• Home
  • Chhattisgarh News
  • Masturi News
  • बीएमओ बोले- मस्तूरी की दूरी बिलासपुर से कम, इसलिए डॉक्टर आना-जाना करते हैं
--Advertisement--

बीएमओ बोले- मस्तूरी की दूरी बिलासपुर से कम, इसलिए डॉक्टर आना-जाना करते हैं

मरीजों को समय पर स्वास्थ्य लाभ मिल सके, इसके लिए मस्तूरी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो है, लेकिन उन्हें समय पर...

Danik Bhaskar | Jul 04, 2018, 03:20 AM IST
मरीजों को समय पर स्वास्थ्य लाभ मिल सके, इसके लिए मस्तूरी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो है, लेकिन उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्टाफ का मुख्यालय पर नहीं रहना, लेट आना और मनमानी करना है। इसलिए बीमार लोगों को समय पर अच्छा इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे मेंे वे झोलाछाप से इलाज करा लेते हैं। ये उनके स्वास्थ्य व जान के लिए खतरे से कम नहीं है। ऐसी स्थित में मस्तूरी सहित आसपास के लोगों को इलाज कराने के लिए परेशान होना पड़ता है। वहीं मस्तूरी सामुदायिक व उपस्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की कमी है। इसलिए ज्यादातर मरीजों को बिलासपुर जाकर इलाज कराना पड़ता है। मस्तूरी ब्लॉक में 53 उपस्वास्थ्य केंद्र और 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। वहीं एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। इनमें से कई पदस्थ डॉक्टर व स्वास्थ्य कार्यकर्ता केंद्र मुख्यालय पर नहीं रहते हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ का टोटा, मरीज परेशान

मस्तूरी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, यहां डॉक्टरों के समय पर न पहुंचने से ओपीडी पर नहीं रुकते मरीज।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आते हैं आसपास के मरीज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मस्तूरी सहित आसपास के गांव के लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। डॉक्टरों के समय पर नहीं मिलने से उन्हें बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है या निजी अस्पतालों में जाने के साथ कई लोगों को मजबूरन इलाज कराने बिलासपुर जाना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन डॉक्टर हैं, लेकिन इनमें से सभी अप-डाउन करते हैं। इस कारण ये समय पर ओपीडी पर नहीं पहुंच पाते हैं। इसी तरह मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र के पर आसपास के गांव के मरीज आते हैं। इसके बावजूद यहां पर कोई जिम्मेदारी संभालने वाले डॉक्टर नहीं हैं।

इनमें से अधिकतर बिलासपुर जिले से आते हैं। ओपीडी का समय खत्म होने के बाद मुख्यालय पर वापस आ जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के ऐसे गैरजिम्मेदार डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही के कारण ब्लॉक के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज असमय काल के गाल में समा जाते हैं।

बारिश में मौसमी बीमारियों का बढ़ जाता है संक्रमण

पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश्वर भार्गव का कहना हैं कि सभी स्वास्थ केंद्र में पदस्थ डॉक्टरों को बने आवास में रहना चाहिए ताकी अस्पताल से िमलने वाली सभी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मरीजों को आसानी से िमल सके। अभी बारिश के मौसम में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाएगा। रोज स्वास्थ्य केंद्र पर संक्रमण से पीड़ित मरीजों की लंबी-लंबी कतार लगने लगेंगी। तब डॉक्टरों को अस्पताल में होना बहुत जरूरी है, इसलिए उन्हें ड्यूटी वाले स्थान पर ही रह कर मरीजों का समय पर इलाज करना चाहिए।

स्टाफ के लिए अस्पताल के पीछे बना है भवन