• Hindi News
  • Chhatisgarh
  • Nayapararajim
  • ‘गुरु चरण में अंगूठा चढ़ाना एकलव्य की गुरुभक्ति की मिसाल’

‘गुरु चरण में अंगूठा चढ़ाना एकलव्य की गुरुभक्ति की मिसाल’ / ‘गुरु चरण में अंगूठा चढ़ाना एकलव्य की गुरुभक्ति की मिसाल’

Nayapararajim News - भास्कर न्यूज | नवापारा राजिम चातुर्मास के लिए पहुंचे संतवृदों ने श्वेतांबर जैन मंदिर में शुक्रवार को गुरु...

Bhaskar News Network

Jul 27, 2018, 03:06 AM IST
‘गुरु चरण में अंगूठा चढ़ाना एकलव्य की गुरुभक्ति की मिसाल’
भास्कर न्यूज | नवापारा राजिम

चातुर्मास के लिए पहुंचे संतवृदों ने श्वेतांबर जैन मंदिर में शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा पर भक्त साधकों को पर्व की महत्ता पर भास्कर के माध्यम से संदेश देते हुए कहा कि गुरुभक्ति का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण एकलव्य व द्रोणाचार्य की कथा है और इसे तब एकलव्य ने अविस्मरणीय बना दिया, जब दक्षिणा में अपना अंगूठा काट गुरु चरणों में अर्पित कर दिया। अध्यात्म योगियों ने कहा कि पांच गुणों से युक्त व्यक्ति ही सद्गुरु कहलाता है। ब्रह्मचारी, अपरिग्रही, सत्यवान, अहिंसक, अगतदान के धनी आत्मार्थी ही सद्गुरु की योग्यता रखते हैं। जन्म से मृत्यु तक मनुष्य को गुरु की आवश्यकता बनी रहती है। गुरु बिना ज्ञान अधूरा है, प्रथम मार्गदर्शक गुरु ही है।

भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म में सद्गुरु को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। तुलसीदास जी ने चालीसा की पहली पंक्ति श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधार.. में गुरु की करूणा कृपा दर्शाई है। हर युग में गुरु की सर्वोच्च सत्ता रही है। द्वापर में ऋषि सांदीपनि के शिष्य श्रीकृष्ण सुदामा का युग हो या द्रोणाचार्य के शिष्य कौरव पांडव या एकलव्य ये सभी गुरु पूजन कर श्रेष्ठ हुए थे। जैन परंपरा में हुए 24 तीर्थंकर वस्तुतः गुरु ही तो हैं, जिनकी साधु संत जिनवाणी का यशोगान करते पैदल विचरण करते हैं। सनातन धर्म के संत-महंत विभिन्न अखाड़ों के श्रीमहंत जगतगुरु शंकराचार्य को अपना गुरुवर मान धन्य हो रहे हैं। गुरू की महिमा को शब्दों में बांधना मुठ्ठी भर रेत से समुद्र सेतु बांधने के समान है।

नवापारा राजिम. चातुर्मास के लिए जैन श्वेतांबर मंदिर में मौजूद जैन संत गुरु पर्व की महिमा बताते हुए।

X
‘गुरु चरण में अंगूठा चढ़ाना एकलव्य की गुरुभक्ति की मिसाल’
COMMENT