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जमानत नहीं कराने से गुस्साए जीजा ने मर्डर के बाद साले की लाश फेंकी थी रेलवे ट्रैक पर

18 फरवरी को झाराडीह खरसिया रेल लाइन पर एक शव मिला था। पुलिस ने इस मामले को सुलझा दिया है। शव को देखकर ही लग रहा था कि...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:15 AM IST
18 फरवरी को झाराडीह खरसिया रेल लाइन पर एक शव मिला था। पुलिस ने इस मामले को सुलझा दिया है। शव को देखकर ही लग रहा था कि हत्या के बाद किसी ने शव को पटरी पर फेंका है ताकि हत्या दुर्घटना लगे। पुलिस ने जिस आरोपी को पकड़ा है वह मारे गए युवक का जीजा है। किसी मामले में ससुराल पक्ष ने आरोपी की जमानत नहीं कराई थी। इससे वह गुस्से में था और ससुराल की जायदाद हड़पने के लालच में उसने साले को मार दिया।

मृतक की पहचान भुवनेश्वर गबेल निवासी बोंदरा गांव जिला जांजगीर-चांपा के रूप में हुई। पूछताछ में मृतक के जीजा चंद्रकुमार गबेल ने बताया कि कुछ साल पहले वह खाद चोरी के मामले में जेल गया था। जमानत के लिए उसने ससुराल से कुछ रकम मांगी थी, लेकिन ससुराल से उसे कोई सहयोग नहीं मिला। चंद्रकुमार की जमानत कराने के लिए उसके परिवार को अपनी जमीन बेचनी पड़ी थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी। ससुराल से मदद नहीं मिलने का कारण वह अपने साले भुवनेश्वर गबेल को मानता था। इसके अलावा भुवनेश्वर अपने ही घर का इकलौता लड़का था, चंद्रकुमार को लगा कि भुवनेश्वर नहीं रहेगा तो पूरी जायदाद उसे ही मिल जाएगी। इस लालच में आरोपी ने अपने साले की हत्या की प्लानिंग की। चंद्रकुमार ने साले भुवनेश्वर को लड़की देखने चलने की बात पर खरसिया बुलाया। 18 फरवरी को भुवनेश्वर ट्रेन से खरसिया स्टेशन पहुंचा। यहां शाम को चंद्रकुमार अपनी बाइक से लेने गया।

रेलवे स्टेशन से साले को बैठाकर आरोपी मंगलबाजार खरसिया स्थित शराब दुकान ले गया और साले को जमकर शराब पिलाई। वह चंद्रकुमार को बाइक पर बिठाकर खरसिया-झाराडीह अप लाइन के पास लेकर गया। नशे में धुत भुनेश्वर को उसने जमीन पर लिटाया और एक बड़ा सा पत्थर लाकर उसने भुवनेश्वर का सिर कुचल दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या को ट्रेन एक्सीडेंट का रूप देने के लिए वह लाश को खींचकर रेलवे पटरी पर डालकर भाग गया। कुछ देर गुजर जाने के बाद वह फिर से आया और शव को कटा हुआ देख वह वापस घर चला गया। हत्या का खुलासा होने के बाद आरोपी के विरुद्ध धारा 302 और सबूत मिटाने का प्रयास करने के लिए 201 के तहत कार्रवाई कर जेल भेजा गया है।

आरोपी

इस तरह से पहुंची आरोपी तक पुलिस

मामले में खरसिया पुलिस और क्राइम ब्रांच दोनों साथ काम कर रही थी। मामले में पहले मृतक की पहचान जरूरी थी। उसके बाद ही आगे की कड़ी पर पुलिस काम कर सकती थी। पुलिस ने लगातार घटनास्थल के पास के गांवों और खरसिया, छाल, रायगढ़ की छोटी बड़ी फैक्टरियों में जाकर मृतक के फोटोग्राफ्स दिखाकर पता लगाया। इसी बीच 26 फरवरी को मृतक के परिजन ने फोटो को देखकर भुवनेश्वर की पहचान की। पुलिस उसके कार्यस्थल पूंजीपथरा गई जहां भुवनेश्वर गबेल के दोस्त गणेश गबेल के बारे में पता चला। गणेश बघेल ने 18 फरवरी को भुवनेश्वर को घर जाने के लिए बस स्टैंड पर छोड़ना बताया। इसके बाद मृतक के मोबाइल का कॉल डिटेल निकाला गया। लास्ट काल उसके जीजा का आया था। जिसपर पुलिस को जीजा पर शक हुआ। पूछताछ में जब हर बार अलग बयान आने लगा तब पुलिस को शक यकीन में बदला और उसने कड़ाई से पूछताछ करते हुए सच उगलवाया।

इनकी मेहनत से केस हुआ सॉल्व

मामले में मृतक की पहचान नहीं होने पर यह केस और उलझता जा रहा था। इसी कारण पुलिस ने पहचान करने के लिए ही काफी जोर लगाई और 26 फरवरी तक उसका रिजल्ट भी मिला। इसके बाद काल डिटेल निकालकर हत्यारे तक पहुंचे। इन सब में एसडीओपी खरसिया अशोक वाडेगांवकर, थाना प्रभारी खरसिया धर्मानंद शुक्ल, प्रभारी क्राइम ब्रांच प्रदीप जायसवाल, चौकी प्रभारी सीएम मालाकार के संग थाना खरसिया और क्राइम ब्रांच की पूरी टीम की भरपूर मेहनत की।