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रोहांसी के कांजी हाउस में 4 दिनों से बंद 18 मवेशी भूख-प्यास से मरे

ब्लाॅक मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ग्राम रोहांसी के कांजी हाउस के कमरे में बंद 18 मवेशियों की मरने से खलबली मच गई है।...

Bhaskar News Network| Last Modified - Aug 04, 2018, 03:26 AM IST

रोहांसी के कांजी हाउस में 4 दिनों से बंद 18 मवेशी भूख-प्यास से मरे
रोहांसी के कांजी हाउस में 4 दिनों से बंद 18 मवेशी भूख-प्यास से मरे
ब्लाॅक मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ग्राम रोहांसी के कांजी हाउस के कमरे में बंद 18 मवेशियों की मरने से खलबली मच गई है। फसल को नुकसान पहुंचा रहे 400 आवारा मवेशियों को पकड़ कर ग्रामीण चार दिन पहले कांजी हाउस कैंपस में लाए थे।

चारा-पानी नहीं होने से उसी दिन उन्हें कैंपस से छोड़ भी दिया था। लेकिन शुक्रवार की सुबह जब स्कूल के बच्चों को बदबू आई और कांजी हाउस में जाकर देखा तो रोंगटे खड़े हो गए। भवन के भीतर 18 मवेशी मरे पड़े थे।

गांव में इन दिनों आवारा मवेशियों की संख्या बढ़ गई है। खेतों में फसल को नुकसान हो रहा है। ऐसे में सरपंच द्वारा गांव के जानवर एवं आवारा जानवरों को फसल चराई करने की बात कहकर 31 जुलाई को करीब चार सौ आवारा मवेशियों को कांजी हाउस में बन्द कर दिया था। मगर उनके खाने पीने की व्यवस्था नहीं होने से जानवरों को छोड़ दिया गया। जबकि कांजी हाउस के एक कमरे में बंद मवेशियों को बहार नहीं निकाल कर उसे अंदर ही बंद कर दिया, जो पिछले चार दिनों से भूखे-प्यासे ही पड़े रहे। बंद मवेशियों को कोई देखने तक नहीं पहुंचा। तभी शुक्रवार की सुबह बदबू तेज गति से आने लगी तो लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। वहीं पास में ही स्कूल के बच्चों और शिक्षकों का भी बदबू से बुरा हाल होने लगा। तब बच्चों की छुट्टी शिक्षकों ने कर दी। फिर ग्रामीण कांजी हाउस के कमरे के अंदर देखने गए, जैसे ही दरवाजा खोला तो लोगो के रोंगटे खड़े हो गए। इतनी एक दो तीन नहीं बल्कि 18 मवेशी मरे पड़े थे।

शुक्रवार की सुबह स्कूली बच्चों को बदबू आने पर लगी जानकारी

पलारी. रोहांसी गांव के इसी कांजी हाउस भवन में मरे पड़े थे मवेशी।

ट्रैक्टर से खींच कर बाहर निकाला गया

ग्रामीण पीताम्बर मोहन चित्रांगद आदि ने बताया की कांजी हाउस में बन्द मवेशियों को भोजन पानी की व्यवस्था नहीं होने से मौत हो गई है। इस संबंध में सरपंच ईश्वर बघेल का कहना है की मवेशियों को ट्रैक्‍टर से खींच कर बहार निकाला जा रहा है। डॉ निर्मल चेलक पशुचिकित्सक का कहना है की कम से कम दो दिन पहले की मौत है। मरे हुए मवेशियों को एक जगह इकठ्ठा किया जा रहा है, जहां पीएम कर उनको दफनाया जाएगा।

गांव के मैदान में फेंका जा रहा, महामारी फैलने की आशंका

मोहल्ले वाले और शिक्षकों द्वारा सरपंच ईश्वर बघेल को इसकी सूचना मिली। सरपंच ने ट्रैक्‍टर को लेकर अपने कर्मचारी को कांजी हाउस पहुंचाया। अब मरे पड़े मवेशियों को ट्रैक्टर से खींच कर गांव के मैदान में फेका जा रहा है। वहीं आशंका जताई जा रही है कि इतने सारे मवेशियों की लाश की सड़न और बदबू गांव में फैलने से महामारी हो सकती है।



किसने बंद किया, जानकारी ली जा रही

इस संबंध में जनपद सीईओ डॉ एसकेएस परमार का कहना है की उसको घटना की जानकारी मिलने पर वो रोहांसी पहुंचे हैं। कांजी हाउस के कमरे के अंदर से बन्द होने के कारण वहां बंद जानवरों की मौत हो गई है। एक-एक कर सबको बाहर निकाला जा रहा है। सब मवेशी बाहर निकालने के बाद ही सही जानकारी मिल पाएगी कि कितने मरे हैं। कौन मवेशियों को लाकर बंद किया इसकी जानकारी ली जा रही है।

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