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परसरामपुर के भू-जल में 5 गुना अधिक रसायन, मजबूरी में नदी का पानी पीते हैं

महानदी के किनारे बसे परसरामपुर गांव के भू-जल में रसायन की मात्रा सामान्य से 5 गुना अधिक है। गांव के लोग खुद को...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:15 AM IST
महानदी के किनारे बसे परसरामपुर गांव के भू-जल में रसायन की मात्रा सामान्य से 5 गुना अधिक है। गांव के लोग खुद को स्वस्थ रखने सुबह-शाम डेढ़ किलो मीटर दूर महानदी से पानी लाकर पीने को मजबूर है। इस बात की शिकायत ग्रामीण पीएचई के अफसरों से कर चुके हैं, बावजूद यहां के पानी की जांच अफसरों ने नहीं कराई है, और न ही रसायनों की अधिकता का कारण पता लगा सके।

पानी में मौजूद रसायनों का असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। गांव में अधिकांश को पथरी और त्वचा संबंधी रोग की शिकायत है। 18 से 20 साल के युवाओं के चेहरे भी नियमित पानी सेवन के कारण चमक नहीं है। अधिकांश लोग खुद को स्वस्थ रखने घरों में खाना बनाने और पीने के लिए नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए गांव की महिलाएं दोनों डेढ़ से दो किमी पैदल नदी जाकर पानी लाती है, तो पुरुष सायकल पर पानी लाते हैं, महानदी के किनारे बसे होने के कारण गांव में बोर की संख्या दूसरे गांवों की तुलना में ज्यादा है। पानी की 150 फिट गहराई में उन्हें पर्याप्त पानी मिल रहा है, लेकिन पानी में रसायनिक तत्वों की मात्रा अधिक होने के कारण इसका इस्तेमाल सिर्फ खेतों की सिंचाई व निस्तारी के लिए ही किया जा रहा है।

भास्कर

फालोअप

लैब से जांच कराई ली गई पानी की रिपोर्ट

रसायन तय मानक अधिकता

हार्डनेस 200 से 600 1300 मिग्रा./ली.

पीएच 7.0 से 8.5 8.9 पीएच स्केल

क्लोराइड 200 से 600 930 मिग्रा./ली.

फ्लोराइड 1.0 से 1.5 3.8 मिग्रा./ली.

मैग्निशियम 30 से 150 450 मिग्रा./ली.

आयरन 0.1 से 1.0 1.66 मिग्रा./ली.

कैल्शियम 75 से 200 730 मिग्रा./ली.

कंडक्टिविटी 700 अधिकतम 2100 मिग्रा./ली.

गांव के पानी में दाल नहीं गलती

ग्रामीण बताते है कि बोर व हैंडपंप के पानी में दाल नहीं गलती है। इस पानी से बनी चाय पीने लायक नहीं होती। इसलिए मजबूरन उन्हें नदी जाकर घर के लिए पानी लाना पड़ता है। गांव के समृद्ध लोगों ने तो अपने घरों में वाटर फिल्टर लगवा लिए हैं, ताकि उनके घरों में सभी स्वस्थ रहे।

सीधी बात |डीएल खरे, सहायक अभियंता सारंगढ़ डिवीजन पीएचई

समय बे समय पूछेंगे तो मैं कैसे बता पाऊंगा

परसरामपुर के भूजल में रसायन की मात्रा अधिक होने की शिकायत, विभाग ने जांच कराई है या नहीं?

हां परसरामपुर है, यहां पानी की जांच पहले कराई गई है।

तो पानी में रासायनिक तत्वों की मात्रा लोगाें के स्वास्थ्य अनुरूप है या नहीं?

अब आप इतनी रात में समय बे समय पूछेंगे तो मैं कैसे बता पाऊंगा।

विभाग की तरफ ग्रामीणों के लिए क्या व्यवस्था कराई गई है, गांव में ?

आप कल कार्यालयीन समय पर बात कीजिए, अभी मैं कुछ नहीं बता पाऊंगा।

शिकायत के बाद भी आपने कुछ नहीं किया, और न ही आप गांव में गए है?

मुझे पता है, कौन सा गांव कहां, आप न बताएं तो बेहतर होगा, अभी मैं बात नहीं करूंगा।

रसायनों की अधिकता से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव

कैल्शियम- रक्त में कैल्शियम की अधिकता से कैल्सेमिया नामक बीमारी हो सकती है। इससे पैरा-थायरॉइड ग्रंथि प्रभावित होती है, जो आगे चलकर किडनी में स्टोन पैदा करने में सहायक होता है।

हार्डनेस- इसकी अधिकता से यह स्पष्ट हो जाता है, कि पानी में मौजूद दूसरे रसायनिक तत्व अधिक मात्रा है। यह पानी की टोटल डिजॉल्व सबस्टेंसेस (टीडीएस) को प्रदर्शित करती है।

आयरन- इसकी अधिकता से डायरिया व पेट संबंधी समस्याएं पैदा करती है। आयरन की अधिकता वाले पानी के नियमित इस्तेमाल से लोग इसके अादि हो जाते हैं, जिसका प्रभाव आंख, बाल व चेहरे पर पड़ता है।

फ्लोराइड- इसकी अधिकता से हड्डी, दांत कमजोर पड़ने लगते हैं। नियमित पानी के सेवन से शरीर में हड्डियां गलने लगती है।

30 मिनट में बदल जाता है पानी का रंग

बोर व नल का पानी 30 मिनट बाल्टी में रखने पर पानी का रंग बदल जाता है। पानी पीले रंग का हो जाता है। पानी का रंग बदलने के पीछे ग्रामीण रसायनों की अधिकता को ही कारण बता रहे हैं। ग्रामीण अपनी इन समस्याओं से अफसरों को बहुत पहले अवगत करा चुके हैं, लेकिन अबतक उनके लिए पानी की जांच नहीं की गई है।