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खुरहा व चपका के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता होती है प्रभावित

पशु चिकित्सा विभाग द्वारा इन दिनों पशुओं को रोगों से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण किया जा रहा है। वहीं जरूरी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 30, 2018, 03:00 AM IST

खुरहा व चपका के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता होती है प्रभावित
पशु चिकित्सा विभाग द्वारा इन दिनों पशुओं को रोगों से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण किया जा रहा है। वहीं जरूरी टीकाकरण की जानकारी पशुपालकों को दी जा रही है। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी गांवों में रोज जाकर गायों का टीकाकरण कर रहे हैं।

पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण रामटेके ने बताया कि खेती-किसानी व दूध व्यवसाय के लिए पशु पालक गोवंशीय और भैसवंशीय पशुओं का पालन करते हैं। विषाणु जनित घातक रोग खुरहा और चपका के कारण दुधारू पशुओं की दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। इन बीमारियों से खेती-किसानी में काम आने वाले पशुओं की कार्यक्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इन बीमारियों की चपेट में आने से छोटे उम्र के बछड़ों एवं बछिया की मृत्यु भी हो जाती है। जिससे पशुपालक किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसे देेखते हुए टीका लगाने का काम किया जा रहा है। इस उद्देश्य से ब्लॉक के केशलीगोडान में टीकाकरण का काम पूरा किया गया है।

पशु पालकों को बताए लू लगने के लक्षण: डॉ. रामटेके ने पशुपालकों को समसामयिक सलाह देते हुए कहा है कि इस समय तेज गर्मी होने से गर्म हवाएं चल रही है।

पंडरिया. पशुओं को रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण किया जा रहा है।

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