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अफसरों व नेताओं से ग्रामीण कई बार कर चुके पुल बनाने की मांग

हीरा खदान के लिए मशहूर गांव पायलीखंड बारिश के चार महीने टापू में तब्दील हो जाता है। उदंती और इंद्रवन नदी में बारिश...

Dainik Bhaskar

Jul 26, 2018, 02:11 PM IST
अफसरों व नेताओं से ग्रामीण कई बार कर चुके पुल बनाने की मांग
हीरा खदान के लिए मशहूर गांव पायलीखंड बारिश के चार महीने टापू में तब्दील हो जाता है। उदंती और इंद्रवन नदी में बारिश के बाढ़ के साथ पायलीखंड नदी पूरे चार महीने उफान पर रहती है। इसके कारण यहां के ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गांव में आधे लोगों के पास मोटर साइकिल तो है, लेकिन बारिश के दौरान वे मोटर साइकिल को अपने घर तक नहीं ले जा सकते।

तहसील मुख्यालय से लगभग 39 किमी दूर पायलीखंड के प्राथमिक और मिडिल स्कूल में बारिश के इन दिनों में शिक्षक कमर तक नदी के पानी को पार कर स्कूल पहुंच बच्चों को पढ़ाते हैं। यह पायलीखंड ग्राम हीरा खदान के नाम से देश दुनिया में मशहूर है और उदंती सहित क्षेत्र के सभी छोटी बड़ी नदी नाले पायलीखंड नदी में मिले होने के कारण बारिश के दिनों में यहां चार माह तक लगभग कमर तक पानी हमेशा रहता है।

इलाज के लिए कांवर में लाते हैं मरीज को

गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए कांवर मे बैठाकर जांगड़ा तक लाना पड़ता है। जांगड़ा तक भी सड़क का निर्माण नहीं होने से यहां के लोगों को संजीवनी एक्सप्रेस 108 का भी लाभ आपातकाल मे नहीं मिला पाता है। इस गांव के पांच छात्र-छात्राएं हाई स्कूल बरगांव में पढ़ाई करती हैं। उन्हें इस नदी में जान जोखिम मे डालकर रोज स्कूल जाना पड़ता है।

बारिश में टापू बन जाता है हीरा उगलने वाला पायलीखंड, नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

मैनपुर. कंधे पर बाइक और साइकिल रखकर पायलीखंड नदी को पार करते हुए ग्रामीण।

पुल निर्माण के लिए बार-बार आवेदन देकर थक चुके हैं

ग्राम पंचायत जांगड़ा के सरपंच चमारसिंह ने बताया बारिश के चार माह पायलीखंड टापू बन जाता है। बार-बार पुल निर्माण के लिए आवेदन देकर थक चुके हैं, अधिकारियो के द्वारा पूर्व मे पुल निर्माण के लिए सर्वे भी किया जा चुका है, लेकिन अब तक पुल निर्माण नहीं होने से यहां के लोग जान जोखिम मे डालकर आना-जाना करने मजबूर हो रहे हैं। वहीं शिक्षक पारेश्वर पटेल ने बताया कि ग्राम पायलीखंड में किराये के आवास नहीं होने के कारण उन्हें नदी इस पार से दूसरे गांव में निवास करना पड़ता है और बारिश के पूरे चार महीने नदी में बाढ़ को पार कर स्कूल जाना पड़ता है। मोटर साइकिल को नदी के किनारे रखकर पैदल 3 किलोमीटर चलना पड़ता है।

जान जोखिम डालकर पढ़ाने आते हैं शिक्षक

पायलीखंड प्राथमिक शाला मे इस वर्ष 23 छात्र छात्राएं एवं मिडिल स्कूल मे 13 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिये शासन द्वारा 4 शिक्षक की व्यवस्था कि गई है और ये शिक्षक प्रतिदिन इसी तरह इस पायलीखंड बड़ी नदी को पारकर स्कूल पहुंचकर बच्चों को शिक्षा देते हैं। कभी कभी तो शिक्षकों की अचानक तेज बहाव से जान जोखिम में रहती है। सर्व शिक्षा अभियान द्वारा पायलीखंड में मिडिल स्कूल निर्माण के लिये 6 लाख रूपये की राशि 8 वर्ष पहले जारी कि गई थी, लेकिन आजतक भवन निर्माण अधूरा है। मिडिल स्कूल और प्राथमिक शाला के बच्चे एक कमरे मे पढ़ने के लिये मजबूर हो रहे हैं। स्कूल का शौचालय भी अधूरा है, ऐसा नहीं है कि यहां के ग्रामीणों ने इस नदी में पुल निर्माण की मांग न की हो, कई बार पुल निर्माण के लिये क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित आला अफसरों को आवेदन देकर थक चुके हैं।

