• Home
  • Chhattisgarh News
  • Mainpur
  • बड़े गोबरा का आश्रम भवन 16 किमी दूर बना, बच्चों को नहीं भेज रहे ग्रामीण
--Advertisement--

बड़े गोबरा का आश्रम भवन 16 किमी दूर बना, बच्चों को नहीं भेज रहे ग्रामीण

बीहड़ जंगल के अंदर बसे गांव बड़े गोबरा में आदिवासी कमार बच्चों के लिए शासन ने 2006-07 में बालक आश्रम भवन निर्माण के लिए...

Danik Bhaskar | Jul 24, 2018, 03:00 AM IST
बीहड़ जंगल के अंदर बसे गांव बड़े गोबरा में आदिवासी कमार बच्चों के लिए शासन ने 2006-07 में बालक आश्रम भवन निर्माण के लिए लगभग 50 लाख रुपए स्वीकृत किया था। संबंधित विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते आश्रम भवन को बड़े गोबरा के बजाय वहां से 16 किमी दूर भाठीगढ़ में बना दिया गया, जहां 12 सालों बाद आज भी भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। अधूरे आश्रम भवन में जान जोखिम में डालकर आदिवासी क्षेत्र के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। बड़े गोबरा में आश्रम भवन नहीं बनने से ग्रामीण अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए आश्रम में भेजना बंद कर दिया है। ग्रामीणों ने दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है।

यह भवन निर्माण कब पूरा होगा, इसका सही जवाब न तो संबंधित विभाग के अफसरों के पास है और न ही निर्माण एजेंसी के पास है। इसकी जानकारी स्थानीय अधिकारियों से लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी है, फिर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। अफसर एवं जनप्रतिनिधि हर बार आश्वासन ही देते हैं। जब आश्रम भवन का निर्माण किया जा रहा था तो इसका बड़े गोबरा के ग्रामीणों ने विरोध किया, लेकिन ग्रामीणों के आवाज को दबा दिया गया और मनमानी करते हुए भवन का निर्माण भाठीगढ़ में कर दिया गया।

मैनपुर. भाठीगढ़ में आदिवासी बालक आश्रम का निर्माण अधूरा हुआ है।

ग्रामीणों का सवाल- किस अफसर के कहने पर भाठीगढ़ में बनाया भवन

ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम भवन का निर्माण बड़े गोबरा के लिए स्वीकृत हुआ है तो उसे 16 किमी दूर भाठीगढ़ में किस अधिकारी के आदेश पर बनवाया गया। यह सवाल आज तक पहेली बनी हुई है। इस मामले की जांच कर संबंधित अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरे जगह आश्रम भवन बनाने से ग्रामीण अपने बच्चों को इस आश्रम में पढ़ाई करने के लिए भेजना बंद कर दिया। आदिवासी बालक आश्रम बड़े गोबरा के नाम से संचालित भाठीगढ़ में 100 सीटर इस आश्रम में वर्तमान मे 100 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त कमरों के अभाव में एक पलंग में दो-दो बच्चे सोने को मजबूर हैं। वहीं पीने के लिए इस आश्रम में साफ पानी भी नहीं है। रसोइया को एक किमी दूर गांव से पीने के लिए पानी लाना पड़ता है।

दोषी अफसरों पर हो कार्रवाई: सरपंच

ग्राम पंचायत बड़े गोबरा के सरपंच रेखा बाई ध्रुव ने बताया कि आश्रम भवन का निर्माण गोबरा में करना था, लेकिन यहां से 16 किमी दूर भाठीगढ़ में बनाने से ग्रामीण अपने बच्चों को इस आश्रम में पढ़ने नहीं भेज रहे हैं। इसकी कई बार शिकायत अफसरों से कर चुके हैं। इस मामले की जांच कर दोषी अफसरों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

राशि के लिए भेजा है पत्र: सब इंजीनियर

लोक निर्माण विभाग के सब इंजीनियर एसके यादव ने बताया कि 48 लाख रुपए की लागत से भवन का निर्माण किया गया है। अधूरे भवन को पूरा करने राशि की मांग के लिए पत्र शासन को भेजा गया है।