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100 फीसदी अनुदान पर 226 यूनिट चूजे दिए गए

बैगा-माडा परियोजना अंतर्गत 100 फीसदी अनुदान पर बैकयार्ड कुक्कुट की एक इकाई लागत 2000 रुपए है। इसके अन्तर्गत 25 चूजे एवं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 02, 2018, 04:10 AM IST

100 फीसदी अनुदान पर 226 यूनिट चूजे दिए गए
बैगा-माडा परियोजना अंतर्गत 100 फीसदी अनुदान पर बैकयार्ड कुक्कुट की एक इकाई लागत 2000 रुपए है। इसके अन्तर्गत 25 चूजे एवं कुक्कुट आहार दिया जाता है। इस योजना के तहत पंडरिया ब्लॉक में 226 यूनिट चूजा बैगा जनजातियों को व विभागीय योजना में 60 यूनिट चूजा वितरित किया गया।

पशु चिकित्सक डॉ तरुण रामटेके ने बताया कि मुर्गीपालन से पूरे देश में 90 लाख लोग जुड़े हैं। हर वर्ष सकल घरेलू उत्पाद में इसका 70 हजार करोड़ रुपए का योगदान है। शासन मुर्गी पालन शुरू करने के लिए अनुसूचित जाति एव जनजाति के लोगों को 90 प्रतिशत अनुदान देता है। महज 300 रुपए से व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। पशुपालन विभाग कबीरधाम द्वारा कुक्कुट पालन कार्यक्रम के अंतर्गत बैकयार्ड पोल्ट्री योजना चलाई जा रही है। पशु चिकित्सक डॉ रामटेके ने बताया कि बैकयार्ड (घर के पीछे पड़ी खाली जगह) का उपयोग करते हुए योजना का लाभ उठा सकते हैं। एक मुर्गी के लिए एक वर्ग फीट और अंडा के लिए ढाई वर्ग फीट प्रति मुर्गी जगह की आवश्यकता होती है। योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लाभार्थियों को रोजगार देना और उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त आय सृजित करना है। डॉ रामटेके ने बताया कि बताया कि बैकयार्ड मुर्गीपालन के लिए ग्रामप्रिया, वनराजा, कारी, निर्भीक जैसी उन्नत नस्ल हैं। ये बीमार कम पड़ते हैं। इसलिए जोखिम नहीं है। देशी नस्लों की अपेक्षा उन्नत नस्लों में अंडा देने की क्षमता और वजन ज्यादा होती है। ये चूजे घूम-घूम कर अपने लिए भोजन खोज लेते हैं। एक इकाई में कम से कम 7-8 अंडे प्रतिदिन मिलते हैं। मुर्गों के विक्रय से भी आय होती है।

पंडरिया. पंडरिया ब्लॉक में 226 यूनिट चूजे बैगा जनजातियों को दिया गया।

तीन सौ रुपए से शुरू कर सकते हैं कुक्कुट पालन

डाॅ रामटेके ने बताया कि विभागीय योजना में प्रत्येक पात्र हितग्राही को 1 यूनिट योजना में 45 चूजे दिया जाता है। इसके लिए शासन से 3000 रुपए की राशि निर्धारित है। इसमें हितग्राही को 300 रुपए ही देना होता है। शेष 90 फीसदी अनुदान शासन देता है।

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