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प्रदेश में ग्रामीण इलाकों मंे जल संकट मंत्री ने स्वीकारा- कई जल स्त्रोत सूखे

फरवरी के दूसरे सप्ताह में प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। हालात इतने खराब होने लगे है...

Dainik Bhaskar

Feb 17, 2018, 04:35 AM IST
प्रदेश में ग्रामीण इलाकों मंे जल संकट मंत्री ने स्वीकारा- कई जल स्त्रोत सूखे
फरवरी के दूसरे सप्ताह में प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। हालात इतने खराब होने लगे है कि विधायकों ने शुक्रवार को विधानसभा में इस जल संकट पर मंत्री को घेरा। मस्तूरी, जगदलपुर, सरायपाली, पोड़ी-उपरोड़ा, बलौदाबाजार, रायगढ़ आदि में पानी के संकट के मामले सामने आए। विधायकों ने कहा कि हजार हैंडपंप सूख गए है। पीएचई विभाग ने पुरानी योजनाएं ही पुरी नहीं की हैं। जो काम हुए हैं उससे भी लोगों को फायदा नहीं मिल रहा है। विभाग के मंत्री रामसेवक पैकरा ने स्वीकार किया कि कई इलाकों में जल स्त्रोत खत्म हो गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनका विभाग गर्मी से पहले संकट दूर करने के प्रयास करेगा।

प्रश्नकाल में दिलीप लहरिया ने सबसे पीएचई मंत्री पैकरा को घेरा। मस्तूरी में पानी की सबसे बड़ी समस्या है। तीन सालों से बन रही टंकियां ही अधूरी हैं। आप बता दें चालू करेंगे या नहीं तो मैं भी क्षेत्र में जाकर बता दूं। पैकरा ने कहा कि देवरी खुर्द में जल स्त्रोत नहीं हैं। सभापति देवजी पटेल ने भी कहा कि विधायक के क्षेत्र में 13 टंकियां बन रही हैं। सदस्य की चिंता है उन्हें बता दें कब शुरू होंगी। मोहन मरकाम ने कहा कि पानी ही नहीं है तो टंकियां क्यों बनवा दी? भाजपा विधायक संतोष बाफना ने कहा कि आपने हजार जनसंख्या वाले गांवों में नल-जल योजना शुरू करने कहा था उसका क्या हुआ? पैकरा ने कहा कि अभी 2000 की आबादी तक ही यह योजना लागू है।

















स्थल-जल योजना का काम हर जगह चल रहा है। राम दयाल उइके ने पोड़ी-उपरोड़ा व चोटिया जल प्रदाय योजना में भ्रष्टाचार का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि जहां टंकी बनी है पानी का स्त्रोत उससे डेढ़ किमी दूर है। रामलाल चौहान ने सरायपाली में भीषण जल संकट की बात कही। उन्होंने कहा कि आसपास के गावों से पानी लाकर लोग प्यास बुझाते हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि सरायपाली के लिए 57 लाख की योजना मंजूर की गई है। 15 फरवरी तक टेंडर होना था। जल्द काम शुरू होगा। उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले में वाटर हार्वेस्टिंग के लिए फंड न होने की वजह से वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बने सिस्टमों की मरम्मत न होने से अच्छी योजना को पलीता लगाने का मुद्दा उठाया। मंत्री ने कहा कि इसका परीक्षण करवाकर उचित कदम उठाया जाएगा। भाजपा के अशोक साहू ने उनके क्षेत्र में 18 गांवों में जल संकट बताया गया है।







जबकि वास्तविक संख्या कहीं अधिक है। आखिर कौन से यंत्र से विभाग पता करता है कि जल स्त्रोत है या नहीं। जनकराम वर्मा ने बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में पानी की कमी दूर करने की मांग की। सांवला राम डाहरे, श्याम बिहारी जायसवाल, धनेंद्र साहू, सरोजनी बंजारे, गिरवर जंघेल ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं प्रश्नकाल में उठाईं।