राशन लेने तक कमर तक पानी पार कर आते-जाते

यहां के ग्रामीणों को भी राशन चांवल, दाल, शक्कर, तेल व अन्य जरूरी सामग्री के लिये इसी तरह नदी में पानी को पार कर आना-जाना पड़ता है। नदी के दूसरे पार मोटरसाइकिल को रखना पड़ा है और पैदल नदी पार कर 3 किमी चल कर ही गांव पहुंचते हैं। ग्राम पंचायत जांगड़ा के आश्रित ग्राम पायलीखंड की जनसंख्या लगभग 200 के आसपास है और यहां विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति के लोग भी निवास करते हैं। गांव में स्वास्थ्य की कोई भी सुविधा नहीं है। बिजली अब तक नहीं लग पायी है। रात के अंधेरे को दूर करने दो लीटर मिट्टी तेल के लिए इस विशाल नदी को पार कर जांगड़ा राशन लेने आना पड़ता है तब कहीं जाकर लोगों के घरों में लालटेन की रोशनी हो पाती है।

बाढ़ के दौरान बरतें सावधानी

गरियाबंद| राज्य शासन के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बाढ़ से बचाव और बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। बारिश के मौसम में बाढ़ के पहले, बाढ़ के दौरान और बाद में लोगों को सावधानियां बरतने की हिदायद दी गई है।

बाढ़ से पहले जरूरी सावधानियां : बाढ़ से पहले अफवाहों को नजर अंदाज करना चाहिए तथा घबराना नहीं चाहिए। आपातकालीन संचार व्यवस्था के लिए फोन हमेशा चार्ज रखें तथा संदेश का प्रयोग करें। सावधानी के लिए रेडियो, टीवी तथा समाचार पत्र से मौसम की जानकारी प्राप्त करते रहें। पशुओं को खुला छोड़ें, ताकि वे सुरक्षित स्थान पर जा सकें। सुरक्षा की दृष्टि से पूर्व में ही आपातकालीन किट में सूखा खाद्य पदार्थ, आवश्यक दवाएं, टार्च, रस्सी, महत्वपूर्ण दस्तावेज आदि रखें।

कीचड़ से होकर गुजरते हैं साबर के ग्रामीण

सेल| ग्राम साबर में चखला तालाब माेहल्ले की सड़क कच्ची होने से बारिश में लोगों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। मोहल्लेवासी कई बार पक्की सड़क के लिए सरपंच से गुहार लगा चुके हैं, लेेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया है। वहीं हर साल लोक सुराज शिविर में आवेदन देने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है। माेहल्ले के दाऊलाल साहू, रमेश श्रीवास, चाेंटीराम कैवत्य, कमल पात्रे आदि का कहना है कि कीचड़ में फिसलकर आए दिन लोग गिर रहे हैं। सरपंच वेदप्रकाश वर्मा का कहना है कि पक्की सड़क को लेकर प्रशासन को आवेदन दिया हूं। पानी निकासी की व्यवस्था भी की गई है।

बाढ़ के बाद टूटे हुए बिजली के तारों और खंभो से रहें दूर

टूटे हुए बिजली के तारों, खम्भों व नुकीली वस्तुओं, जहरीले सर्प, कीड़ों एवं मलबों से दूर रहें। बाढ़ के पानी में रखे खाद्य सामग्री का उपयोग न करें। सड़कें अवरूद्ध होने की स्थिति में चेतावनी सूचक संकेत दिखाई देने पर अन्य वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करें। पाइपलाइन या नालियां क्षतिग्रस्त होने पर नल के पानी का उपयोग न करें।

स्वयं को तथा बच्चों को बाढ़ के पानी से दूर रखें। बाढ़ की स्थिति में ऊंचे स्थान पर जाए। घर छोड़ने की स्थिति में विद्युत लाईन एवं बिजली के स्विच बंद कर दें तथा बिजली के खम्भों, टूटे हुए बिजली के तार से दूर रहें। ताजे व सूखे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करें एवं खाना हमेशा ढंक कर रखें। पीने के लिए उबले हुए पानी का ही उपयोग करें। स्वच्छता बनाये रखंे। घर से बाहर अति आवश्यक होने पर ही निकले एवं पानी में चलते समय छड़ी का प्रयोग करें।

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