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जल्द पूरी होगी राजभाषा आयोग की तैयारी छत्तीसगढ़ी में पढ़ाए जाएंगे हिन्दी के पाठ

यदि शासन और छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग की आपसी सामंजस्य ठीकठाक रहा, तो अगले वर्ष से फिलहाल प्राथमिक शालाओं के पाठ्य...

Danik Bhaskar | Jul 23, 2018, 03:20 AM IST
यदि शासन और छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग की आपसी सामंजस्य ठीकठाक रहा, तो अगले वर्ष से फिलहाल प्राथमिक शालाओं के पाठ्य पुस्तक हिंदी की बजाए छत्तीसगढ़ी में पढ़ने को मिलेगा। इसका संकेत धर्म नगरी राजिम में वर्तमान हिंदी पाठ्यपुस्तक का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद का कार्य युद्ध स्तर पर चलने से मिल रहा है।

इसकी जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के जिला संयोजक एवं प्रख्यात साहित्यकार काशीपुरी कुंदन को भी दी गई है। जो वर्तमान में इस कार्य को लगातार कर रहे हैं। कुंदन ने बताया कि इस महीने के प्रथम सप्ताह में छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के कार्यालय में आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र दुबे की विशेष आतिथ्य में बैठक संपन्न हुई थी। इसमें शासन के निर्देश पर चर्चा की गई तथा परिपालन में प्राथमिक शालाओं के पाठ्यपुस्तक को हिंदी से छत्तीसगढ़ी में अनुवाद करने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ी अनुवाद की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है।

आयोग की कवायद

धर्मनगरी में किया जा रहा है हिंदी के पाठों का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद करने काम

छत्तीसगढ़ी संस्कार और संस्कृति को जान सकेगी पीढ़ी

कुंदन प्रतिदिन 4 से 5 घंटे छत्तीसगढ़ी अनुवाद लेखन के काम में लगे हुए हैं। कोशिश है कि जल्द से जल्द अनुवाद का काम पूरा हो जाए और अनुवाद लेखन के बाद आयोग के माध्यम से शासन को परीक्षण और अंतिम स्वीकृति हेतु भेजा जाएगा। सभी कुछ सही रहा तो अगले वर्ष से छत्तीसगढ़ी को पाठ्यपुस्तक में लाया जा सकेगा। जिससे आने वाली पीढ़ी छत्तीसगढ़ी की बोली के साथ-साथ यहां के संस्कार और संस्कृति को जान सकेंगे। कुंदन ने कहा कि अभी भी छत्तीसगढ़ी को शुद्ध रूप में बोलने में बहुत ही झिझक होती है। साथ ही पढ़ने में भी बहुत ज्यादा दिक्कतें आती हैं । जबकि अन्य प्रांतों में दक्षिण भारत, महाराष्ट्र में वहां की बोली को पहले से ही प्राथमिकता दी गई है। और वहां के लोग बड़ी आसानी से अपनी बोली को बोलते हैं साथ ही पढ़ भी लेते हैं। वहां की बोली उनके जीवन में पूरी तरह रच बस गई है।