अमर ने कहा- पूर्ण शराबबंदी नहीं हमने आंशिक शराबबंदी की बात की थी

आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के विभागों की चर्चा के दौरान पूर्ण शराबबंदी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जमकर हमले किए। कांग्रेस के मोहन मरकाम ने मंत्री के भाषण के दौरान टोकते हुए कहा कि पूर्ण शराबबंदी की आपने घोषणा की थी। कहा था कि समिति बनाए हैं, अध्ययन करा रहे हैं। इस पर अग्रवाल ने कहा कि हमने इस तरह की कोई घोषणा नहीं की थी। हमने आंशिक शराबबंदी की बात की थी। इस दिशा में निरंतर अागे बढ़ रहे हैं। हमारे प्रयासों के कारण पिछले 10 माह में विदेशी मदिरा की खपत 23 फीसदी घटी है, जबकि देशी मदिरा की खपत 1 फीसदी बढ़ी है। सरकार की नीतियों के कारण ही शराब की खपत में कमी आई है। इस पर संत कुमार नेताम व मोहन मरकाम ने हस्तक्षेप किया कि दारू ओड़ीसा से आ रही है और पहले से ज्यादा बिक रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि गांवों में शराब नहीं मिल रहा है इसीलिए बार्डर के जिलों में ओड़िसा से आ रहा है।मंत्री अग्रवाल ने कहा कि देश में शराब की ट्रैकिंग के लिए कोई सिस्टम नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ में हमने इसे शुरू किया है। यहां कोई भी अवैध शराब नही बेच सकता।







छत्तीसगढ़ इकलौता राज्य है, जहां बिल दिया जाता है।

मंत्री अग्रवाल ने कहा कि हमने पहले से ही पेट्रोल -डीजल की कीमत कम रखी है। हमारे यहां पेट्रोल 72 रुपए है। मध्य प्रदेश में 78 रुपए है। दूसरे राज्यों में कीमत हमारे यहा से ज्यादा है। मंत्री ने कहा कि हमने न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया है बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं। इस पर मोतीलाल देवांगन ने टोकते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के कितने लोगों को और बाहरी लोगों को कितना रोजगार मिला, यही बता दें। जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि हमने औद्योगिक नीति में पहले से ही स्थानीय लोगों के रोजगार के प्रावधान को शामिल किया है। जिन्होंने इस नीति का पालन नहीं किया ऐसे 21 फीसदी कंपनियों की सब्सिडी निरस्त की।





चर्चा के दौरान हास-परिहास का दौर भी चला

कवासी ने शराब नीति पर टिप्पणी की तो बृजमोहन अग्रवाल ने ये कहते हुए टोका कि इस मामले में आप मत बोलो। अमर अग्रवाल ने कहा- कवासी लखमा बड़े-बड़े ब्रांड का नाम देते हैं। बड़ी महंगी आती है उस ब्रांड की शराब। इस पर प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा- टोल फ्री नंबर याद कर लो। अमर अग्रवाल ने कहा- वो नंबर शराब लेने के लिए नहीं बल्कि शिकायत करने के लिए है।

जीएसटी व स्थानीय को नौकरी के मुद्दे पर विपक्ष ने बोला हमला

इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव , सत्यनारायण शर्मा, रेणु जोगी, मोतीलाल देवांगन, विमल चोपड़ा सहित अन्य सदस्यों ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने, पूर्ण शराबबंदी व जीएसटी के मुद्दे पर सरकार पर हमले किए।

जंगली जानवरों को मारने के फर्जी मामले हो सकते हैं वापस

वनमंत्री महेश गांगड़ा ने कहा कि जंगली जानवरों को मारने के फर्जी मामलों को वापस लेने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि 137 प्रकरण में से कई मामले कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं, ऐसे में कोर्ट में चल रहे मामलों को छोड़कर विचाराधीन प्रकरण पर सरकार विचार करेगी। कांग्रेस विधायक सत्यनारायण शर्मा ने शुक्रवार को वन्यजीवों की वजह से फसलों के नुकसान और वन्य जीवों के हत्या के प्रकरण का मामला उठाया।







शर्मा ने वन मंत्री से पूछा कि वर्ष 2015-16 से दिसंबर 2017 तक जानवरों से फसल नुकसान के कितने प्रकरण हुए। इस दौरान वन्य जीव की हत्या के कितने प्रकरण दर्ज किए गए। गागड़ा ने कहा कि इस दौरान फसल नुकसान के 9470 शिकायतें मिली है। इस दौरान वन्य जीव की हत्या के 137 प्रकरण लोगों पर दर्ज किए गए हैं। शर्मा ने फिर कहा कि आत्मरक्षा के लिए भी कई बार लोगों को वन्य जीवों की हत्या करनी पड़ती है, ऐसे प्रकरण को चिन्हित कर लोगों के दर्ज हुए प्रकरण का निराकरण किया जाए। धनेंद्र साहू ने भी इस मामले में नया कानून बनाकर मैदानी क्षेत्र में आत्मरक्षा में मारे गये वन्य जीवों के मामले में प्रकरण ना दर्ज करने की मांग की। जवाब में मंत्री ने कहा कि केंद्र की तरफ से बनाये गये कानून का राज्य सरकार की पालन कराती है।



