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मॉडल गांव में मुक्तिधाम नहीं, बारिश में तिरपाल से ढंक रहे चिता

Nayapararajim News - भास्कर न्यूज | कोपरा नवापारा सावन की मूसलाधार बारिश में खुले आसमान के नीचे हाथों में छतरी लिए तिरपाल ढंककर दाह...

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2018, 03:21 AM IST
मॉडल गांव में मुक्तिधाम नहीं, बारिश में तिरपाल से ढंक रहे चिता
भास्कर न्यूज | कोपरा नवापारा

सावन की मूसलाधार बारिश में खुले आसमान के नीचे हाथों में छतरी लिए तिरपाल ढंककर दाह संस्कार क्रिया करते दिख रहे ये लोग किसी अति पिछड़े या अनुसूचित क्षेत्र के नहीं हैं वरन राजिम विधानसभा क्षेत्र के ब्लॉक फिंगेश्वर के मॉडल ग्राम पंचायत जेंजरा के आश्रित ग्राम मुड़तराई के हैं।

आजादी के सात दशक बाद भी मुड़तराई का मुकद्दर नहीं बदल सका है। विकास की दौड़ में पिछड़े इस ग्राम के पंचायत प्रतिनिधियों की निष्क्रियता का प्रमाण यह है कि गांव के लोगों को न जीवित रहते कोई सुविधा मिली है और न ही मरणोपरांत उसे मुक्तिधाम नसीब हो पाया है। एक तरफ तो सरकार विकास का दम भरती है पर दूसरी ओर मॉडल ग्राम पंचायत की यह तस्वीर उनके विकास के दावों की पोल खोल रही है। साथ ही मॉडल ग्राम पंचायत की धुंधली तस्वीर को बयां करती है।

प्रदेश में शासन एक ओर जन्म से मृत्यु तक की विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन मरने के बाद मृतकों को मुक्तिधाम भी नसीब नहीं हो पा रह है। मुक्तिधाम का निर्माण न होने के कारण ग्राम मुड़तराईवासी को सावन की मूसलाधार बारिश में भी तिरपाल ढंककर और हाथों में छतरी लेकर खुले आसमान के नीचे दाह संस्कार करने के लिए मजबूर हैं। मंगलवार को ग्राम के 70 साल के बुजुर्ग सगाराम ध्रुव का देहांत हुआ तो उनके परिजन खुले आसमान के नीचे ही दाह संस्कार करने को विवश हुए। इस समस्या के निराकरण के लिए कई बार मांग करते करते थक चुके हैं, पर समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।

जन्म-मृत्यु की योजनाएं पर जरूरी चीज नहीं

ग्राम के वरिष्ठ नागरिक तोरण ध्रुव, श्यामलाल ध्रुव, पहल नवयुवक मंडल के अध्यक्ष हुलासराम साहू, तुलाराम वर्मा, पवन कुमार, किशुन ध्रुव, मन्नू यादव,भीम सिंह ध्रुव, पीतांबर ध्रुव, छबि ध्रुव, भाव सिंह वर्मा, राधेलाल ध्रुव, कुंभकरन ध्रुव, रोहित ध्रुव, नकुल साहू, आशाराम ध्रुव, संतू ध्रुव, पुराणिक ध्रुव सहित मृतक के परिजनों ने शीघ्र ही मुक्तिधाम बनाने की मांग की है।

मुक्तिधाम की जमीन आरक्षित, काम शुुरू ही नहीं हुआ

ग्रामीणों ने बताया कि खसरा नंबर 210 स्थित 75 डिसमिल भूखंड पहले से मुक्तिधाम के लिए आरक्षित है, लेकिन सरपंच की उदासीनता के चलते अब तक मुक्तिधाम नहीं बन पाया है। इसके पहले भी ग्रामवासियों ने मुक्तिधाम बनाने की मांग जनप्रतिनिधियों से की थी।

सरपंच बोले-शासन से राशि मंजूर नहीं हुई : सरपंच नीलेश्वरी साहू ने बताया कि शासन से मुक्तिधाम के लिए राशि स्वीकृत नहीं हुई है। गांव वाले मुक्तिधाम के लिए विवादित जगह को आरक्षित किए हैं। अगर सड़क किनारे की जगह को देते तो अब तक मुक्तिधाम शेड बन हो गया होता।



नवापारा राजिम. तिरपाल ढककर शव का दाह संस्कार करते परिजन ।

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