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दावा: नोटबंदी से नक्सली कमजोर हुए खुलासा: बैंकों में जमा करवाएं हैं नोट

नक्सलियों ने बड़ी मात्रा में अपने पास रखे एक हजार और पांच सौ रुपए के नोट बदलवाए हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2017, 07:28 AM IST
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जगदलपुर. साल भर पहले नोटबंदी के समर्थन में भले ही बस्तर में नक्सलियों की कमर टूटने के दावे किए जाते रहे हों लेकिन साल भर बाद एक मुठभेड़ में बरामद नक्सलियों का खाता देखने से इस दावे की पोल खुल जाती है जिसमें नोटबंदी के समय 2 लाख रुपए जमा किए जाने का उल्लेख किया गया है।


सभी एरिया कमेटी से लेकर एलओएस तक को नोट बदलवाने की जवाबदारी दी गई थी। समझा जाता है कि बस्तर के विभिन्न हिस्सों में नक्सलियों ने बड़ी मात्रा में अपने पास रखे एक हजार और पांच सौ रुपए के नोट बदलवाए हैं। हालांकि कुछ मामलों में नोटबंदी के लिए पहुंचे नक्सलियों के मददगारों को पुलिस ने पकड़ा भी है, लेकिन इन सबके बावजूद वे अपने नोट बदलवाने में कामयाब हो गए हैं। आईजी विवेकानंद ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि नक्सलियों ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में काम करने वाले ठेकेदार, व्यवसायी और अन्य लोगों के माध्यम से नोट बदलवाए हैं। नक्सलियों ने अलग-अलग व्यक्तियों को 5 हजार, 10 हजार और इसी तरह छोटी-मोटी रकम देकर बैंकों में नोट बदलवा लिए है। नेलनार इलाके में मुठभेड़ के बाद बरामद नक्सलियों के बहीखाते विवरण में भी इस बात का खुलासा हुआ है।

हर साल 1 हजार करोड़ की वसूली
बस्तर के अंदरुनी इलाकों में कनेक्टिविटी के अभाव में सरकार के कायदे कानून से परे नक्सली अपने प्रभुत्व वाले इलाकों में जनताना सरकार भी चला रहे हैं। इनका सालाना बजट भी एक हजार करोड़ रुपए के आसपास बताया जा रहा है। नक्सलियों के बही-खाते में विभिन्न मदों पर होने वाले खर्च का विवरण दर्शाया गया है। इन हिसाब-किताब में नक्सलियों ने इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि खर्च के लिए रकम उन्हें कहां से मिली। आईजी विवेकानंद सिन्हा का कहना है कि नक्सली भीतरी क्षेत्रों में काम कर रहे सभी लोगों का सहयोग लेते हैं। अंदरुनी इलाकों में काम कर रहे छोटे-मोटे ठेकेदारों से लेकर तेंदूपत्ता व्यवसायियों से नियमित तौर पर लेवी वसूल करते हैं।

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