कानून में बदलाव करना है तो सदन में संकल्प पारित कर भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे मामलों में संज्ञान लिया है। रामदयाल उइके, डॉ. विमल चोपड़ा ने जानवरों से मौत या प्रभावितों को समय पर मुआवजा देने की मांग की।

दुर्ग में अवैध टावरों का मुद्दा गूंजा -

कांग्रेस विधायक अरुण वोरा ने दुर्ग में अवैध मोबाइल टॉवर लगाए जाने का मामला उठाया। उन्होंने जांच की मांग की। इस पर नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ने बताया कि दुर्ग में 57 टॉवर अवैध है। 35 मामले कोर्ट में हैं और 22 मामलों के नियमितीकरण की प्रक्रिया चल रही है। नियमित करने के लिए नियमानुसार जुर्माना भी लगाया जाएगा। रेडिएशन मानक स्तर पर पाया गया है। टॉवर लगाते समय ही रेडिएशन सर्टिफिकेट लिया जाता है। इस मामले में शिकायत मिलने पर जांच कराई गई थी, लेकिन उसमें भी मानक स्तर पर पाया गया।

प्रयास स्कूलों में स्कॉलरशिप में अनियमितता पर सदन में बहस

प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में शिष्यवृत्ति की राशि में अनियमितता के मामले पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव व मोहन मरकाम ने शिक्षामंत्री केदार कश्यप को घेरा। शिक्षामंत्री ने सभी आरोपों को नकारते हुए किसी भी विद्यालय में जाकर भोजन करने की बात विधायकों से कही।

उन्होंने कहा कि अनियमितता कहीं नहीं है।





सिंहदेव व मरकाम ने विभाग के आयुक्त के पत्र का उल्लेख करते कहा कि उनके पत्र को हल्के से न लें। आयुक्त ने हर महीने विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट कब-कब भेजी गई यह बताएं।

ध्यानाकर्षण के दौरान सिंहदेव मरकाम ने आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना के अंतर्गत चल रहे इन विद्यालयों में बच्चों को खाना गुणवत्तापूर्ण नहीं मिल रहा। बिना टेंडरों के खरीदी की जा रही है। सालों से वित्तीय अनियमितता हो रही है। योजना से खिलवाड़ किया जा रहा है। शिक्षामंत्री ने सभी आरोपों को नकारते हुए किसी भी विद्यालय में जाकर भोजन करने की बात विधायकों से कही। उन्होंने कहा कि अनियमितता कहीं नहीं है। भंडार क्रय नियमों का पालन हो रहा है। टेंडर प्रक्रिया का पान न करने की बात सही नहीं है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकारा एमसीआई को कमियां मिलीं -

स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने सदन में स्वीकार किया कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की टीम को राजधानी के मेकाहारा में कई विभागों में कमियां मिली थीं। इस पर कम्प्लाइंस की रिपोर्ट भेज दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम अगले महीने कुछ महीनों फिर आकर सुपर स्पेशिएलिटी हास्पिटल का मुआयना करेगी। चंद्राकर ने बताया कि डीकेएस में 600 पदों पर भर्ती होगी। नई मशीनें अगले हफ्ते तक आ जाने की संभावना है। यह सही नहीं है कि यहां सुपरस्पेशलिस्ट डाक्टर बनने के विकल्प खत्म हो गए हैं। किसी भी डाक्टर का गलत प्रमोशन नहीं किया गया है। दुर्ग विधायक अरूण वोरा ने ध्यानाकर्षण के दौरान यह मुद्दा उठाया था। डॉ. रेणु जोगी ने चंद्राकर से पूछा कि एक ओर तो सुपर स्पेशिएलिटी हास्पिटल शुरू नहीं हुआ। दूसरी ओर एस्कार्ट हास्पिटल बंद कर दिया गया। कम से कम वहां लोगों के दिल के आपरेशन तो हो रहे थे। आपात स्थिति में लोगों को बड़ा सहारा था। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एस्कार्ट से अनुबंध की अवधि खत्म हो गई थी। वहां गरीबों का इलाज नहीं हो रहा था। जब यह अस्पताल शुरू हुआ तब सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टर नहीं थे, अब हैं।

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