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रबी फसल में घाटा खाए किसान सब्जियों के सही दाम नहीं मिलने से हो रहे आहत

खरीफ फसल गंवा चूके और रबी में भी घाटा खाए किसान अब सब्जियों में हो रहे नुकसान से काफी आहत हैं। बिजली पंप के भरोसे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 05, 2018, 03:15 AM IST

रबी फसल में घाटा खाए किसान सब्जियों के सही दाम नहीं मिलने से हो रहे आहत
खरीफ फसल गंवा चूके और रबी में भी घाटा खाए किसान अब सब्जियों में हो रहे नुकसान से काफी आहत हैं। बिजली पंप के भरोसे खेती कहना कठिन और लागत निकालने परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि परिवर्तन भले ही सीमित स्तर का हो, लेकिन केवल बिजली पंप के भरोसे अंचल के किसान रबी के धान के अलावा गेहूं, चना, मटर, तिल, सरसो, मक्का के अलावा पर्याप्त मात्रा में सब्जी की फसलों का उत्पादन करते हुए फसल चक्र में बीते दो ढाई दशक से परिवर्तन करते आ रहे हैं। पर सही दाम नहीं मिलने से समस्या हो रही है।

अंचल के अमेरी, पेंड्री, झीपन, मुड़पार, बासीन, शिकारी केशली आदि गांवों में पानी साधन वाले किसान प्रति एकड़ हजारों रुपए खर्च कर व कमर तोड़ मेहनत कर भिंडी की फसल ले रहे हैं, जिनसे कुछ की तोड़ाई भी शुरू हो चूकी है, कुछ टूटने वाले हैं। लेकिन थोक बाजार में भिंडी महज पांच रुपए व चिल्हर में दस रुपए तक प्रति किलो की दर पर बिकने से किसान हताश हैं। नवापारा के रामकुमार, पुनीत राम, डोमार निषाद आदि ने बताया कि आधा से एक एकड़ में भिंडी बोई गई है। अमेेरी के दिनेश्वर वर्मा, रामकुुमार साहू, खिलावान वर्मा, पंचराम निषाद, शिकारी केशली के नारायण यदु आदि ने बताया कि भिंडी की खेती में निंदाई, कोड़ाई, तोड़ाई के साथ प्रतिदिन डालने वाली दवाई के कारण काफी खर्च होता है, लेकिन इस साल उत्पादन की अधिकता के कारण दाम काफी गिर गए हैं। इसके कारण लाभ होना तो दूर मूल धन निकल जाए तो बहुत है। आधा एकड़ में सब्जी बोने वाले नवापारा के रामकुमार बच्चों सहित भिंडी तोड़ रहे हैं। वहीं सिंचाई के लिए पाइप बिछा रहे किसानों ने बताया कि खुद मेहनत कर रहे हैं तो कुछ बच पाएगा।

सुहेला. नवापारा में भिंडी तोड़ते कृषक परिवार ।

दवाई व मजदूरी में 10 हजार खर्च

मुड़पार के बिरझा निषाद ने कहा कि बैल, भैसों जैसे मेहनत करने के बाद भी मजदूरी नहीं निकल पाती अभी फल टूटना शुरू नहीं हुआ है, लेकिन दवाई व मजदूरी में दस दस हजार दे चुके हैं। फसल न ले तो बिजली बिल, बिजली पंप व खेती का क्या करेंगे।

7 हजार क्विंटल में खरीदा बीज दाम मिल रहे 25 सौ

अमेरी के दिनेश्वर ने बताया कि अरहर, चना, सरसो के मंडियों में काटे गए दाम से आंसू निकल गए हैं। सात हजार क्विंटल में लिया बीज आज मात्र 25 सौ बेचने के मजबूर हैं।

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