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जीआरपी के पास साधन नहीं, 50 किमी दूर घटना हो तो ट्रेन से पहुंचते हैं स्थल

जीआरपी के पास फिलहाल कोई साधन नहीं है। सक्ती से जामगांव तक 75 किलोमीटर का एरिया जीआरपी ट्रेनों के सहारे ही कवर करती...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 03:00 AM IST
जीआरपी के पास फिलहाल कोई साधन नहीं है। सक्ती से जामगांव तक 75 किलोमीटर का एरिया जीआरपी ट्रेनों के सहारे ही कवर करती है। यदि ट्रेन सही समय पर मिल जाए तो ठीक वरना थाने में बैठे रहना पड़ता है। कई दुर्घटना या क्राइम के बाद देर तक ट्रेन नहीं मिलती इसलिए घटनास्थल तक पहुंचने में अफसरों को बहुत देर हो जाती है।

रायगढ़ जीआरपी के अंदर कुल 8 स्टेशन हैं, जिनमें रायगढ़ किरोड़ीमल नगर, भूपदेवपुर, खरसिया, झाराडीह, सक्ती और डाउन लाइन में कोतरलिया और जामगांव हैं। 8 स्टेशनों में जीआरपी को कुल 75 किलोमीटर की दूरी कवर करना होता है। दुर्घटना चाहे 20 किलोमीटर दूर जामगांव में हो या फिर 50 किलोमीटर दूर सक्ती में जीआरपी ट्रेन में ही स्पॉट पर पहुंचती है। अपने साधन से जीआरपी हादसे की जगह तक बहुत खास मामलों में ही पहुंच पाती है। खुद के पास कोई साधन नहीं होने के कारण जीआरपी को ट्रेन पर ही आश्रित रहना पड़ता है। इस समस्या की जानकारी जीआरपी के उच्चाधिकारियों को है लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हो कराया जा रहा है। पूर्व रायपुर रेल एसपी पारूल माथुर ने रायगढ़ दौरे के दौरान कहा था कि वे यहां की समस्या जानती हैं और वाहन की व्यवस्था जल्द करवाएंगी, लेकिन आजतक वाहन नहीं मिल पाया है। बड़े स्टेशनों में जीआरपी ने यह सुविधा दे रखी है। इस मामले में हमने अधिकारियों से संपर्क किया तो उनसे संपर्क नहीं किया जा सका।

पेट्रोल के लिए नहीं मिलता खर्च - जीआरपी आसपास के मामलों में बाइक से पहुंच जाती है। कई बार आपातकाल की स्थिति में दूर के के हिस्सों में भी जाती है, लेकिन इसके लिए इन्हें कोई खर्च या भत्ता नहीं मिलता। स्वयं के खर्च पर ही जीआरपी घटना स्थल पर पहुंचती है। यह भी एक कारण है कि जीआरपी ऐसे केस में मालगाड़ी या अन्य यात्री ट्रेन पर डिपेंड रहती है।

जीआरपी मालगाड़ी में करती है सफर

घटना स्थल पर समय पर पहुंचने के फेर में जीआरपी कई बार मालगाड़ी में ही सफर करती है। इसमें भी कई बार जीआरपी को रुक-रुक कर सफर करना पड़ता है। मालगाडिय़ों को छोटे स्टेशनों पर भी कॉशन आर्डर के कारण रुकना पड़ता है। एक ही स्टेशन पर घंटों खड़ी रहने के कारण ही जीआरपी घटना स्थल पर पहुंच नहीं पाती है। तय समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण बाद में जीआरपी को जनता का आक्रोश झेलना पड़ता है।

आठ स्टेशन और बल भी अपर्याप्त

जीआरपी की कुल क्षमता 32 जवानों की है। जिसमें 1 थानेदार, 1 एएसआई, 8 हेड कांस्टेबल और 22 कांस्टेबल की है। अभी फिलहाल जीआरपी में 10 पद 8 सिपाही के और 2 हवालदार के रिक्त हैं। सभी स्टेशनों में जीआरपी पर्याप्त ड्यूटी नहीं दे पा रही है। खरसिया और सक्ती के लिए हर रोज रायगढ़ से दो जवान ड्यूटी के लिए जाते हैं बाकी अपने स्थान पर रहते हैं। 22 लोग ही जीआरपी थाने समेत 8 स्टेशनों को संभालते हैं।

पत्राचार कर थकी जीआरपी

ऐसा नहीं है कि स्थानीय जीआरपी ने इस मसले पर कुछ न किया हो। स्थानीय जीआरपी कई बार उच्चाधिकारियों से पत्राचार कर यहां गाड़ी की मांग कर चुकी है। मुख्यालय के उदासिन रवैए के कारण जीआरपी हर दुर्घटना में देर से पहुंच रही है। रायगढ़ स्टेशन को छोड़ कई बार ऐसा होता है जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है और साधन नहीं होने के कारण जीआरपी के अफसर पहुंच नहीं पाते हैं।

23 फरवरी को खरसिया फाटक के पास एक व्यक्ति की मौत रात 10 बजे ट्रेन से टकरा कर हुई। जीआरपी को पता चला लेकिन आधी रात में अप लाइन पर कोई गाड़ी नहीं होने के कारण वह सुबह मौके पर पहुंची। तब तक शव पर से ही ट्रेन गुजरते रहती है।

केस 1

25 फरवरी की शाम खरसिया यार्ड में रात 10 बजे एक सब्जी व्यवसायी की मौत मालगाड़ी से कट कर हुई। जीआरपी को तुरंत सूचना भी नहीं मिल पाती है। अप लाइन पर कोई गाड़ी नहीं होने के कारण जीआरपी सुबह 3 बजे गोंडवाना सुफा से घटनास्थल तक पहुंचती है।

केस 2