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स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ का अनिश्चितकालीन आंदोलन अगस्त से

दस वर्षो से वेतन विसंगति से जूझते रहने के बावजूद मांग पूरा नहीं होने से परेशान स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ ने...

Danik Bhaskar | Jul 05, 2018, 03:10 AM IST
दस वर्षो से वेतन विसंगति से जूझते रहने के बावजूद मांग पूरा नहीं होने से परेशान स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ ने अगले माह से अनिश्चितकालीन आंदोलन का निर्णय लिया है। आंदोलन से मिशन्स रुबेला, टीकाकरण कार्यक्रम, शिशु संरक्षण माह, मिशन इंद्रधनुष जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम पूरी तरह बाधित हो जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होंगी। इसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।

रविवार को संघ की बैठक चंद्राकर छात्रावास डंगनिया में हुई। बैठक में प्रांताध्यक्ष संध्या रानी मोवले एवं प्रांतीय सचिव प्रवीण ढीड़वंशी ने बताया कि स्वास्थ्य संयोजक कैडर 10 वर्षो से वेतन विसंगति से जुझ रहा है। लगातार ज्ञापन के माध्यम से शासन के पास मांगे रखी गई। किंतु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं किया गया।

कार्रवाई का आश्वासन दिया था :-श्रीमती मोवले ने बताया कि वेतन विसंगति के संबंध में 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2015 तक अनिश्चितकालीन आंदोलन किया गया था। तब विभाग द्वारा प्रस्ताव शासन को भेजा गया था और 3 माह में कार्यवाही होने का आश्वासन दिया गया था। किंतु 3 वर्ष बाद भी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बैठक में तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के उप प्रांताध्यक्ष अजय तिवारी ने स्वास्थ्य कर्मचारियों के द्वारा किए जाने वाले अनिश्चितकालीन आंदोलन का पूरा समर्थन किया व आंदोलन के संबंध में जरूरी मार्गदर्शन भी दिए।

बैठक में प्रांताध्यक्ष मिर्जा कासिम बेग, अरुण ताम्रकार, आरके शर्मा, महामंत्री आरके अवस्थी, प्रकाश सिन्हा, के रिजवी, रमशीला साहू, हरीश जायसवाल व संभागीय पदाधिकारी अमृत लाल टूडे, पीताम्बर सिन्हा, शत्रुहन केंवट, सेवती साहू सहित सैकड़ों कर्मचारी उपस्थित रहे।

तीन माह तो दूर, तीन साल में भी नहीं हुई कार्रवाई

संघ के प्रांतीय प्रवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि शासन का ध्यान बार बार आकृष्ट कराने के बाद भी आज तक समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। इसलिए अागामी माह में अनिश्चितकालीन आंदोलन का निर्णय लिया गया है। तैयारी पूरी हो गई है। वेतन विसंगति दूर करने के लिए विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में 3 माह में कार्यवाही होने का आश्वासन दिया गया था। किंतु 3 वर्ष बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।