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अभी भी देवी देवता साक्छात हावय

हमर हिन्दू जाति वर्ग म पोथा पूरान के मुताबिक साढ़े तैतींस करोड़ देवी देवता हावय जेमा पथरा पहाड़, पेड़, नदिया, गाय, सूरज,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:15 AM IST

अभी भी देवी देवता साक्छात हावय
हमर हिन्दू जाति वर्ग म पोथा पूरान के मुताबिक साढ़े तैतींस करोड़ देवी देवता हावय जेमा पथरा पहाड़, पेड़, नदिया, गाय, सूरज, चांद, तारा, आकास, पानी, धरती, साधु, संत, सबो कोई ह सामिल हावय। हमन के चार जुग ल जानथन जेमा हर जुग म भगवान बिस्नु ह आने-आने अवतार लेके आथे, कलजुग म तको कलिकी अवतार रूप धर के आही। बिस्नु जी के 24 अवतार हावय जेमा कलिकी रूप ह आखरी हावय। आजकल मनखे मन देवी-देवता ल नई मानय, नई पूजय, पूछथे कहा हावय, फूल के खुसबु कहा दिखथे ओला तो अपन नाक ले सुंघ के जानथे औइसने भगवान ह महसुस करे के चीज हे तभो कतको झन मनखे मन नास्तिक रहीथे जेला हमर ये लेख ह उकर पूरा मन, हिरदय, दिल, दिमाग सबो ल सांत कर दिही सबले पहली त्रेतायुग के कहानी ल देखथन जब रामजी ह रामेश्वर तीर समुद्र पार म भगवान िसव के स्थापना करके ओखर पुजा करिस जौउन ह आज 12 ज्योर्तिलिंग के रूप म सामिल हावय। लंका म जाये बर पुल बनाईस जेमा विस्वकर्मा देव के लइका नल-नील दुनो भाई मन मेहनत करिस जौउन पथरा ल नल-नील छुही तौउन ह पानी म नई बुड़ये अइसना बरदान ओ दुनो भाई मन पाये रहीस, जौउन पुल ह आज तक कलजुग म तको जस के तस हावय, ए हर परमान आये के देवता हावय, हिमाचल परदेश म मां सती के जीभ ह गिरे हावय जिंहा के मंदिर ल ज्वाला देवी कहीथे, जेमा आज तक लगातार आगि के लावा ह छेदा ले उगलथे, पहाड़ उपर ज्वाला देवी हावय जेला कई बार मुगल सासक मन पानी डारके दीवार के मुंह ल बंद करीस तभो ले ज्यों के त्यों आगि ह जलथे। भारत अउ नेपाल, तिब्बत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश म 51 शक्तिपीठ हावय। बिस्नु भगवान ह अपन सुदर्शन चक्र ल माता के सरीर ल काटीस 51 जगह टुकड़ा गिरीस ओ ह आज सक्तिपीठ बनके साक्छात देवी के रूप म हावय। जम्मु-कश्मीर म भगवान भोले बाबा के बरफ ले अपन मन के ज्योतिर्लिंग बनथे जौउन ह सावन भर रहीथे, देस-विदेस ले भक्त, श्रद्धालु मन दर्शन करथे इहां ल माता पार्वती ल शिवजी ह अमरकथा ल सुनाय रहीस जेला एक जोड़ी कबुतर मन सुने रहीस जौउन जोड़ी ह आज तक गुफा भीतरी रइथे, बरफ ले बने शिवलिंग म कतको अगरबत्ती, धूप, गरमी, सूर्य के ताप तको साल भर नई पिघलय, जौउन ह अपन मन के पिघल जाथे, साक्छात हिमालय म सिवजी के वास रहीथे। हमर पोथा पुरान के अनुसार आज भी सात मनखे मन अमर हावय जेकर नाम बलि, व्यास, विभीसन, हनुमान, अस्वथामा, कुपाचार्य, परसुराम ह शामिल हे जौउन मन अमर हावय एखर अलावा 51 सक्तिपीठ म आसाम के कामाख्या देवी आथे जिहां ल मा सती के योनि गिरे रहीस आज भी माता के मासिक धर्म के परमान उहां देखे ल मिलथे, सबो सक्ति पीठ ले एखर अलग महत्व हावय काबर के साधु संत, महात्मा, औघड़ मन इहें ल सिद्धी प्राप्त करथे। मध्यप्रदेश के उज्जैन नगर म 12 ज्योतिर्लिंग म एक हावय भगवान महाकाल जिहां ल आज तक कोनो राजा नई रूकय काबा के इहां के राजा स्वयं महाकाल जी ह खुद हावय, जौउन राजा मन उज्जैन म रात रूके बर करिस ओला ओखर क्रोध के सामना करे बर पड़ीस हावय, मध्य प्रदेश के मईहर म मां सारदा देवी ह पहाड़ उपर बिराजे हावय जिहां आज भी सबले पहली बिहनिया आल्हा जी ह आरती करथे जेला साक्छात देवी मां ह दरसन देथे, चार धाम म उत्तराखंड प्रदेश म बद्रीनाथ धाम हावय जिहां ल चार महिना पट बंद रहीथे अखंड ज्योति अपन मन के चार महिना तक जलथे आउ स्वयं नारद जी ह रोज ओकर पुजा पाठ करथे । पश्चिम बंगाल के राजधानी कलकत्ता म माता काली हावय जौउन ह अपन भक्त रामकृष्ण परमहंस तीर स्वयं बातचीत करत रहीस जेला, पूरा संसार जानथे महाराष्ट्र के सिंगनापुर धाम म आज भी घर, बैंक, दुकान, आॅफिस के दरवाजा खुल्ला रहीथे जेमा दरवाजा ताला बंद नई रहये जौउन मनखे ह चोरी करथे औकर मौत हो जाथे रात म चंद्रमा ह निकलथे जौउन ल अपन आप म बहुत घमंड रहीस हावय ओला देवता मन श्राप देहे रहीस के साल म तोला एक बार गरहन जरूर लगही जेकर परमान हावय चन्द्रगरहन आज भी होथे। द्वापरजुग म जौउन जगह कुरूक्षेत्र म कौरव-पांडव म लड़ाई लड़े रहीस ओ जगह आज भी बंजर भूमि जइसे पड़े हावय, चारो तरफ सन्नाटा रहीथे, ओ तीर जाबे त कान ले सरसर आवाज आथे ऐला मल्हार रहईया ओम प्रकाश पाण्डेय जी ह बताथे।

राजेश पांडेय मल्हार

लंका म जाये बर पुल बनाईस जेमा नल-नील दुनो भाई मन मेहनत करिस

हमन के चार जुग ल जानथन जेमा हर जुग म भगवान बिस्नु ह आने-आने अवतार लेके आथे

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