलाई करते हुए विधिवत पूजा अर्चना की। वहीं फसलों में जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए गांव के देवी-देवताओं से कामना भी की। इस पर्व के चलते ग्रामीण अंचलों के घरों के बाहर गोबर से विभिन्न आकृतियां बनाई गईं, जिसके पीछे मान्यता यह है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का असर नहीं होता है और परिवार के सदस्य सुरक्षित रहते हैं।

चिकित्सकों के अनुसार सावन के माह में रोग फैलाने वाले बैक्टिरिया, वायरस आदि तेजी से फैलते हैं और यही वजह है कि इस सीजन में लोग अधिक बीमार पड़ते हैं। अंधविश्वासी यह मानते हैं कि बीमारी का कारण जादू टोना होता है, जबकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार हरेली अमावस्या के दिन गांव के झांकर, मटियार, और रावत घर-घर जाकर बेलवा की टहनी घर के ओरछा में लगाया जाता है। किसानों द्वारा घर के प्रमुख कृषि उपकरणों की साफ सफाई कर पूजा की गई। वही घरों मे चावल आटे का चिला बनाकर इसका भगवान को भोग लगाया। पशुओं को आटे की बनी लोई खिलाई एवं चरवाहों ने दशमूल और अन्य औषधीयुक्त फल प्रसाद के रूप में किसानों को दिया गया। कृषक अपने घर के दरवाजे मे संध्या होते ही नीम व अंडी का पत्ता, भेलवां का पत्ता लगाया। कृषकों ने कृषि औजार की साफ सफाई कर, साथ ही बच्चों कें लिए गेड़ी बनाकर उसकी विधिवत पूजा अर्चना कर प्रसाद के रूप में चीला रोटी व गुड़, नारियल चढ़ाया। इस वर्ष बच्चों ने हरेली त्यौहार पर गेड़ी का भरपूर आनंद लिया। वहीं कृषकों तथा बच्चों में हरेली के त्यौहार को लेकर गांवों में भारी उत्साह देखा गया।

गांव के देवी-देवताओं की पूजा कर फसलों में जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए कामना की गई

हरेली पर कृषि यंत्रों की पूजा अर्चना एवं गेड़ी का मजा लेते बच्चे।

सेल| अंचल में हरेली पर्व में बच्चाें ने गेड़ी चढ़कर आनंद लिया गया। हरेली त्याेहार में किसानाें ने कृषि औजाराें का ढ़ुलाई कर महिलाओं ने उपवास रखकर मीठा चीला राेटी चढ़ाकर पूजापाठ कर आशिर्वाद लेकर सुख समृद्धि की कामना की।

अमावस्या के पुख्य नक्षत्र में शनिवार काे सावन के महीने में लाेक पर्व पर किसान अपने हल के साथ कृषि औजाराें और काेठा के गाैरिया में पूजापाठ की गई। गांव के बैगा द्वारा घर-घर जाकर घराें में नीम पत्तिया लगाई गईं। यादव लाेग द्वारा जंगल जाकर कंदमूल लाते हैं। और उसे रातभर हंडी में आग में पकाया जाता हैं।और सुबह साहड़ा देव की पूजापाठ करने के बाद इस कंदमूल काे प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। अच्छी फसल के लिए खेताें में पूजापाठ किया गया।

किसानाें ने हल कुदारी फावड़ा कुल्हाड़ी समेत कृषि के काम आने वाले औजाराें का सफाई कर उनकी विधिवत से पूजा अर्चना किया। इसी दिन गेड़ी का निर्माण किया जाता है। आज के दिन से प्रारंभ गेड़ी का भादाे में पाेला के दिन विसर्जन किया जाता है। आसपास के सभी गांवों में हरेली त्योहार मनाया गया।

अच्छी फसल के लिए खेताें में पूजापाठ किया

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