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कोदो कुटकी व मोटे अनाज नहीं पौष्टिक अनाज कहलाएंगे: नरेश

पंडरिया ब्लाक के ग्राम बाहपानी में बुधवार को गांव बचाओ समिति ने देशी बीज और वन खाद्य मेला का आयोजन किया। इस मेला...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:40 AM IST

कोदो कुटकी व मोटे अनाज नहीं पौष्टिक अनाज कहलाएंगे: नरेश
पंडरिया ब्लाक के ग्राम बाहपानी में बुधवार को गांव बचाओ समिति ने देशी बीज और वन खाद्य मेला का आयोजन किया। इस मेला में बैगा महापंचायत के संरक्षक नरेश विश्वास ने कहा कि डोंगर कुटकी, मंडिया, सांवा, सलहार, कांग, कोदो, जोवार को मोटे अनाज और अंग्रेजी में मिलेट कहते हैं। इसे बैगा आदिवासी अपने पारंपारिक व मिश्रित बेवर खेत में बिना हल चलाए हाथ से बोते हैं। भारत सरकार ने 10 अप्रैल 2018 से इन अनाजों को पौष्टिक अनाज घोषित किया है और वर्ष 2018 को राष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया है। अब यह मोटे अनाज नहीं पौष्टिक अनाज कहलाएंगे।

विश्वास ने बताया कि इन अनाजों में चावल और गेंहू से कई गुणा ज्यादा पोषक तत्व और मधुमेहरोधी गुण होते हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि इन पोषक अनाजों की खेती का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। इतना ही नहीं कुछ पारंपरिक बीज भी इस क्षेत्र से लुप्त हो चुका है। यही कारण है कि सांवा, झुंझरू, सिकिया, भेजरा इस प्रदर्शनी में दिखाई नहीं दिया। बैगाओं की भोजन सुरक्षा और पोषण की जरूरतों को देखते हुए बिश्वास दो दशक से बेवर खेती और बेवर की जैवविविधता के संरक्षण और बैगाओं के वनाधिकार के लिए काम कर रहे हैं।

इस दौरान बैगाओं ने तीन तीन प्रकार की कुटकी व कोदो, मंडिया, कांग, सलहार के साथ देशी धान आदि और बीसों प्रकार के वन खाद्य और वनौषधियों की प्रदर्शनी लगाई और 40 साल से लुप्त हो रहे सल्हार, झुंझरू, सीखीया के बीज को बचाने और वनाधिकार कानून में बैगाओं को दिए गए विशेष अधिकार हैबीटैट राइट्स के बारे में भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में कार्यक्रम में तुकाराम चंद्रवंशी कांग्रेस विधान सभा क्षेत्र के उपाध्यक्ष, नरेश बुनकर गांव बचाओ समिति, इतवारी मछिया, अनिल बामने, पूर्वी कुलकर्णी, रोहण मुखर्जी शामिल हुए।

बैगाओं को मिलना चाहिए हैबीटैट राइट्स: देश के 75 आदिवासी समूह को भारत सरकार ने विशेष संकटग्रस्त जनजाति समूह घोषित किया है, इसमें बैगा आदिवासी भी एक है। इसके लिए वनाधिकार कानून की धारा 3 उपधारा 1 खंड (ङ) हैबीटैट राईट्स का अधिकार दिया है। कानून के तहत जहां तक बैगा वनाधारित खाद्य पदार्थ का संग्रहण, वनोपज संग्रहण, वनौषधियों का संग्रहण करने जाते हैं। जहां जंगल में बैगाओं देव, गढ़, पवित्र और पूजा का स्थान है, उस पूरे रूढ़ि जन्य इलाके का अधिकार बैगाओं को दिया जाना है।

इस क्षेत्र में कांदागढ़िया, दादर में कांदावानी, बाहपानी, भलिनदादर, कान्हाखेरो, ढेपरापानी, बासाटोला, महारानीटोला, छीरपानी, ठेंगाटोला और रूखमीदादर बैगा बाहुल गांव है। यहां के लोगों की पूरी आजीविका इसी कांदागढ़िया दादर पर निर्भर है। यह इलाका हैबीटैट राइट्स के अधिनियम 2012 के धारा 12 ख के तहत जिला कलेक्टर के पास दावा करनी चाहिए। बिश्वास के नेतृत्व में एमपी में बैगाचक के सात गांव के बैगा आदिवासी हैबीटैट राइट्स हासिल करने में सफल रहे हैं।

नेऊर.बाहपनी में लगे मेले में पहुंचे क्षेत्र के लोग।

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