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इस आश्रम में बेटियों को पढ़ाने के साथ उठाते हैं शादी का जिम्मा; करा चुके 1000 जोड़ों की शादी

हर साल सामूहिक विवाह का आयोजन कर गांव की जरूरतमंद युवतियों की शादी कराई जाती है।

Danik Bhaskar | Mar 12, 2018, 06:29 AM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ में कोरबा के केंदई में एक ऐसा आश्रम है, जहां हर साल सामूहिक विवाह का आयोजन कर गांव की जरूरतमंद युवतियों की शादी कराई जाती है। इतना ही नहीं यहां गांव की लड़कियों की पढ़ाई कराने के साथ उनकी शादी बालिग होने पर ही कराई जाती है। 19 साल से चल रही इस परंपरा में जिन बेटियों की शादी कराई जा चुकी है, वे यहां हर साल होने वाले सामूहिक विवाह में बेटी बनकर आश्रम को अपना मायके मानते हुए पति-बच्चे के साथ पहुंचती हैं। जोड़ों के साथ उन बेटियों को भी यहां उपहार भेंट कर विदा किया जाता है।


- 30 साल से संचालित स्वामी भजनानंद वनवासी सेवा आश्रम में 1999 से गांव की गरीब और जरूरतमंद युवतियों की शादी कराने की परंपरा चलाई जा रही है। हर साल फरवरी-मार्च में बसंत पंचमी के बाद इसका आयोजन होता है।

- 5 युवतियों की शादी से शुरू की गई पहल में अब हर साल 40-50 जोड़ा विवाह बंधन में बंध रहे हैं। आश्रम से जुड़े रमेश गर्ग और मदन मोहन जोशी बताते हैं कि सामूहिक विवाह का उद्देश्य था कि गांव की बेटियों की शादी अच्छे से हो सके।

- विवाह में होने आर्थिक तंगी के कारण किसी तरह की परेशानी न हो। आयोजन में योग्य लड़के-लड़कियों को शामिल करने के लिए 2-3 माह पहले से तैयारी की जाती है। गांव-गांव जाकर पंच-सरपंच और लोगों को युवक-युवती के बारे में जानकारी देने और शादी में शामिल होने का न्योता भेजा जाता है।

- ऐसे युवक-युवतियों के माता-पिता आश्रम आकर शादी कराने के लिए पंजीयन कराते हैं। इसमें अनिवार्य होता है कि वे बच्चे शादी के योग्य और वे बालिग हो। उनकी शिक्षा और कुंडली की जांच के बाद शादी में शामिल किया जाता है। इसमें दोनों पक्ष के परिवार शामिल होते हैं। खर्च, उपहार, कपड़े और अन्य खान-पान की जिम्मेदारी आश्रम की तरफ से उठाई जाती है।

इस साल 51 जोड़ों की शादी कराई गई है
- आश्रम में 19 साल से गांव की बेटियों की शादी कराने की पहल चल रही है। इसमें अब तक एक हजार जोड़ों का विवाह हो चुका है। इस साल 51 जोड़ों की शादी की गई। विवाह में शामिल होने वाले जोड़े को बेटी की तरह घर की जरूरत का हर सामान दिया जाता है।

- गहने, साड़ी, दूल्हा के कपड़े, साइकिल, बर्तन, गद्दे, पेटी, पंखा, श्रृंगार के सामान आदि देते हैं। जिन युवतियों की शादी हो चुकी है, वे मायके जाए या न जाए लेकिन अपने पति-बच्चे के साथ साल में एक बार जरूर आश्रम आती हैं।

पढ़ाने के साथ शादी तक की जिम्मेदारी

- गर्ग बताते हैं कि आश्रम गत 30 साल से संचालित हो रहा है। यहां पहली से 8वीं तक के बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। इसके बाद जिन बच्चों को आगे की पढ़ाई करनी होती है, वे केंदई में जाते हैं। आश्रम का जिम्मा गिरजेश नंदनी दुबे संभालती हैं।

- यहां प्रदेश के कई जिलों से बच्चे पढ़ने आते हैं। इन दिनों 187 बच्चे रह रहे हैं। उनकी शिक्षा, रहन-सहन व खान-पान सब आश्रम की तरफ से होता है। 12वीं और स्नातक की पढ़ाई करने वाली कुछ बच्चियों की शादी यहीं से कराई गई है।

शादी के बाद बेटियों के ससुराल जाकर पूछते हैं हाल-चाल

- आश्रम से जुड़े हर वर्ग के लोग हर साल होने वाली सामूहिक विवाह में 10 दिन शामिल होते हैं। साल में वे जिन बेटियों की शादी हुई है, उन्हें समारोह में न्योता देने जाते हैं। साथ ही वे समय-समय पर सभी बेटियों के ससुराल जाते हैं, ताकि उनका हाल जान सकें। शादी कराने के बाद विधवा हो चुकी बेटियों की दोबारा विवाह कराने और उसके लिए योग्य लड़का ढूंढने की भी जिम्मेदारी निभाई जाती है। अब तक करीब 10 विधवाओं की शादी की जा चुकी है।