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काम नहीं आया इलाज चल बसी घायल पद्मावती

तमोर पिंगला एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर में घायल हथिनी पद्मावती की शुक्रवार दोपहर इलाज के दौरान मौत हो गई।

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 07:29 AM IST
Did not work cure injured Padmavati elephent

अंबिकापुर(रायपुर)। तमोर पिंगला एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर में घायल हथिनी पद्मावती की शुक्रवार दोपहर इलाज के दौरान मौत हो गई। रविवार रात बनारस रोड में नवाधक्की के पास एक सूखे कुएं में गिरने से गंभीर रूप से घायल हथिनी को चालीस घंटे बाद आपरेशन पद्मावती चलाकर क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया था। इसके बाद से उसका इलाज चल रहा है।

- बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद से विशेषज्ञ भी बुलाए गए थे लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। माना जा रहा है कि करीब बीस फीट गहरे सूखे कुएं में गिरने से उसकी रीढ़ एवं पैल्विक बोन टूट गए थे। शरीर के भीतर भी चोटें आई थी।

- मृत हथिनी को पीएम के बाद तमोर पिंगला इलाके में ही दफना दिया गया। एक दिन पहले तक हालत में सुधार होने का दावा करने वाले वन विभाग ने हथिनी की मौत के बाद चुप्पी साध ली है।

- तेरह हाथियों के अशोक दल की हथिनी रविवार रात घाट पेंडारी के पास एक ग्रामीण को दौड़ाने के चक्कर में सूखे कुएं में गिर गई थी। गिरने से उसे काफी चोटें आई थी। उसे बाहर निकालने एक्सीवेटर से रास्ता बनाया गया लेकिन उसका पिछला हिस्सा काम नहीं करने से वह बाहर नहीं निकल पाई।उसे कुएं के भीतर भी चारा एवं गुड़ दिया गया।

- तीसरे दिन दो बड़े क्रेन की मदद से उसे पट्‌टे में बांधकर बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे ट्रक में लोडकर तमोर पिंगला अभयारण्य के एलिफेंट रेस्कयू सेंटर में इलाज के लिए लाया गया। यहां स्थानीय वैटनरी डाक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही थी।

- उसके दोनों पिछले पैरों के काम नहीं करने से आशंका जताई जा रही थी कि उसका पैल्विक बोन एवं रीढ़ की हड्‌डी डैमेज हो गई है। गुरुवार को उसे चार बार स्लाइन चढ़ाया गया। दर्द से राहत दिलाने न्यूरोबियान के इंजेक्शन भी लगाए गए। इसके अलावा नीम के तेल में गुगुल व लहसुन को पकाकर हथिनी के पिछले हिस्से की सेंकाई भी कराई गई।

- सरसों, अलसी तेल से मसाज भी कराया गया। इस दौरान उसके शरीर में कुछ हरकत देख वन विभाग की टीम को उसके ठीक होने की उम्मीद नजर आई। तीन दिनों की कवायद के बावजूद शुक्रवार दोपहर करीब सवा तीन बजे हथिनी ने अंतिम सांसें ली। उसकी मौत से इलाज कर रहे डाक्टरों

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