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गो माता में 33 कोटि देवी-देवता का वास सभी लोगों को इनकी सेवा करनी चािहए

Dainik Bhaskar

Apr 23, 2018, 04:20 AM IST

Nayapararajim News - गौ माता जब तक दुखी रहेगी मनुष्य सुखी नहीं रह सकता है। गाय की सेवा करना हम सब का परम कर्तव्य है क्योंकि गौमाता में 33...

गो माता में 33 कोटि देवी-देवता का वास सभी लोगों को इनकी सेवा करनी चािहए
गौ माता जब तक दुखी रहेगी मनुष्य सुखी नहीं रह सकता है। गाय की सेवा करना हम सब का परम कर्तव्य है क्योंकि गौमाता में 33 कोटि देवी देवताओं का वास माना जाता है। गाय के मूत्र, गोबर इत्यादि मनुष्य के लिए बड़े ही लाभदायक औषधि के रूप में काम आता है।

उक्त बात रविवार को चौबेबांधा में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दूसरे दिन भगवताचार्य पंडित ईश्वर प्रसाद मिश्रा (अभनपुर) ने कही। उन्होंने आगे कहा की कोई धार्मिक व्यक्ति के राजा बन जाने से धर्म कृत्य के प्रभाव से राज्य में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है। माता पिता की सेवा करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं।

बैठना ही है तो परमात्मा की गोद में बैठो: उन्होंने ध्रुव चरित्र प्रसंग पर कहा कि राजा उत्तानपाद की दो प|ी सुनीति और सुरुचि थी। एक दिन बालक ध्रुव अपनी बड़ी मां की गोद में बैठने की जिद कर बैठा। इससे उनकी बड़ी मां ने उन्हें गोद में नहीं बिठाया। दुखी ध्रुव को उनकी मां ने कहा कि बेटा यदि बैठना ही है तो परमात्मा की गोद पर बैठो। इसके लिए उन्होंने भगवान विष्णु की तप करने जंगल की ओर निकल पड़ा। नारद मुनि के द्वारा उनको घर भेजने के बावजूद भी उन्होंने घर नहीं जाने और तपस्या करने की जिद कर बैठा। तब उन्होंने द्वादश मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दिया। जिनके सहारे बालक ध्रुव ने कठोर तपस्या की और भगवान विष्णु खुद उनके सामने प्रकट हो गए। भगवान ने उसको गोद में लेकर ध्रुव की इच्छा को पूरी की। यदि मेहनत पूरे मन से की जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।

राजिम . चौबेबांधा में आयोिजत श्रीमद् भागवत कथा को सुनते हुए श्रद्धालु।

कथा सुनाते हुए पं. ईश्वर प्रसाद मिश्रा।

सादा भोजन करने से मन में अच्छे-अच्छे विचार आते हैं

पं. मिश्रा ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे बड़ा आश्रम है । सात्विक भोजन करने से मन में अच्छे विचार आते हैं। जो व्यक्ति दूसरे के संतान से भी प्रेम करता है ,प्यार जताता है उनके संतान को कभी दुख नहीं पहुंचता । लोग अपने लिए हमेशा कार्य करते हैं लेकिन दूसरों के लिए जो करता है निस्वार्थ भाव के साथ में उन्हें ईश्वर बहुत प्रेम करते हैं। उन्होंने रामचरित्र मानस के प्रसंग पर कहा कि हनुमानजी ने अपना पूरा जीवन प्रभु राम के चरणों में लगा दिया। नतीजन आज हनुमानजी पूरी दुनिया में पूजे जा रहे हैं। कलयुग में ईश्वर नाम ही श्रेष्ठ है । रामायण में भी लिखा हुआ है कि कलयुग केवल नाम अधारा नाम के आधार को लेकर यदि भक्ति किया जाए तो इस जीव का कल्याण निश्चित है। इस इस मौके पर प्रमुख रूप से सुंदर लाल साहू, राजाराम साहू नकछेणा राम साहू तुला राम सोनकर ,लीलाराम साहू, विशंभर पटेल ,नरेश पाल ,गोपाल पाल, गणेश पाल, पुनउ राम पटेल, महेश सोनकर, सीरत साहू, श्याम लाल पाल सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।

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