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किसानों ने पानी चोरी का आरोप लगाते हुए किया पुतला दहन

13 वें दिन भी एनटीपीसी लारा प्रभावित स्थाई नौकरी की मांग को लेकर किसान हड़ताल पर रहे हैं। तेज धूप, हवा और बारिश में भी...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:55 AM IST
13 वें दिन भी एनटीपीसी लारा प्रभावित स्थाई नौकरी की मांग को लेकर किसान हड़ताल पर रहे हैं। तेज धूप, हवा और बारिश में भी आंदोलन जारी रहा। रविवार को हुई बारिश में टेंट के नीचे बैठे ग्रामीण भीगते रहे। पर आंदोलन स्थल से उठे नहीं। रायगढ़ के पूर्व विधायक के पुत्र पवन अग्रवाल की मौजूदगी में किसानों ने पानी की चोरी को लेकर प्रबंधन पर निशाना साधा और पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया।

एनटीपीसी लारा में स्थाई नौकरी को लेकर हड़ताल चौक पर डटे रहे आंदोलनकारियों ने रविवार को कांग्रेस के नेताओं का पुरजोर समर्थन प्राप्त हुआ। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के नेता कृष्ण कुमार गुप्ता का समर्थन संदेश लेकर कांग्रेस नेता हड़तालियों से मिले। इसमें गोपाल दास गुप्ता पूर्व उपाध्यक्ष कांग्रेस कमेटी, सुरेंद्र कुमार पंडा पूर्व महामंत्री एवं सफेद गुप्ता जिला पंचायत सदस्य सम्मिलित हुए। गोपाल ने कहा कि प्रशासन तथा एनटीपीसी का पक्षपातपूर्ण व्यवहार अनुचित है। सीपत की तरह लारा एनटीपीसी में भी भू-विस्थापितों को नौकरी मिलनी चाहिए। वहीं पंडा ने फर्जी पुनर्वास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एनटीपीसी को टाटा सिंगूर पश्चिम बंगाल की तरह उखाड़ फेंकना चाहिए। धरना स्थल पर मौजूद कांग्रेस नेताओं ने आने वाले दिनों में नाकाबंदी कर एनटीपीसी प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ाने की घोषणा की है। ताकि उनकी सुस्त सरकार की आंखें खुले प्रभावितों को न्याय मिल सके। उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी की फर्जी नीतियों तथा अवैधानिक कार्यों का पर्दाफाश पहले ही हो चुका है। उद्योगों को भूमिगत जल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। क्षेत्र का गिरता हुआ जल स्तर चिंताजनक है। जिस के संबंध में पूर्व ही एनटीपीसी को शासन द्वारा निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन एनटीपीसी में अपने जलाशय की आपूर्ति भूमिगत जल से किया जा रहा है जिसके लिए जलाशय के आस-पास लगभग 12 बोर से दिन-रात भूमिगत जल का दोहन किया जा रहा है। केलो नदी से भी पानी का इस्तेमाल भारी मात्रा में हो रहा है। भारी मात्रा में पानी के इस्तेमाल से आसपास के जल स्तर प्रभावित हुआ है। कई गांवों में तालाब, कुएं व नलकूप सुख गए हैं। जिसके विरोध में सभी प्रभावित किसान एकजुट होकर प्रबंधन का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान ग्रामीणों के अलावा कांग्रेसी नेता भी मौजूद रहे।

बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां समर्थन में, रविवार को फूंका पुतला।