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शिक्षाकर्मियों को सरकार की चेतावनी, तीन दिन में स्कूल लौटें वरना बर्खास्त

शिक्षाकर्मियों को तीन दिन के भीतर हड़ताल समाप्त कर स्कूलों में लौटने का निर्देश दिया गया है।

Danik Bhaskar | Nov 23, 2017, 06:07 AM IST

रायपुर. शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के तीसरे दिन सरकार सख्त हो गई है। शिक्षाकर्मियों को तीन दिन के भीतर हड़ताल समाप्त कर स्कूलों में लौटने का निर्देश दिया गया है। तीन दिन बाद गैर हाजिर रहने वाले शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त कर दिया जाएगा। कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से स्कूलों से गायब शिक्षाकर्मियों की सूची मांगी गई है। शासन के ताजा आदेश पर शिक्षाकर्मियों का कहना है कि सरकार ने भय पैदा करने के लिए ऐसा निर्देश जारी किया है। हड़ताल समाप्त नहीं होगी।


राज्य के करीब पौने दो लाख शिक्षाकर्मी 20 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे प्रदेश के 148 ब्लॉकों के 56 हजार स्कूलों में प्रायमरी से हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई ठप हो गई है। स्कूलों का बहिष्कार कर शिक्षाकर्मी धरने पर बैठे हैं। शिक्षाकर्मियों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर प्रायमरी और मिडिल स्कूल में पड़ा है। स्कूल केवल औपचारिकता निभाने के लिए खोले जा रहे हैं। शिक्षाकर्मियों के आंदोलन पर जाने के पहले शासन स्तर पर उन्हें चर्चा के लिए बुलाया था। चर्चा विफल होने के बाद शिक्षाकर्मी हड़ताल पर गए हैं।

सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के साथ ही सख्त रवैया अपनाने का फैसला किया है। प्रशासनिक अफसर शिक्षाकर्मियों के सात छोटे संगठनों को हड़ताल से बाहर करवाने में सफल हो गए हैं। विभाग के कार्यालयों में अटैच और रिटायर शिक्षकों को काम पर बुलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अब कार्रवाई की तैयारी है। सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और सीइओ जिला पंचायतों के जरिए स्कूलों से गैरहाजिर हड़ताली शिक्षाकर्मियों की सूची मांगी है।

इधर इस हड़ताल में राजनीति दल भी कूदने लगे हैं। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने सरकार से मांगे पूरी करने की वकालत की थी। बुधवार को सीजेसीजे के सुप्रीमो अजीत जोगी ने धरनास्थल पहुंचकर शिक्षाकर्मियों की मांगों का समर्थन किया। जोगी ने कहा कि अगले साल उनकी सरकार बनने पर सबसे पहले ये मांगें पूरी करेंगे। शिक्षाकर्मियों ने भी 2002 और बाद की हड़तालों के समय रमन सिंह समेत भाजपा नेताओं के बयानों के वीडियो वायरल कर अब सरकार में आने पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है।

खैरागढ़ : धरनास्थल पर नारे और भाषणों की जगह 12वीं फिजिक्स की पढ़ाई हुई

दूसरी तरफ खैरागढ़ ब्लॉक के शिक्षाकर्मियों ने अर्धवार्षिक परीक्षा को देखते हुए विरोध का अनूठा तरीका निकाला। बुधवार को धरनास्थल पर पं. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हायर सेकेंडरी स्कूल की कक्षा 12वीं के करीब 55 छात्र-छात्राओं की क्लास लगाई गई। शिक्षाकर्मी सत्येंद्र कौशिक बोर्ड पर फिजिक्स के सवाल समझाते दिखे। अब यहां रोज सुबह एक घंटे इसी तरह अलग-अलग विषयों की कक्षाएं लगेंगी।

मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा : संघ
शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे, केदार जैन और संजय शर्मा का कहना है कि सरकार की ओर से भय पैदा करने की कोशिश की जा रही है। शिक्षाकर्मी अपनी जायज मांग के लिए आंदोलन कर रहे हैं। मांग पूरी होते ही आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा।

12 वीं पास छात्र पढ़ाएंगे, मिलेगा अनुभव प्रमाण पत्र
राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई जारी रखने के लिए बारहवीं पास स्थानीय युवाओं को अध्यापन कार्य के लिए बुलाने का फैसला किया है। इन युवाओं को संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के जरिए अनुभव प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जो भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों की सेवाओं में नियुक्ति के समय अनुभव प्रमाण पत्र के रूप में मान्य होगा।

दूसरों को पढ़ाने से रोका तो होगी पुलिस कार्रवाई
अपर मुख्य सचिव एमके राउत ने सभी पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से कहा है कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था में अगर कोई हस्तक्षेप या बाधा पहुंचाने की कोशिश करे तो उसके विरुद्ध पुलिस कार्रवाई की जाए। मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अपने -अपने क्षेत्र में पढ़ाई निरंतर जारी रखने का आदेश दिया गया है।

ईदगाहभाठा मैदान पर यह दृश्य मेले नहीं बल्कि शिक्षाकर्मियों के आंदोलन का

शिक्षाकर्मी राज्यभर में धरना दे रहे हैं। राजधानी में उनका धरना ईदगाहभाठा में हिंद स्पोर्टिंग मैदान में चल रहा है। बुधवार को सैकड़ों की संख्या में शिक्षाकर्मी धरने पर बैठे। इस दौरान वहां सफाई और पानी की व्यवस्था नहीं होने से उन्होंने नाराजगी जाहिर की। इधर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता जगदीश गोस्वामी ने बताया कि शिक्षाकर्मियों की मांग के समर्थन में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से मुलाकात की। छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति ने शिक्षाकर्मियों की उचित मांगों का परीक्षण कर उन्हें दूर करने की मांग की है। समिति के विश्वजीत मित्रा, हरजीत जुनेजा और अमिताभ दीक्षित ने कहा है कि हर साल हड़ताल से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसी दशा में उनकी समस्या का स्थायी हल होना चाहिए। वेतन निर्धारण से लेकर संविलियन और क्रमोन्नति का लाभ भी दिया जाना चाहिए।