मस्तूरी

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गांव की महिलाएं डेढ़ किमी दूर से लाती हैं पीने का पानी

विधायक आदर्श ग्राम पंचायत बकरकुदा में ग्रामीणों को भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव के...

Danik Bhaskar

Jun 08, 2018, 03:20 AM IST
विधायक आदर्श ग्राम पंचायत बकरकुदा में ग्रामीणों को भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव के जलस्त्रोतों के सूखने से गांव में गंभीर समस्या उठ खड़ी हुई है। लोगों को निस्तारी के लिए पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। मस्तूरी विधानसभा में ग्राम बकरकुदा की आबादी करीब दो हजार के लगभग है। विधायक दिलीप लहरिया के प्रयास से गांव को आदर्श ग्राम का दर्जा जरूर मिल गया है। लेकिन गांव में मूलभूत सुविधा की दरकार है। सबसे बड़ी पानी की समस्या खड़ी हो गई है। जिला मुख्यालय से महज 25 किलोमीटर की दूरी और जनपद मुख्यालय से नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विधायक आदर्श ग्राम पंचायत बकरकुदा को विकास की ओर ले जाने के उद्देश्य से विधायक दिलीप लहरिया ने गोद लेकर प्रयास किया। विधायक के द्वारा पंचायत में कई कार्य कराए गए। लेकिन गांव की परेशानी दूर नहीं हुई है। वर्तमान में गांव में आधा दर्जन से अधिक हैंडपंप खराब है। इसकी जानकारी पीएचई विभाग के अधिकारियों को होने के बाद भी अंजान है। ग्रामीणों की पानी पीने और निस्तारी की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि पांच माह से टेपनल की पंप लाइन खराब है पीएचई अधिकारियों को समस्या बताने के बावजूद परेशानी है। उनके द्वारा किसी भी प्रकार से पहल नहीं की जा रही है समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। गांव के बाद मल्हार रोड में सड़क के किनारे राहगीरों के लिए लगे एकमात्र हैंडपंप में पानी आ रहा है।

गांव के लोग महिलाओं सहित डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय कर पानी भरने के लिए सुबह से शाम तक पहुंचते हैं। कुछ लोग पानी भरने के लिए रिक्शा और साइकिल का उपयोग करते हैं। बड़ी-बड़ी बाल्टी और प्लास्टिक की डिब्बे में पानी भरकर वाहन में ढो रहे हैं। ग्रामीण ने बताया मस्तूरी में पीएचई विभाग के अधिकारियों से पानी के लिए कई बार गुहार लगा चुके हैं कोई जवाब नहीं देते हैं। गाव में पंचायत द्वारा पानी की टंकी का पिछले वर्ष ही निर्माण कराया गया था। लेकिन पाइप लाइन में खराबी आने के कारण अब भी पानी नहीं मिल पा रहा हैं। गांव के सभी जलस्रोत सूख चुके हैं। उन्हें पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। गांव की सतरूपा यादव और संतोष आग्रे ने बताया कि शासन के द्वारालाखों रुपए स्वीकृत होने के बाद गांव की स्थिति नहीं सुधरी है। गांव से दूर सड़क किनारे हैंडपंप से पानी भरने बधाों के साथ आते हैं। मेन रोड में आने जाने के कारण दुर्घटना का भय रहता है। अधिकारी और जन प्रतिनिधियों को उनकी कोई चिंता नहीं है।

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