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न्यू इयर और बारातों में भी पटाखों पर बैन, फूटे तो मैरिज पैलेस पर होगी कार्रवाई

ऐसे में प्रतिबंध के कारण पटाखे नहीं बिकेंगे और जिन्होंने खरीद लिए, वे फोड़ नहीं पाएंगे।

Danik Bhaskar

Nov 30, 2017, 05:59 AM IST

रायपुर. शादियां और न्यू इयर सेलिब्रेशन का इंतजार कर रहे कारोबारियों तथा इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े लोगों में शासन के दो माह के पटाखा बैन से खलबली मच गई है। दो महीने शहर में 700 से 800 शादियां हैं। ऐसे में प्रतिबंध के कारण पटाखे नहीं बिकेंगे और जिन्होंने खरीद लिए, वे फोड़ नहीं पाएंगे। इससे तीन करोड़ रुपए से ज्यादा का पटाखा कारोबार प्रभावित होने की संभावना है। उधर, शासन ने राजधानी समेत प्रदेश के छह शहरों में सर्दियों के दौरान पर्यावरण के संरक्षण के लिए पटाखों के बैन पर सख्ती की तैयारी कर ली है। आवास-पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव अमन कुमार सिंह के अनुसार प्रशासन प्रतिबंध तोड़नेवालों से सख्ती से निपटेगा ही, लोग निदान-1100 पर भी इसकी शिकायत कर सकेंगे। इन शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होगी।


ठंड के मौसम में जमीन के नजदीक हवा सघन रहने के कारण पटाखे फोड़ने से ज्यादा प्रदूषण होता है। राजधानी में होलसेल के अलावा चिल्हर में बेचने वाले 100 से ज्यादा दुकान हैं। दुकानदार अब पटाखे तो बेच तो सकेंगे, लेकिन नगर निगम सीमा क्षेत्र में इसका उपयोग नहीं कर पाएंगे। शादियों में वधु पक्ष वर पक्ष का पटाखों से स्वागत करता है। यही नहीं वर पक्ष वाले भी इस दौरान जमकर पटाखे चलाते हैं। बैन की वजह से ऐसा नहीं कर पाएंगे। शासन के इस निर्णय का पटाखा कारोबारियों पर विपरीत असर पड़ेगा।

पटाखा कारोबारियों का कहना है कि खदानों में उपयोग किए जाने वाले एक्सप्लोसिव पटाखे से ज्यादा खतरनाक है, लेकिन इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। जबकि समारोह विशेष पर फोड़े जाने वाले पटाखे पर बैन उचित नहीं है। पटाखों से उतना प्रदूषण नहीं होता, जितना प्रचार किया जा रहा है। बड़े कारोबारी इरफान भाई का कहना है कि दिवाली के बाद शादी व न्यू ईयर
सेलिब्रेशन में पटाखों का उपयोग किया जाता है। पटाखों पर बैन लगाना प्रदूषण को कम करने की दिशा में उचित कदम है। लेकिन इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

बड़ा स्टॉक जाम होने का खतरा
बड़े पटाखा कारोबारियों के पास लाखों का स्टॉक है। बैन के बाद इसकी बिक्री नहीं होने की आशंका है। कारोबारी नुकसान की भी आशंका जता रहे हैं। शासन ने एक दिसंबर से 31 जनवरी तक पटाखों पर बैन लगाया है। इसके बाद पटाखों का उपयोग किया जा सकता है। कारोबारियों का कहना है कि गांवों में अप्रैल, मई व जून में शादी होती है। इस दौरान भी खूब पटाखे फोड़े जाते हैं। कारोबारी शहरी शादी व न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई बाद में करेंगे।


कांग्रेस ने किया विरोध :

पटाखों पर प्रतिबंध को कांग्रेस ने सरकार का तुगलकी फरमान करार दिया है। पीसीसी प्रवक्ता मनीष दयाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदूषण के प्रति गंभीर है किन्तु जल्दबाजी में लिए गए सरकार के निर्णय से पूरी तरह सहमत नहीं है। दिसंबर से जनवरी तक शादी ब्याह और उत्सवों का माह होता है। ऐसे में प्रतिबंध लगाने से पहले शासन को सर्वदलीय बैठक बुलाना चाहिए था।

मैरिज पैलेस ही जिम्मेदार
पटाखे न फूटें, इसकी जिम्मेदारी मैरिज पैलेस वालों को दी जाएगी। अगर वे रोक नहीं पाए तो जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई उन्हीं के खिलाफ होगी। लोग निदान के टोल फ्री नंबर 1100 पर भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत मिलते ही मौके पर पेट्रोलिंग पार्टी भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
ओपी चौधरी, कलेक्टर

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