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देवशयन एकादशी कल श्रीहरि जाएंगे बैकुंठ, 4 माह शुभ कार्य होंगे बंद

भास्कर न्यूज | नवापारा राजिम आषाढ़ शुक्ल एकादशी जिसे देवशयन एकादशी भी कहते हैं, सोमवार को है। इस दिन जगत के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 22, 2018, 02:50 AM IST

देवशयन एकादशी कल श्रीहरि जाएंगे बैकुंठ, 4 माह शुभ कार्य होंगे बंद
भास्कर न्यूज | नवापारा राजिम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी जिसे देवशयन एकादशी भी कहते हैं, सोमवार को है। इस दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु शयन के लिए लिए बैँकुंठ धाम चले जाएंगे और आगामी 4 महीने के लिए राक्षसों की रात प्रारंभ हो जाएगी। इसके कारण आगामी चार महीने तक शुभ और मांगलिक कार्य नहीं होंगे। वहीं आसुरी वृत्तियों पर अंकुश लगाने एवं गृहस्थों को सन्मार्ग पर चलाए रखने के लिए दूसरे दिन से सन्यासियों का चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा। 19 नवंबर सोमवार को देवप्रबोधिनी एकादशी है। इसी दिन तुलसी सालिग्राम विवाह के साथ समस्त मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। लेकिन शुभ विवाह के शुभ मुहूर्त के लिए लोगों को दो महीने और प्रतीक्षा करनी होगी। विवाह का पहला मांगलिक मुहूर्त 17 जनवरी 2019 को है और अंतिम 9 मार्च को है।

नगर के ज्योतिष भूषण पं. ब्रम्हदत्त शास्त्री ने बताया कि हमारे सनातन धर्म में आगामी चार महीने विभिन्न सांस्कृतिक, मांगलिक कार्यों के लिए निषेध के महीने माने जाते हैं। सह गृहस्थ, गृह प्रवेश, सगाई, शादी आदि मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं। बस देव आराधना में इन चारों महीनों को बिताने का विधान है। चातुर्मास में संतों के सत्संग प्रवचन सुनना और उनकी सेवा करना, सर्वोच्च प्राथमिक सत्कर्म होता है। इसके साथ ही शिव परिवार का पूजन व पूर्वजों की कृपा प्राप्त करना भी उल्लेखनीय होता है।

पं. ब्रम्हदत्त शास्त्री

शिव साधना के लिए 5 सोमवार पितृ पक्ष 24 सितंबर से

पं. ब्रम्हदत्त ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में दिवाली के 11वें दिन देवशयनी एकादशी से ही सावन की शुरुआत हो जाती है। इस लिहाज से 23 जुलाई, 30 जुलाई, 6 अगस्त, 13 अगस्त व 20 अगस्त 5 सोमवार विशेष रूप से शिव साधना के पड़ रहे हैं। इसे व्रत चंद्रिका रोटक व्रत की संज्ञा दी गई है। जो साधक ये 5 व्रत पूरे करता है, उसे शिव पार्वती की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। 13 सितंबर से श्री गणेश जी की पूजा सेवा शुरू हो जाएगी। रिद्धि-सिद्वी देने वाले और विघ्नों को दूर करने वाले मंगलमूर्ति गणेश जी का पूजन 10 दिनों तक करने के बाद 24 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो जाएगा। आगामी 15 दिनों तक लोग पितरों का तर्पण पिंडदान आदि करेंगे।

10 अक्टूबर से नवरात्रि, 7 नवंबर को दिवाली

10 अक्टूबर से नवरात्रि व्रत शुरू हो जाएगा। 19 अक्टूबर से विजयादशमी एवं 7 नवंबर को प्रमुख पर्व दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन होगा।

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