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प्रदेश के 21 जिलों में 21 जिलों में सूखा, धान के उत्पादन में 20 लाख टन की कमी

प्रदेश के 21 जिलों में बारिश की कमी के कारण इस बार ऐसा सूखा पड़ा कि 96 तहसीलों में धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई।

Danik Bhaskar | Nov 22, 2017, 07:33 AM IST

रायपुर. प्रदेश के 21 जिलों में बारिश की कमी के कारण इस बार ऐसा सूखा पड़ा कि 96 तहसीलों में धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। इन तहसीलों के कलेक्टर के नजरी आंकलन में आनावारी 50 पैसे से कम पाई गई।


हालत यह है कि इस बार प्रदेश में धान के उत्पादन में 20 लाख टन से अधिक की कमी होने की संभावना जताई जा रही है। सूखे के सर्वे के लिए पहुंची 8 सदस्यीय केंद्रीय टीम तीन दिन के दौरे में 6 जिलों का दौरा करेगी। टीम पहले दिन बेमेतरा, दुर्ग और महासमुंद जिले के गांवों में पहुंची। इस दौरान किसानों से मुलाकात के साथ ही उनकी फसल को भी देखा। इससे पहले सूखे का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम के सामने मंगलवार को राजस्व विभाग के सचिव एनके खाखा ने सूखे को लेकर प्रजेंटेशन दिया। इस दौरान कृषि विभाग के एसीएस अजय सिंह सहित सिंचाई, बिजली, खाद्य, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य और पंचायत विभाग के सचिव के अलावा रायपुर, बेमेतरा, दुर्ग और महासमुंद जिले के कलेक्टर भी मौजूद थे। केंद्रीय टीम के सामने राज्य के अफसरों की टीम ने 4401 करोड़ रुपए के राहत राशि की मांग का ब्यौरा भी पेश किया।

नुकसान के ये हैं तर्क
केंद्रीय टीम के सामने राज्य के अफसरों ने कम बारिश और बारिश के समय पर न होने को फसल नुकसान का प्रमुख कारण बताया। अफसरों ने तर्क दिया कि ब्यासी, रोपा और निंदाई न होने के कारण फसल उत्पादन में कमी आई है। निंदाई न हो पाने के कारण घास ने फसल को बर्बाद कर दिया। सेटेलाइट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इसकी पुष्टि की गई।

महासमुंद जिले की रिपोर्ट
केंद्रीय सूखा अध्ययन दल के सदस्य एवं केंद्रीय कृषि विभाग के डिप्टी कमिश्नर रामचंद्र, डिप्टी डायरेक्टर एस. परमार, अंडर सेक्रेटरी एस.एन. मिश्रा महासमुंद जिले के उखरा, नर्रा, झिटकी और कारागुला गांव पहुंच कर सूखे से प्रभावित खेतों का जायजा लिया। ग्राम उखरा के किसान उद्धव राम और श्यामाबाई सहित अन्य किसानों ने बताया कि शुरू में बारिश अच्छी हुई थी, लेकिन बाद में वर्षा की कमी के कारण बियासी में दिक्कत आई और धान की अपेक्षा खरपतवार खेतों में बहुतायत से उग आया। गांव में जल स्तर नीचे उतरा है, कुछ गांवों में ट्यूबवेलों में पावर पंप लगाए गए हैं।

मवेशियों के लिए हरे चारे की कमी हुई है। कलेक्टर ने बताया कि राज्य शासन ने महासमुंद जिले के सभी पांचों तहसील को सूखा प्रभावित घोषित किया है और किसानों का लगान माफ किया है। किसानों को नेपियर ग्रास लगाने के लिए प्रेरित किया गया है और किसानों को ओट्स बीज भी दिए गए हैं।

जलग्रहण : सूखे इलाकों में पानी के लिए 180 करोड़ की वर्क प्लानिंग
राज्य में जलग्रहण परियोजनाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए सात हजार 904 कार्यों के लिए 179 करोड़ 63 लाख रुपए के वार्षिक कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया। बैठक में जलग्रहण परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा भी की गयीं। राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों खासकर जहां भू-जलस्तर कम है, उन क्षेत्रों में जल संग्रहण और जल संचयन के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए आवश्यकतानुसार मनरेगा के साथ अभिशरण करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्य सचिव विवेक ढांड की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी की शासी परिषद की चौथी बैठक हुई। बैठक में जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के सीईओ आलोक अवस्थी ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में अक्टूबर माह तक एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना के तहत कुल 1700 जलग्रहण संरचनाओं का निर्माण किया गया।

इससे आठ हजार 98 किसानों को 3863 हेक्टेयर क्षेत्र में लाभ मिला है। बैठक में कृषि विभाग के एसीएस अजय सिंह, एसीएस पंचायत एमके राउत, एसीएस वन आरपी मंडल, पीएस वित्त अमिताभ जैन, सचिव इरीगेशन सोनमणि बोरा, सचिव पीएचई शहला निगार सहित राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के अधिकारी शामिल हुए।

दुर्ग जिले के 6 गांवों में पहुंची टीम
जिले में कम बारिश और सूखे की स्थिति में प्रभावित खेती-किसानी के कार्य और उत्पन्न संकट की स्थिति की जानकारी लेने केन्द्रीय टीम दुर्ग और धमधा विकासखंड के गांवों में पहुंचकर वहां खेतों का निरीक्षण किया। साथ ही फसल क्षति का आंकलन किया। टीम दुर्ग विकासखंड के गनियारी, खुरसुल, बोरई, पोटिया एवं धमधा के टेमरी व सेवती गांव पहुंची। उन्होंने गांववालों से चर्चा कर फसल क्षति और प्रभावित फसल उत्पादन की जानकारी ली। केन्द्रीय सूखा अध्ययन दल ने ग्राम सेवती में चौपाल लगाकर ग्रामवासियों से चर्चा की।

साथ ही कृषि विभाग एवं बैंकों के माध्यम से मिलने वाली सुविधा, सेवा और योजनाओं की जानकारी भी ली।