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कोचियों की मनमानी, महंगी चार गुठली को बरेजहा कंद के बराबर खरीद रहे

पंडरिया ब्लॉक के सुदूर वनांचल के बैगा आदिवासी बहुतायत में वनोपज पर ही निर्भर हैं। बैगा आदिवासियों को वनोपज का सही...

Dainik Bhaskar

Jun 20, 2018, 03:10 AM IST
कोचियों की मनमानी, महंगी चार गुठली को बरेजहा कंद के बराबर खरीद रहे
पंडरिया ब्लॉक के सुदूर वनांचल के बैगा आदिवासी बहुतायत में वनोपज पर ही निर्भर हैं। बैगा आदिवासियों को वनोपज का सही दाम दिलाने के लिए सरकार द्वारा हर साल चार गुठली का विक्रय दर निर्धारित किया जाता है। इस साल भी शासन द्वारा 93रुपए का विक्रय दर और 12 रुपए बोनस निर्धारित किया है। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते व्यापारी व कोचिया महज 20 रुपए किलोे बिकने वाला बरेजहा कांदा के बराबर चार बीज खरीदकर पूरा फायदा उठा रहे हैं।

शासकीय दर पर चार गुठली खरीदने के लिए 12 फड़मुंशी भी रखे गए हैं। लेकिन सही ढंग से देखरेख के अभाव में व्यापारी बहुत ही कम दाम पर चार गुठली खरीद लेते हैं। बाजार में खुलेआम व्यापारी बरेजहा कांदा के वजन के बराबर चार गुठली खरीद रहे हैं। जबकि बरेजहा कांदा 20 रुपए किलो मिल रहा है। इस तरह चार गुठली भी 20 रुपए किलो में बेचने के लिए बैगा आदिवासी मजबूर हैं। फड़ मुंशी सिद्धराम मरावी नेउर का कहना है राशि नहीं मिलने के कारण गुठली खरीदी नहीं कर पा रहे हैं। राशि आने के बाद खरीदी की जाएगी। इसका फायदा उठाते हुए कोचिए गांव पहुंच रहे हैं और घराें में जाकर महज 50 रुपए किलो में चार गुठली खरीद रहे हैंं। बैगा आदिवासी महुआ गुल्ली के बाद इन दिनों चार गुठली इकट्‌ठा कर उसे बेचकर जरूरी सामान खरीद रहे हैं।

नेऊर.वनांचल के बाजर में वनोपज का सही दाम लोगों को नहीं मिल रहा है।

गुणवत्तायुक्त बीज खरीदी


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